यह जंगली प्याज गाल ब्लैडर की पथरी में है बेहद असरदार, जानिए आयुर्वेद का रहस्य, कैंसर में भी सहायक – Uttar Pradesh News
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लोकल 18 से बातचीत में दीनदयाल शोध संस्थान, जयप्रभा गांव में स्थित ‘रामनाथ आरोग्यधाम’ के वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समय गाल ब्लैडर की पथरी आम समस्या बन गई है. अगर गाल ब्लैडर में पथरी है, तो अक्सर बिना ऑपरेशन इसका इलाज मुश्किल होता है. कभी-कभी यह पथरी लिवर कैंसर की ओर भी बढ़ सकती है, इसलिए समय रहते सही सावधानी और उपचार बेहद जरूरी है.
गोंडा. वनपलाण्डु एक औषधीय पौधा है जिसका उपयोग आयुर्वेद में पुराने समय से किया जा रहा है. इसे जंगली प्याज भी कहा जाता है. दिखने में यह सामान्य प्रतीत होता है, लेकिन इसके औषधीय गुण बहुत खास माने जाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, वनपलाण्डु कई प्रकार की बीमारियों में लाभकारी है और इसका इस्तेमाल पाचन से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, अपच या पेट दर्द में किया जाता है. ऐसे लोगों के लिए यह पौधा बेहद फायदेमंद माना जाता है.
लोकल 18 से बातचीत में दीनदयाल शोध संस्थान, जयप्रभा गांव में स्थित ‘रामनाथ आरोग्यधाम’ के वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समय गाल ब्लैडर (Gall Bladder) की पथरी आम समस्या बन गई है. अगर गाल ब्लैडर में पथरी है, तो बिना ऑपरेशन इसका इलाज मुश्किल होता है. कभी-कभी यह पथरी लिवर कैंसर की ओर भी बढ़ सकती है. गाल ब्लैडर कैंसर के पहले एक स्टेज आता है जिसे एसआईटी स्टेज कहा जाता है.
कैंसर में भी सहायक
आचार्य चरक, आचार्य सुश्रुत और आचार्य वाग्भट ने इसे ‘जालूधर’ के रूप में समझाया है. मॉडर्न चिकित्साशास्त्र में इस स्थिति में मरीज को डायरियोटिक दवाई दी जाती है ताकि शरीर से पानी निकाला जा सके. लेकिन वनपलाण्डु और हरीतकी का संयोजन पुराने आयुर्वेदिक ग्रंथों में विशेष रूप से वर्णित है. चरक ने लिखा है: “जालूधर तू नित विरोचनम”, यानी नियमित रूप से इस संयोजन का सेवन करने से गाल ब्लैडर की पथरी को रोकने और कैंसर के बढ़ने की प्रक्रिया को टालने में मदद मिलती है. डॉ. मिश्रा बताते हैं कि वनपलाण्डु एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसे आप गमले में या गार्डन में भी उगा सकते हैं. यह जालूधर के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक उपाय माना जाता है.
आइए जानते हैं वनपलाण्डु के प्रयोग के बारे में
डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि चरक ने इस पौधे के पंचमूल (नीचे की जड़ सहित) के उपयोग का वर्णन किया है. वनपलाण्डु का जड़ प्याज जैसी संरचना वाला होता है और आयुर्वेद में इसे जंगली प्याज भी कहा जाता है.
गाल ब्लैडर स्टोन एकदम गायब
वनपलाण्डु की जड़ को सुखाकर इसके कई कल्प और प्रयोग किए जाते हैं, लेकिन आमतौर पर इसका चूर्ण बनाकर उपयोग किया जा सकता है. हालांकि, इसका सही प्रयोग और मात्रा केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करनी चाहिए, क्योंकि इसमें हरितकी के साथ संयोजन करके ही यह जालूधर (गाल ब्लैडर स्टोन) पर असरकारी होता है. डॉ. मिश्रा कहते हैं कि यह संयोजन उन लोगों के लिए बहुत लाभकारी है जिनका पेट फूल गया हो या पेट में पानी जमा हो, या जिनकी लिवर/गाल ब्लैडर की समस्या पहले से मौजूद हो. हरितकी और गोमूत्र के साथ वनपलाण्डु का प्रयोग सही तरीके से करने पर व्यक्ति जालूधर की समस्या से मुक्ति पा सकता है.
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