Chinese Kali Temple in Tangra Chinatown Kolkata | चीनी समुदाय के लोग संभालते हैं देश का यह काली माता का मंदिर, चाऊमीन और मोमोज का भोज, ऐसी है अनूठी परंपरा
Last Updated:
Chinese temples in Kolkata: कोलकाता का यह काली मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत-चीन सांस्कृतिक मेल का जीवंत उदाहरण है. यहां चीनी भाषा में प्रार्थनाएं, अगरबत्ती की खास खुशबू और काली मां की पारंपरिक मूर्ति, सब मिलकर एक अनोखा अनुभव रचते हैं.

भारत में विविधता की मिसालें तो बहुत हैं, लेकिन कोलकाता का टेरेटी बाजार में स्थित काली माता मंदिर अपनी परंपराओं के कारण सचमुच अनोखा है. यहां चीनी समुदाय दशकों से ना सिर्फ मंदिर की देखरेख करता आ रहा है, बल्कि पूजा-पद्धति और प्रसाद में भी उनकी संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है. पश्चिम बंगाल में मां काली को तंत्र की देवी के रूप में पूजा जाता है, जहां मां को भोग स्वरूप बलि अर्पित की जाती है. मां काली के अधिकतर मंदिरों में बलि प्रथा का विधान है, लेकिन कोलकाता के एक इस मंदिर में मां काली का भोग चाऊमीन और मोमोज अर्पित किए जाते हैं. हम बात कर रहे हैं कोलकाता के चाइनीज काली मंदिर की. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
चीनी समुदाय के लोग संभालते हैं बागडोर
कोलकाता में टंगरा नाम की जगह है, जिसे चाइना टाउन के नाम से जाना जाता है. यहां जगह चीनी समुदाय के लोगों की संख्या ज्यादा है और वे खुद को चीनी हिंदू मानते हैं. टंगरा में मां काली को समर्पित मंदिर है, जिसका नाम है चाइनीज काली मंदिर. दीवाली की रात मां के मंदिर में विशेष पूजा होती है और पूरी रात अनुष्ठान चलते हैं. मंदिर की बागडोर भी चीनी समुदाय के लोग संभालते हैं, लेकिन मां की पूजा स्थानीय पंडित करते हैं. मंदिर में सारी परंपरा सनातन धर्म के अनुसार निभाई जाती है, लेकिन चीनी समुदाय के लोग मोटी मोमबत्ती अर्पित कर मां के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं. खास बात ये है कि यह मंदिर कोलकाता के चीनी समुदाय द्वारा निर्मित अपनी तरह का इकलौता मंदिर है.
लोककथाओं में मौजूद मंदिर
लोककथाओं की मानें तो लगभग छह दशक पहले एक चीनी लड़का बीमार पड़ गया और किसी भी इलाज से वह ठीक नहीं हो रहा था. उसी इलाके में हिंदु समुदाय के लोग एक पेड़ के नीचे दो काले पत्थरों को मां काली और भगवान शिव के रूप में पूजते थे. चीनी बच्चे के माता-पिता ने भी उसी पेड़ की पूजा करना शुरू कर दी. उनकी भक्ति का असर यह हुआ कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया. इसके बाद मां काली और भगवान शिव की कृपा पाकर वहां रहे चीनी समुदाय के लोगों ने बड़े मंदिर का निर्माण कराया.
आज भी मौजूद है चमत्कारी पेड़
मंदिर के बीचोंबीच आज भी वो चमत्कारी पेड़ मौजूद हैं, जहां हजारों लोगों की मनोकामना पूरी हो चुकी है. मंदिर का रखरखाव और प्रबंधन का काम वर्षों से चीनी समुदाय के लोग ही संभाल रहे हैं. मंदिर की खास बात है वहां चढ़ाया जाने वाला प्रसाद. मंदिर में मां को शुद्ध शाकाहारी प्रसाद चढ़ाया जाता है, लेकिन चीनी समुदाय के लोग चीन का प्रमुख व्यंजन नूडल्स और मोमोज मां को अर्पित करते हैं. ये चढ़ावा बीते कई सालो से चढ़ाया जा रहा है और मंदिर की अनूठी परंपरा बन चुका है.
About the Author
पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें