जिस फौजी ने देश की सेवा की, भोथ उस्तरा सटाकर जामताड़ा गैंग ने उससे लूट लिए हजारों रुपये, अब हो गए गिरफ्तार _ delhi crime branch arrests igl cyber fraud gang jamtara asansol malicious apk scam army officer victims list

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नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजधानी में जामताड़ा गैंग की बड़ी करतूत का पर्दाफाश किया है. दिल्ली पुलिस की इंटर-स्टेट सेल ने एक ऐसे साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जो इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के अधिकारी बनकर लोगों को चूना लगा रहे थे. पुलिस ने इस मामले में जामताड़ा और आसनसोल से संचालित होने वाले गिरोह के तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है. ये अपराधी मासूम लोगों को झांसे में लेकर उनके मोबाइल में खतरनाक ‘Malicious APK’ फाइल इंस्टॉल करवाते थे और फिर उनके बैंक खातों को पूरी तरह साफ कर देते थे. इस गिरोह ने देश की सेवा करने वाले एक आर्मी ऑफिसर को भी चूना लगा दिया.

इस गिरोह का पर्दाफाश तब हुआ जब एक 61 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना अधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. ठगों ने खुद को आईजीएल का प्रतिनिधि बताकर उन्हें कॉल किया और गैस बिल अपडेट करने या केवाईसी (KYC) के नाम पर एक मोबाइल ऐप (APK फाइल) इंस्टॉल करने का लालच दिया. जैसे ही अधिकारी ने वह फाइल इंस्टॉल की, उनके फोन का रिमोट एक्सेस अपराधियों के पास चला गया. इसके बाद ठगों ने बड़ी ही चतुराई से उनके खाते से 91,449 रुपये उड़ा लिए. इस घटना के बाद क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की.

गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल

पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर पश्चिम बंगाल के आसनसोल में छापेमारी कर तीन लोगों को दबोचा. इनके पास से कुल 9 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं. गिरफ्तार शख्स 22 साल से 26 साल के बीच में हैं. दिल्ली पुलिस ने बिक्की मंडल उर्फ विक्की को आसनसोल से गिरफ्तार किया है. वह साइबर अपराध के कई मामलों में शामिल रह चुका है. दूसरा शख्स सुमित कुमार सिंह और राजीव कुमार मंडल को जामताड़ा, झारखंड से गिरफ्तार किया गया है. सभी साइबर सिंडिकेट के सदस्य रह चुके हैं और कई मामलों में आरोपी हैं.

ऑपरेशन और तकनीक का जाल

डीसीपी (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम के अनुसार, इस ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर सत्येंद्र पूनिया और इंस्पेक्टर सोहन लाल ने किया. एसीपी रमेश लांबा की देखरेख में बनी इस टीम ने पाया कि यह कोई छोटा-मोटा फ्रॉड नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों के फोन की डिजिटल जांच करने पर पता चला कि ये लोग केवल आईजीएल ही नहीं, बल्कि SBI YONO, RTO Challan और Tata Power जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम पर भी फर्जी ऐप बनाकर लोगों को ठग रहे थे.

ठगी का तरीका: कैसे फंसाते थे जाल में?

तकनीकी विश्लेषण में यह भी सामने आया कि यह गैंग National Cyber Crime Reporting Portal पर दर्ज कम से कम 35 अन्य साइबर शिकायतों से जुड़ा हुआ है. इसका मतलब है कि ये लोग आदतन अपराधी हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना चुके हैं. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनका काम करने का तरीका बहुत ही सरल लेकिन घातक था. वे सबसे पहले किसी उपयोगिता सेवा प्रदाता जैसे IGL या बिजली विभाग के नाम पर फर्जी कॉल करते थे.

कॉल और डर का माहौल बनाकर पीड़ित को ऐसे फंसाते थे

वे पीड़ित को बताते थे कि उनका बिल बकाया है या कनेक्शन कटने वाला है. डर के मारे पीड़ित जब समाधान पूछता तो वे उसे एक लिंक भेजते और ‘सपोर्ट ऐप’ या ‘बिल पेमेंट ऐप’ इंस्टॉल करने को कहते. यह कोई आधिकारिक ऐप नहीं, बल्कि एक ‘Malicious APK’ फाइल होती थी. जैसे ही यूजर इसे परमिशन देता, फोन के मैसेज (SMS) और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का एक्सेस ठगों को मिल जाता. ओटीपी (OTP) को बाईपास कर वे पीड़ित के खाते से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे.

दिल्ली पुलिस के डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम ने इस कार्रवाई के बाद आम जनता के लिए एडवाइजरी भी जारी की है. पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान कॉलर के कहने पर मोबाइल में कोई भी फाइल या ऐप डाउनलोड न करें, खासकर यदि वह फाइल प्ले-स्टोर के बाहर से भेजी गई हो. साइबर ठग अब तकनीक का सहारा लेकर आपके फोन का पूरा कंट्रोल ले सकते हैं. हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या प्ले-स्टोर का ही उपयोग करें.

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