‘उसके यूरीन से ब्लड आया’,12 घंटे में बदली थी इमरान हाशमी की जिंदगी, छोटे बेटे ने 5 साल लड़ी कैंसर की जंग
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इमरान हाशमी ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया साल 2014 में जब उनके बेटे को कैंसर डायग्नोस हुआ, तो उनकी पूरी जिंदगी बदल गई. उनकी लाइफ से स्टारडम, सक्सेस जैसे शब्द निकल गए. बेटे के लिए अस्पताल के चक्कर काटना. डॉक्टर्स से अपॉंइटमेंट लेना यही सब लगा रहा. लेकिन अब उनका बेटा ठीक गया है.
इमरान हाशमी अपने बेटे के साथ पोज देते हुए. (फाइल फोटो)मुंबई. इमरान हाशमी सालों बाद फिर से लाइमलाइट में आ गए हैं. उन्होंने दशकों तक पर्दे पर टूटी-फूटी ज़िंदगी जीने वाले किरदार, एंटी-हीरो और सर्वाइवर का रोल निभाया है. इमरान हाशमी कहते हैं कि असल जिंदगी ने उन्हें ऐसा झटका दिया, जिसकी कोई स्क्रिप्ट कल्पना भी नहीं कर सकती थी. करियर की ऊंचाइयों या तारीफों से बहुत पहले, 2014 की एक दोपहर ने उनके कंट्रोल, सफलता और यकीन की परिभाषा ही बदल दी. हाल में इमरान ने अपनी जिंदगी के सबसे दर्दनाक दौर के बारे में बात की. यह दर्दनाक पल वो था जब उनके छोटे बेटे अयान को कैंसर डायग्नोस हुआ था.
इमरान हाशमी ने उस दिन को याद करते बताया कि एकदम से सामान्य जिंदगी सदमे में बदल गई. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा,”मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर था जब मेरा बेटा 2014 में बीमार पड़ा. मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि वह वक्त कैसा था. यह पांच साल तक चला. मेरी जिंदगी एक दोपहर में बदल गई.”
इमरान हाशमी ने कहा, “13 जनवरी को हम ब्रंच के लिए गए थे. मैं अपने बेटे के साथ पिज्जा खा रहा था. पहली बार लक्षण उसी टेबल पर दिखा. उसके पेशाब से खून आया. अगले तीन घंटे में हम डॉक्टर के क्लिनिक में थे. डॉक्टर ने कहा कि आपके बेटे को कैंसर है. कल ही ऑपरेशन थिएटर में ऑपरेशन कराना होगा. फिर कीमोथेरेपी करानी होगी. तो मेरी पूरी दुनिया 12 घंटे में बदल गई.”
बुरी तरह से टूट गए थे इमरान हाशमी
इमरान खान ने कहा कि डायग्नोस की अचानक खबर ने इस सदमे को और गहरा बना दिया. न कोई चेतावनी, न कोई तैयारी. बस एक पहले और एक बाद. इमरान ने कहा कि वह बुरी तरह से टूट गए थे. जिंदगी आखिरकार स्थिर लगने लगी थी. उन्होंने कहा, “आप कह सकते हैं कि आपकी जिंदगी में एक हाई पॉइंट आता है. और लगता है कि अब सब कुछ कंट्रोल में है. फिर अचानक आपको एक झटका लगता है. ऐसा होता है.”
इस घटना से किताब लिखने के लिए इंस्पायर हुए इमरान हाशमी
इसके बाद पांच साल का लंबा दौर आया, जिसमें अस्पताल की गैलरी, इलाज का शेड्यूल और लगातार चिंता ही थी. इमरान कई बार बता चुके हैं कि उस दौर ने उनकी जिंदगी को बिल्कुल बुनियादी बना दिया, महत्वाकांक्षा को पीछे छोड़कर सिर्फ मौजूदगी, धैर्य और शुक्रगुजारी सिखाई. इस अनुभव ने बाद में इमरान को एक किताब लिखने के लिए इंस्पायर किया, ताकि ऐसे ही हालात से गुजर रहे माता-पिता को मदद मिल सके. आज, जब उनका बेटा स्वस्थ है और रिकवरी कर रहा है, इमरान उस समय को अपनी जिंदगी का सबसे कठिन लेकिन सबसे बदलने वाला दौर मानते हैं.
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रमेश कुमार, सितंबर 2021 से न्यूज 18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. इससे पहले एबीपी न्यूज, हिंदीरश (पिंकविला), हरिभूमि, यूनीवार्ता (UNI) और नेशनल दुनिया में काम कर चुके हैं. एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और पॉलिटिक्स में रूच…और पढ़ें