नई दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक, 10 साल बाद साझेदारी

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नई दिल्ली. भारत कूटनीतिक दुनिया में एक बड़ा इतिहास रचने जा रहा है. नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज दूसरी ‘भारत-अरब विदेश मंत्रियों’ की अहम बैठक हो रही है. यह मौका इसलिए बेहद खास है क्योंकि 10 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत और अरब लीग के देश इस स्तर पर मिल रहे हैं. इससे पहले 2016 में बहरीन में पहली बैठक हुई थी, लेकिन भारत में यह पहली बार आयोजित की जा रही है.

इस महाकुंभ में पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के 22 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. भारत और यूएई मिलकर इस बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे. शनिवार शाम 4 बजे शुरू होने वाली इस बैठक से पहले सभी विदेशी मेहमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. इस मंच का मकसद व्यापार, निवेश, एनर्जी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है.

10 साल बाद भारत में पहली बार मेजबानी
यह ‘India-Arab FMM’ भारत और अरब देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय संस्थागत मंच है. दिलचस्प बात यह है कि भारत और अरब विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी और अब एक दशक बाद दूसरी बैठक दिल्ली में हो रही है. भारत और अरब संवाद को 2002 में MoU के जरिए औपचारिक रूप दिया गया था. 2008 में ‘अरब-इंडिया को-ऑपरेशन फोरम’ की शुरुआत हुई थी. भारत अरब लीग का ‘ऑब्जर्वर’ (Observer) भी है, जिसमें 22 सदस्य देश आते हैं.

6 विदेश मंत्री और कई बड़े अधिकारी शामिल
इस बैठक में अरब दुनिया के लगभग सभी अहम देश अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. फिलिस्तीन, कोमोरोस, सूडान, सोमालिया, लीबिया और ओमान समेत 6 देशों के विदेश मंत्री खुद बैठक में शामिल होंगे. वहीं, मिस्र, यमन, कतर, यूएई और सऊदी अरब की ओर से उप-विदेश मंत्री या राज्य मंत्री स्तर के नेता हिस्सा लेंगे. जिबूती, अल्जीरिया, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, लेबनान, सीरिया, मॉरिटानिया और इराक से वरिष्ठ अधिकारी आधिकारिक स्तर पर भाग लेंगे.

इकोनॉमी, एनर्जी और सुरक्षा पर होगी चर्चा
पहली बैठक में सहयोग के 5 प्राथमिक क्षेत्र तय किए गए थे- अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति. आज की बैठक में मौजूदा सहयोग को और मजबूत करने पर फोकस रहेगा. भारत और अरब देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश और ग्लोबल मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है. यह मंच भारत की ‘वेस्ट एशिया पॉलिसी’ के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.

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