hanuman ji ko chola chadhane ke fayde। हनुमान जी को चोला चढ़ाने के फायदे

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Chola Chadhane Ke Fayde: हिंदू धर्म में भगवान श्री हनुमान को संकटमोचन कहा गया है. जब जीवन में परेशानियां लगातार पीछा नहीं छोड़तीं, मन अशांत रहता है या ग्रहों का असर भारी महसूस होता है, तब लोग हनुमान जी की शरण में जाते हैं. हनुमान जी को चोला चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है और इसे सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि एक असरदार आध्यात्मिक उपाय माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि जब भक्त पूरी आस्था और सही नियम से हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाता है, तो बजरंगबली उसकी हर परेशानी को धीरे-धीरे दूर करने लगते हैं. हनुमान जी को शक्ति, साहस और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है. सिंदूर को ऊर्जा और तेज का रूप कहा गया है, इसलिए हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाना खास फल देता है. मान्यता है कि इस पूजा से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, राहु-केतु के प्रभाव, लंबे समय से चला आ रहा रोग और बार-बार आने वाले संकट शांत होने लगते हैं. बहुत से भक्तों का अनुभव है कि नियमित रूप से सही दिन पर चोला चढ़ाने से जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखने लगता है.

हनुमान जी को चोला चढ़ाने से क्या फायदे मिलते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को चोला चढ़ाने से कई तरह के लाभ मिलते हैं:
-शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और भारी दशा का असर कम होने लगता है
-राहु और केतु से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है
-बार-बार आने वाला भय, दुर्घटना और संकट दूर होते हैं
-लंबे समय से चल रहे रोग में सुधार देखा जाता है
-मन मजबूत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है
-रुके हुए काम धीरे-धीरे बनने लगते हैं
-भक्त की मनोकामनाएं समय के साथ पूरी होने लगती हैं

हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्र रूप माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा में किया गया हर उपाय बहुत गहरा असर दिखाता है.

हनुमान जी को चोला चढ़ाने की सामग्री
चोला चढ़ाने से पहले पूजा की सारी चीजें एक जगह इकट्ठा कर लें:
-हनुमान जी के लिए खास सिंदूर
-देसी गाय का घी या शुद्ध चमेली का तेल
-गंगाजल मिला साफ जल
-धूप और दीप
-चांदी या सोने का वर्क, चाहें तो चमकीला कागज
-हनुमान चालीसा की पुस्तक

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हनुमान जी को चोला चढ़ाने की सही विधि
सबसे पहले हनुमान जी की प्रतिमा से पुराना चोला श्रद्धा से उतारें. इसके बाद गंगाजल मिले जल से प्रतिमा को स्नान कराएं और साफ कपड़े से पोंछ लें. अब सिंदूर में घी या चमेली का तेल मिलाकर गाढ़ा लेप तैयार करें. दाहिने हाथ से हनुमान जी के सिर से शुरू करते हुए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाएं. लेपन करते समय मन में सिर्फ हनुमान जी का ध्यान रखें. इसके बाद चांदी या सोने का वर्क लगाएं और शांत मन से हनुमान चालीसा का पाठ करें.

हनुमान जी को चोला चढ़ाने का शुभ दिन
चोला हमेशा खास दिनों में ही चढ़ाना अच्छा माना गया है:
-मंगलवार
-शनिवार
-हनुमान जयंती
-राम नवमी
-दीपावली और होली

इन दिनों चोला चढ़ाने से पूजा का असर कई गुना बढ़ जाता है.

चोला चढ़ाते समय रखें ये सावधानियां
-सिंदूर हमेशा सवा मात्रा में चढ़ाएं
-मंगलवार को देसी गाय का घी और शनिवार को केवल चमेली का तेल लें
-लाल या पीले रंग के साफ कपड़े पहनें
-पुराने चोले को बहते जल में प्रवाहित करें
-चोला पूरे सम्मान और श्रद्धा से चढ़ाएं
-पूजा के समय सांस प्रतिमा पर न पड़ने दें

हनुमान जी को चोला चढ़ाने का मंत्र
चोला चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें:
“सिन्दूरं रक्तवर्णं च सिन्दूरतिलकप्रिये.
भक्त्या दत्तं मया देव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम॥”

धूप-दीप, आरती और क्षमा याचना
चोला चढ़ाने के बाद धूप-दीप करें, फिर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें और अंत में हनुमान जी की आरती करें. पूजा के बाद मन से की गई क्षमा याचना बहुत जरूरी मानी जाती है, ताकि पूजा में हुई कोई भी गलती क्षमा हो जाए और पूरा फल मिले.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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