UGC New Equity Rule 3(C) । Supreme Court PIL । UGC Regulations – यूनिवर्सिटी कैंपस में समानता या नया भेदभाव? सुप्रीम कोर्ट में UGC के नए इक्विटी नियम 3(सी) को चुनौती
Last Updated:
Supreme Court UGC Rule: यूजीसी के प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के नियम 3(सी) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिका में इसे असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण बताया गया है. यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य कैंपस पर जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है.
यूजीसी ने ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए गए थे. (फाइल फोटो)नई दिल्ली. उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 के एक प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. इस नियम को लेकर एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिसमें यूजीसी के नए नियम के नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ वर्गों (खासकर सामान्य वर्ग) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और इससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है. याचिका में कहा गया है कि नियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है. साथ ही, यह यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के विपरीत है और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है.
यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य कैंपस पर जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है. इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में इक्विटी कमेटी गठित करने का प्रावधान है, जो शिकायतों की जांच करेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई (जैसे डिग्री रोकना, संस्थान की मान्यता रद्द करना आदि) कर सकेगी.
यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 118 प्रतिशत बढ़ी हैं. ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए गए थे, जहां एक पुरानी याचिका में कैंपस पर भेदभाव रोकने के लिए मजबूत तंत्र की मांग की गई थी. यूजीसी ने 13 जनवरी को इन नियमों को अधिसूचित किया, जिसके बाद कई संस्थानों को इक्विटी कमेटी बनाने और भेदभाव विरोधी नीति लागू करने के निर्देश दिए गए.
हालांकि, याचिकाकर्ता का कहना है कि नियम 3(सी) में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा और प्रक्रिया ऐसी है कि यह सामान्य वर्ग के छात्रों/शिक्षकों के खिलाफ पूर्वाग्रही हो सकती है. इसमें झूठी शिकायतों पर कोई सजा का प्रावधान नहीं है, जिससे दुरुपयोग का खतरा है. याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता की जांच करे और छात्रों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे. यह मामला उच्च शिक्षा में समानता और मेरिट बनाम आरक्षण/इक्विटी के बीच बहस को फिर से गरमा सकता है.
About the Author
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें