26 किमी. लंबी नई रेल लाइन छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के लोगों को देगी राहत, जानें इसका रूट
Last Updated:
रेल मंत्रालय ने बैकुंठ-उरकुरा 26.40 किमी चौथी रेल लाइन को मंजूरी दी, जिससे छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के यात्रियों व उद्योगों को राहत और आर्थिक विकास मिलेगा.
रेल मंत्रालय ने दी नई लाइन को मंजूरी.नई दिल्ली. रेल मंत्रालय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत बैकुंठ से उरकुरा तक 26.40 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है. इस परियोजना की अनुमानित लागत 426.01 करोड़ रुपये है. यह फैसला यात्रियों की भीड़ कम करने, ट्रेनों की आक्यूपेंसी सुधारने और माल ढुलाई को और बेहतर बनाने के लिए लिया गया है.
बैकुंठ-उरकुरा खंड बिलासपुर-रायपुर-नागपुर मुख्य लाइन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी रेल नेटवर्क पर स्थित है. यह देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में से एक है. वर्तमान में इस खंड की क्षमता पूरी तरह से फुल हो चुकी है, जिससे ट्रेनों में देरी और जाम की समस्या आम है. नई चौथी लाइन से ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी, अतिरिक्त पैसेंजर और कोचिंग ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, देरी कम होगी और आक्यूपेंसी में सुधार आएगा.
यात्रियों के अलावा, इस परियोजना से मालगाड़ियों की क्षमता भी बढ़ेगी. अनुमान है कि हर साल लगभग 14.25 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी. इससे भारतीय रेलवे को पहले साल से ही 61.70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है. इस क्षेत्र में पावर प्लांट, कोयला खदानें, स्टील और सीमेंट उद्योगों का तेजी से विकास हो रहा है.
चौथी लाइन से बल्क कमोडिटी (कोयला, स्टील, सीमेंट आदि) की तेज और बेहतर ढुलाई संभव होगी, जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. यह परियोजना एनर्जी, सीमेंट एंड मिनरल कॉरिडोर के तहत चिह्नित की गई है. रेलवे का फोकस ऐसे हाई-ट्रैफिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर है. परियोजना पूरी होने पर यात्रियों को तेज, सुगम और समयबद्ध यात्रा मिलेगी, जबकि माल ढुलाई अधिक विश्वसनीय बनेगी. इससे क्षेत्र के उद्योगों को फायदा होगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी.