मातृभूमि’ से ‘रंग दे बसंती चोला’ तक, अमर हैं देश प्रेम से भरे ये गीत, 1 गाने में दिखा था भगत सिंह का त्याग
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जब पूरा देश गणतंत्र दिवस के रंग में रंग जाता है, तब देशप्रेम को व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका संगीत होता है. भारतीय सिनेमा ने दशकों से ऐसे गीत दिए हैं, जो सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए बने हैं. ये गीत हर भारतीय का सीना चौड़ा और आंखें नम कर देते हैं.

आज बॉलीवुड के उन शानदार गीतों के बारे में बात करते हैं जो रिपब्लिक डे, इंडिपेंडेंस डे को खास बनाते हैं. तो चलिए जानते हैं इन गीतों के बारे में जो 77वें गणतंत्र दिवस के जश्न में चार चांद लगा देते हैं.

मातृभूमि – बैटल ऑफ गलवान (2026)- देशभक्ति गीतों की सूची में यह नया नाम बेहद गहरी छाप छोड़ता है. मातृभूमि भावनाओं से भरपूर एक ऐसा गीत है, जो देश के लिए प्रेम और समर्पण को सादगी के साथ पेश करता है. यह गीत अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों और कविताओं की प्रेरणा से जन्मा है. हिमेश रेशमिया का प्रभावशाली संगीत और अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की आत्मा को छू लेने वाली आवाजें इसे और भी खास बना देती हैं.

मां तुझे सलाम – ए.आर. रहमान (1997)- यह गीत देशप्रेम का प्रतीक बन चुका है. भारत की विविधता, शक्ति और आत्मसम्मान को समेटे यह रचना आज भी राष्ट्रीय आयोजनों और जीत के जश्न में वही जोश भर देती है, जैसा दशकों पहले भरती थी.
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संदेसें आते हैं – बॉर्डर (1997)- सरहद पर तैनात जवानों की भावनाओं को बयां करता यह गीत दिल को छू जाता है. परिवार से दूर रहकर निभाए गए कर्तव्य, इंतज़ार और त्याग को यह गीत बेहद मानवीय अंदाज़ में सामने लाता है.

ऐ वतन – राजी (2018) शांत लेकिन असरदार यह गीत उन गुमनाम नायकों को सलाम करता है, जो बिना किसी शोर के देश की सेवा में लगे रहते हैं. यह याद दिलाता है कि देशभक्ति सिर्फ नारे लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि चुपचाप निभाया गया फर्ज़ भी उतना ही बड़ा होता है.

रंग दे बसंती चोला – द लीजेंड ऑफ भगत सिंह (2002) क्रांतिकारी सोच और आज़ादी के जज़्बे से भरा यह गीत युवाओं को आज भी प्रेरित करता है. यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ कर गुजरने का आह्वान है.

लक्ष्य टाइटल ट्रैक – लक्ष्य (2004) अनुशासन, समर्पण और लक्ष्य के प्रति अडिग रहने का संदेश देता यह गीत आत्मविश्वास से भर देता है. यही वजह है कि यह आज भी युवाओं और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में खास जगह रखता है.

वंदे मातरम् –हर दौर में नए रूप में सामने आया वंदे मातरम् अपनी मूल भावना कभी नहीं खोता. यह गीत आज भी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और एकता का सबसे मजबूत प्रतीक है.