इस्लाम में नमाज छोड़ना गुनाह या फिर की जा सकती है इसकी भरपाई..यहां जानिए सबकुछ
अलीगढ़: इस्लाम में नमाज़ को दीन का सबसे अहम स्तंभ माना गया है, जिसे हर मुसलमान पर तय वक्त पर अदा करना फ़र्ज़ है, लेकिन अक्सर लोगों के ज़ेहन में यह सवाल उठता है कि अगर किसी वजह से नमाज़ छूट जाए तो उसका क्या हुक्म है, क्या वह गुनाह में शुमार होती है और उसकी भरपाई कैसे की जा सकती है. इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से खास बातचीत की.
नमाज़ अपने मुक़र्रर वक़्त पर अदा की जाए
जानकारी देते हुए चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम और क़ुरआन में मुसलमानों को हुक्म दिया गया है कि नमाज़ अपने मुक़र्रर वक़्त पर अदा की जाए. दिन में पाँच वक्त की फ़र्ज़ नमाज़ें होती हैं. फ़ज्र, ज़ुहर, असर, मग़रिब और ईशा. जिन्हें अल्लाह की तरफ़ से तय समय में पढ़ना ज़रूरी है. मौलाना साहब ने बताया कि अगर फ़र्ज़ नमाज़ अपने तय समय में अदा नहीं की जाती और उसका वक्त निकल जाता है, तो वह नमाज़ क़ज़ा हो जाती है. क़ज़ा होने की दो सूरतें हैं. एक यह कि कोई शख़्स जानबूझकर नमाज़ छोड़ दे, और दूसरी यह कि नींद या भूल की वजह से नमाज़ छूट जाए.
जानबूझकर नमाज़ छोड़ना गुनाह
जानबूझकर नमाज़ छोड़ना बड़ा गुनाह माना गया है, जबकि भूल या मजबूरी की वजह से छूट जाना उतना सख़्त नहीं है. मौलाना ने कहा कि जानबूझकर नमाज़ छोड़ना गुनाह-ए-कबीरा है. ऐसे शख़्स पर न सिर्फ़ क़ज़ा नमाज़ अदा करना ज़रूरी है, बल्कि सच्ची तौबा करना भी फ़र्ज़ है. इस्लामी तालीमात में यहाँ तक आया है कि नमाज़ को जानबूझकर छोड़ देना इंसान को कुफ़्र के क़रीब पहुँचा देता है, क्योंकि फ़र्ज़ इबादतों से मुँह मोड़ना अल्लाह के हुक्मों के ख़िलाफ़ बग़ावत के बराबर है.
नमाज छूटने पर क्या करें
मौलाना इफराहीम हुसैन ने यह भी बताया कि अगर किसी मजबूरी, नींद या याद न रहने की वजह से नमाज़ छूट जाए, तो जैसे ही याद आए या मौक़ा मिले, उस नमाज़ को अदा कर लेना चाहिए. बस यह ध्यान रखा जाए कि सूरज निकलते और सूरज डूबते वक़्त नमाज़ न पढ़ी जाए.
नमाज़ दीन का सबसे अहम हिस्सा
इस तरह बाद में अदा की गई नमाज़ को ही क़ज़ा नमाज़ कहा जाता है. उन्होंने कहा कि हर मुसलमान को चाहिए कि वह नमाज़ की पाबंदी करें, क्योंकि नमाज़ दीन का सबसे अहम हिस्सा है और इसमें लापरवाही दुनिया और आख़िरत दोनों के लिए नुक़सानदेह है.