Maharashtra Politics Live Updates: सुनेत्रा पवार बनीं डिप्टी सीएम, शरद पवार का प्लान हुआ फेल तो छलका रोहित का दर्द

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महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला. यहां एनसीपी चीफ अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. मुंबई के लोकभवन में आयोजित बेहद सादे समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. यह शपथ ऐसे समय में हुई है, जब पूरा पवार परिवार और राज्य अजित पवार के असामयिक निधन के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है.

सत्ता, शोक और सियसात… तीनों के संगम ने इस घटनाक्रम को ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि बेहद जटिल भी बना दिया है. एक ओर सत्ता संभालने की मजबूरी, दूसरी ओर परिवार और परंपराओं का बोझ… इसी द्वंद्व के बीच सुनेत्रा पवार ने डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी स्वीकार की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई उपमुख्यमंत्री को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वह अजित पवार के विज़न को आगे बढ़ाएंगी.

सुनेत्रा पवार के पास रहेगा कौन-कौन सा विभाग?

अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने न सिर्फ उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि एनसीपी की कमान भी अपने हाथों में ली. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि वित्त और योजना मंत्रालय उनके पास ही रहेगा. सुनेत्रा पवार को राज्य उत्पाद शुल्क (स्टेट एक्साइज), खेल और अल्पसंख्यक विकास जैसे अहम विभाग सौंपे गए हैं.

‘शुभकामनाएं कैसे दें?’

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भावनात्मक बयान भी सामने आए. एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने कहा, ‘सिर पर पहाड़ जैसा दुःख है, हम सभी शोक में डूबे हैं. ऐसे में उन्हें शुभकामनाएं कैसे दें, यह समझ में नहीं आ रहा.’ वहीं कांग्रेस नेता उदित राज ने शपथ ग्रहण पर सवाल उठाते हुए कहा कि शोक के 13 दिन पूरे होने से पहले समारोह क्यों किया गया.

इस पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया. पार्टी ने उदित राज के बयान को पवार परिवार का अपमान बताते हुए कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों का बहाना बनाकर राजनीति की जा रही है. बीजेपी ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी की तत्काल शपथ का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह ‘मौत पर भी गिद्ध जैसी राजनीति’ कर रही है.

शपथ ग्रहण से दूर रहा शरद पवार का परिवार

गौर करने वाली बात यह रही कि शपथ ग्रहण समारोह में पवार परिवार का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं रहा. इसी बीच एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलों पर शरद पवार ने बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि दो राष्ट्रवादी ताकतों का साथ आना अजित दादा की इच्छा थी और पिछले चार महीनों से अजित पवार तथा जयंत पाटिल के बीच बातचीत चल रही थी. शरद पवार के मुताबिक, 12 फरवरी को इसकी आधिकारिक घोषणा होनी थी. इसी क्रम में पार्थ पवार ने बारामती में शरद पवार से मुलाकात भी की, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया.

राज ठाकरे का पटेल Vs पाटिल वाला कटाक्ष

इस बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक और विवाद जुड़ गया, जब एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष के गैर-मराठी होने पर सवाल उठाए. उन्होंने प्रफुल्ल पटेल के पार्टी अध्यक्ष बनने की संभावना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की जड़ें मराठी मिट्टी में हैं, इसलिए उसका कार्यकारी अध्यक्ष सच्चा मराठी होना चाहिए, शायद कोई पाटिल, लेकिन पटेल नहीं.’ राज ठाकरे के इस बयान ने भाषा और पहचान की राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है.

कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक संवैधानिक पदभार नहीं, बल्कि शोक, सत्ता, परिवार और राजनीति के बीच संतुलन साधने की कठिन परीक्षा भी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि वह अजित पवार की राजनीतिक विरासत को किस तरह आगे बढ़ाती हैं और महाराष्ट्र की राजनीति इस बड़े बदलाव के बाद किस दिशा में जाती है.

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