neet student undergarments secret male sperm | cbi investigation shambhu girls hostel case | sit cid dgp bihar police new theory | पटना नीट छात्रा केस में अब कहां फंसा पेंच, अंडरगारमेंट्स से नहीं खुला राज, तो क्या अब सीबीआई को सौंपी जाएगी जांच?
पटना. बिहार में नीट (NEET) छात्रा की मौत का मामला अब एक ऐसी गुत्थी बनता जा रहा है, जिसे सुलझाने के बजाय जांच एजेंसियां उलझाती नजर आ रही हैं. इस केस में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 16 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं. कहा जा रहा है कि कुल 25 लोगों के ब्लड सैंपल्स लिए जाएंगे. इन सैंपल्स की रिपोर्ट से यह साफ होगा कि क्या घटनास्थल पर मौजूद सबूतों और डीएनए का मिलान किसी संदिग्ध से होता है या नहीं. अगर नीट छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर इन सैंपल्स से मिलान नहीं होता है तो फिर पुलिस क्या करेगी? इस बीच मृतक छात्रा के परिवार ने पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. परिजनों का आरोप है कि उन्हें न्याय देने के बजाय पुलिस मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही है. बता दें इस मामले की शुरुआत में ही बिहार पुलिस ने इसे आत्महत्या का केस मान लिया था. लेकिन पोस्टमॉर्टम और FSL रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई, कपड़ों पर स्पर्म मिला. अब जांच एसआईटी से सीआईडी की तरफ जा रही है, लेकिन परिवार सीबीआई जांच की मांग कर रही है.
इस केस में कई पेंच फंसे हुए हैं. सबसे बड़ा सवाल है कि नीट छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर मिले मेल स्पर्म किसका है? रेप हॉस्टल में हुआ या बाहर? कई गवाह अब बयान बदल रहे हैं. एसआईटी की जांच में देरी और खामियां सामने आई हैं. परिवार और कुछ नेता आरोप लगा रहे हैं कि पटना पुलिस किसी सफेदपोश या प्रभावशाली व्यक्ति को बचा रही है. हॉस्टल नहीं सील किया गया, शुरुआती जांच में लापरवाही हुई, जिसके कारण दो पुलिसकर्मियों को घटना के 15-16 दिन बाद सस्पेंड किया गया.
शंभू गर्ल्स हॉस्टल नीट छात्रा मौत मामले में SIT ने 15 संदिग्धों की सूची बनाई, DNA जांच जारी, परिजन CBI जांच की मांग कर रहे हैं.
जांच में फंसते पेंच
अब एसआईटी ने जिन 16 लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं, उनमें जेल में बंद हॉस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन, हॉस्टल संचालक, हॉस्टल संचालक का बेटा, हॉस्टल संचालक में काम करने वाला गार्ड भी है. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन 16 लोगों में से आधे यानी 8 लोग केवल पीड़ित छात्रा के परिवार के सदस्य हैं. पुलिस ने मृतक छात्रा के माता-पिता, उसके भाई, दो सगे मामा, एक मौसेरे भाई और दो दोस्तों के भी ब्लड सैंपल लिए हैं. सबसे बड़ा सवाल जो परिजनों को कचोट रहा है, वो ये कि क्या इन 16 लोगों में से ही कोई असली कातिल है? या फिर पुलिस केवल जांच का दायरा बढ़ाने के नाम पर परिवार को ही शक के घेरे में खड़ा कर रही है?
आधी रात को ‘पुलिसिया टॉर्चर’ और थर्ड डिग्री का आरोप
परिवार का कहना है कि वे शुरू से ही पुलिस का सहयोग कर रहे हैं, फिर भी उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है. मृतक छात्रा के पिता ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों का कहना है कि एसआईटी की टीम रात के 1 बजे उनके घर पहुंच जाती है और सोते हुए लोगों को जगाकर ब्लड सैंपल लेने की बात कहती है. किसी भी सभ्य समाज में जांच के नाम पर आधी रात को इस तरह की दबिश देना कई सवाल खड़े करता है. परिवार का यह भी आरोप है कि पूछताछ के नाम पर उन्हें ‘थर्ड डिग्री’ दी जा रही है. पुलिस उन पर दबाव बना रही है कि वे मामले को रफा-दफा करें या फिर पुलिस की ‘थ्योरी’ को मान लें.
पटना शंभू हॉस्टल केस: नीट छात्रा मौत मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एजेंसियों का मकड़जाल से परिवार परेशान
परिजनों की परेशानी की एक बड़ी वजह यह भी है कि इस केस में कई एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं, लेकिन तालमेल की भारी कमी है. कभी चित्रगुप्त थाना की पुलिस पहुंच जाती है, कभी एसआईटी आकर सवाल पूछती है, तो कभी सीआईडी के अफसर नए सिरे से पूछताछ शुरू कर देते हैं. एक ही कहानी को बार-बार अलग-अलग अफसरों को सुनाते-सुनाते परिवार टूट चुका है. उन्हें लग रहा है कि जांच के नाम पर केवल समय बर्बाद किया जा रहा है ताकि सबूत धुंधले पड़ जाएं.
डीजीपी के बयान से क्यों नाराज हैं पिता?
इस पूरे मामले में आग में घी डालने का काम बिहार के डीजीपी के उस बयान ने किया, जिससे मृतक छात्रा के पिता काफी आहत और नाराज हैं. बताया जा रहा है कि जब पिता अपनी फरियाद लेकर डीजीपी के पास पहुंचे तो डीजीपी ने कुछ ऐसी बातें कहीं जिससे पिता को लगा कि पुलिस शुरू से ही इस मामले को आत्महत्या मानकर चल रही है. पिता का कहना है कि पुलिस का रवैया ऐसा है जैसे वे पहले ही तय कर चुके हों कि यह मर्डर नहीं है. डीजीपी के रुख से नाराज पिता ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें बिहार पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं रहा.
किसी ‘सफेदपोश’ को बचा रही है पटना पुलिस?
इस केस में सबसे बड़ा पेंच यहीं फंसा है. परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पटना पुलिस किसी बड़े सफेदपोश को बचाने की कोशिश कर रही है. जिस तरह से हॉस्टल मालिक और संचालक को लेकर नरमी बरती गई और जिस तरह से जांच की दिशा बार-बार बदली जा रही है, उससे शक गहराता जा रहा है. क्या यह सिर्फ एक आत्महत्या है, या इसके पीछे किसी ताकतवर चेहरे का हाथ है जिसे पुलिस सामने नहीं लाना चाहती?
नीट छात्रा के संदिग्ध मौत के पीछे कौन-कौन लोग?
क्या मामला सीबीआई को जाएगा?
जिस तरह से बिहार पुलिस और एसआईटी की जांच पर सवाल उठ रहे हैं और परिवार ने प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, उसे देखते हुए यह मामला अब सीबीआई को सौंपने की मांग तेज हो गई है. अगर बिहार पुलिस अपनी सुसाइड थ्योरी पर ही अड़ी रही और परिवार को इसी तरह परेशान किया गया, तो सरकार पर इस केस को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का दबाव और बढ़ेगा. फिलहाल, 16 लोगों के ब्लड सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है. क्या यह रिपोर्ट किसी नए सच को सामने लाएगी या फिर यह केस भी फाइलों में दबकर रह जाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.