पहाड़ों में हर घर में बनती है ये काली दाल, जो सर्दियों में शरीर को रखती है फिट, जानिए इसे बनाने की पहाड़ी रेसिपी – Uttarakhand News
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Bhatt Ki Daal Recipe: उत्तराखंड के पहाड़ों में सर्दियों की खास रसोई का हिस्सा है भट्ट की दाल. प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर यह पारंपरिक दाल स्वाद और सेहत दोनों में ही गजब है. पहाड़ी घरों में इसे भूनकर बनाया जाता है, जिससे इसकी पौष्टिकता और खुशबू बढ़ जाती है. ठंड के मौसम में यह शरीर को गर्माहट देती है. आइए जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी.
बागेश्वर: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सर्दियों के मौसम में जिस दाल को सबसे खास माना जाता है, वह है भट्ट की दाल. काले सोयाबीन जैसी दिखने वाली यह पारंपरिक पहाड़ी दाल स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहद अच्छी मानी जाती है. पहाड़ों में सदियों से भट्ट की दाल को रोजमर्रा के भोजन में शामिल किया जाता रहा है. खास बात यह है कि इसे अन्य दालों की तरह भिगोकर नहीं, बल्कि भूनकर बनाया जाता है, जिससे इसकी पौष्टिकता और स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.
भट्ट की दाल प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होती है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाल सर्दी-जुकाम से बचाव, शरीर की कमजोरी दूर करने, जोड़ों के दर्द में राहत और पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक मानी जाती है. ठंडे मौसम में यह शरीर को अंदर से गर्माहट देती है, इसलिए पहाड़ी घरों में सर्दियों के दौरान भट्ट की दाल खास तौर पर बनाई जाती है.
भट्ट की दाल बनाने का तरीका
भट्ट की दाल बनाने की पारंपरिक विधि भी इसे खास बनाती है. सबसे पहले भट्ट को अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद एक कड़ाही में बिना तेल के धीमी आंच पर भट्ट को लगातार चलाते हुए भूनते हैं. जब दाने हल्के-हल्के चटकने लगें और खुशबू आने लगे, तब समझ लें कि भट्ट अच्छे से भुन चुका है. इसके बाद इसमें थोड़ा गेहूं का आटा डालकर उसे भी सुनहरा होने तक भून लिया जाता है, जिससे दाल का गाढ़ापन और स्वाद बढ़ता है.
जखिया का तड़का देता है ख़ास स्वाद
सबसे पहले लोहे की कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म किया जाता है. इसमें जीरा, लहसुन और जखिया या राई का तड़का लगाया जाता है. तड़का तैयार होने के बाद इसमें बारीक कटा प्याज और टमाटर डालकर अच्छी तरह भून लिया जाता है. फिर हल्दी, धनिया पाउडर और नमक डालकर मसाले को तैयार किया जाता है. इसके बाद भुना हुआ भट्ट इस मसाले में डालकर अच्छे से मिलाया जाता है, और ऊपर से जरूरत अनुसार पानी डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है.
धीमी आंच पर पकने के बाद भट्ट की दाल गाढ़ी और खुशबूदार बन जाती है. इसे भात (चावल) या मंडुए की रोटी के साथ परोसा जाता है. स्वाद में जबरदस्त और सेहत से भरपूर यह दाल सर्दियों में पहाड़ी खान-पान की असली पहचान मानी जाती है. यही कारण है कि आज भी भट्ट की दाल उत्तराखंड की पारंपरिक रसोई का अनमोल हिस्सा बनी हुई है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें