पश्चिम की चुप्पी से बारूद के ढेर पर दक्षिण एशिया? पाकिस्तान के ‘जिहादी सांपों’ का खौफनाक एजेंडा आया सामने
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Pakistan Terrorist: 2019–2020 के दौरान उभरा टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन बताया गया है, जिसे जानबूझकर ‘स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध’ के रूप में पेश किया गया, ताकि उसके इस्लामवादी स्वरूप को छिपाया जा सके और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के दबाव के बीच वैश्विक आतंकवाद निगरानी से बचा जा सके.
पाकिस्तान के आतंकी संगठन राजनीतिक दल बनाकर दुनिया की आंखों में धूल झोंक रहे. (फाइल फोटो)नई दिल्ली. वॉशिंगटन से आई एक रिपोर्ट ने दुनिया की नींद उड़ा दी है. इसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं. रिपोर्ट में पश्चिमी देशों, मीडिया और सरकारों को फटकार लगाई गई है. कहा गया है कि वे ‘जिहादी आतंकवाद’ की गहराई और विचारधारा को समझने में फेल रहे हैं.
उनकी इसी नासमझी का फायदा उठाकर पाकिस्तान अपने यहां पल रहे आतंकियों को खाद-पानी दे रहा है. ये संगठन जातीय सफाए और इस्लामीकरण के एजेंडे पर काम कर रहे हैं. तुर्की की जर्नलिस्ट उज़ाय बुलुत ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम ने अपना नजरिया नहीं बदला, तो हालात और भयानक हो जाएंगे.
हाफिज सईद का बेटा चला रहा पार्टी, लश्कर का नया चेहरा
रिपोर्ट में ‘पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग’ (PMML) का काला सच उजागर किया गया है. यह पार्टी 2023 में बनी थी. इसे खूंखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ही राजनीतिक मुखौटा माना जाता है. लश्कर को संयुक्त राष्ट्र ने बैन कर रखा है. इस पार्टी के बड़े नेताओं में हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद शामिल है. 2024 के चुनाव में इन्होंने 200 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन जनता ने इन्हें नकार दिया. लाहौर और कराची में भी इनकी दाल नहीं गली और एक भी सीट नहीं मिली.
दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए बना ‘टीआरएफ’
सिर्फ पीएमएमएल ही नहीं, ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) भी तेजी से उभरा है. यह संगठन 2019-20 के दौरान सामने आया. रिपोर्ट के मुताबिक, यह लश्कर का ही एक प्रॉक्सी ग्रुप है. इसे जानबूझकर ऐसा बनाया गया ताकि यह ‘लोकल’ और ‘सेक्युलर’ लगे. पाकिस्तान ने यह चाल इसलिए चली ताकि वह एफएटीएफ (FATF) की कार्रवाई से बच सके. वे दुनिया को गुमराह करना चाहते थे कि यह कोई वैश्विक आतंकी गुट नहीं है.
पश्चिमी देशों की ‘गलती’ से आतंकियों के हौसले बुलंद
रिपोर्ट में अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘पीजे मीडिया’ के हवाले से कहा गया है कि पश्चिमी लोग जिहादी आतंकवाद को सिर्फ विदेश नीति की शिकायत मानते हैं. वे इसके धार्मिक और वैचारिक पहलू को इग्नोर कर रहे हैं. इस कमजोर रणनीति का फायदा पाकिस्तान की सेना उठा रही है. वे आतंकियों का इस्तेमाल क्षेत्रीय विस्तारवाद के लिए कर रहे हैं. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जब तक पश्चिम अपनी सोच नहीं बदलेगा, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में रहेगी.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें