जन गण मन की तरह वंदे मातरम् का भी बनेगा नियम, अपमान पर होगी सजा! सरकार का प्लान तैयार
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर केंद्र सरकार के उच्च स्तर पर गंभीर विचार-विमर्श शुरू हो गया है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस महीने की शुरुआत में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें वंदे मातरम् के लिए राष्ट्रीय गान जन गण मन की तरह तय प्रोटोकॉल बनाने पर चर्चा की गई. अखबार के मुताबिक, गृह मंत्रालय की तरफ से यह बैठक बुलाई गई थी, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
वंदे मातरम् के अपमान पर सजा पर चर्चा
उधर बीजेपी का कहना है कि यह पहल वंदे मातरम् के सम्मान और गरिमा को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही है. पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने अतीत में तुष्टीकरण की राजनीति के तहत राष्ट्रीय गीत के महत्व को कम किया. इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् के सम्मान में एक वर्ष तक चलने वाले विशेष आयोजनों की श्रृंखला भी शुरू की है, जिसके विभिन्न चरण 2026 तक पूरे किए जाने हैं.
अभी क्या कहता है कानून?
कानूनी दृष्टि से देखें तो वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान जैसी स्पष्ट संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है. वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में राष्ट्रीय गान के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने पर सजा का प्रावधान है, लेकिन राष्ट्रीय गीत के लिए ऐसा कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं किया गया है. साथ ही, अब तक सरकार ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि किन अवसरों पर वंदे मातरम् गाया या बजाया जाना चाहिए.
इसके विपरीत राष्ट्रीय गान जन गण मन को संविधान के अनुच्छेद 51A(a) और गृह मंत्रालय की तरफ से जारी विस्तृत दिशानिर्देशों के तहत स्पष्ट संरक्षण प्राप्त है. इन निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रीय गान के दौरान खड़ा होना अनिवार्य है और इसके विकृत या नाटकीय प्रयोग पर रोक है. उल्लंघन की स्थिति में तीन वर्ष साल जेल का प्रावधान है.
आमने-सामने बीजेपी और कांग्रेस?
हाल के वर्षों में वंदे मातरम् राजनीतिक और ऐतिहासिक बहसों का भी केंद्र बनता रहा है. संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उसने वंदे मातरम् के गौरव को दबाया और यही प्रवृत्ति आगे चलकर तुष्टीकरण की नीति और देश के विभाजन का कारण बनी. यह विवाद गीत के छह में से चार अंतरों को हटाए जाने से जुड़ा है, जिनमें मातृभूमि को देवी-स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है. संविधान सभा में उस समय यह तर्क दिया गया था कि यह चित्रण सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकता.
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बीजेपी इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है और वंदे मातरम् को राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दा बना रही है. ऐसे में अगर राष्ट्रीय गीत के लिए भी औपचारिक नियम और कानूनी ढांचा तैयार किया जाता है, तो यह कदम सांस्कृतिक, संवैधानिक और राजनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा.