Snack For Diabetes: सर्दियों का सुपरफूड है शकरकंद, बनाएं इसके कबाब, डायबिटिक भी जमकर लें मजा, नहीं बढ़ेगी शुगर!
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Sweet Potato Kebab Recipe: सर्दियों में शकरकंद की बहुत सी डिश बनायी जाती हैं और इन्हीं में से एक है इससे बनने वाले कबाब. झारखंड में यह आइटम खासतौर पर पसंद किया जाता है जिसे ट्रेडिशनल मसालों के मेल से बनाया जाता है. कम घी में बनाने और सीमित मात्रा में खाने से इससे शुगर भी नहीं बढ़ती और यह डायबिटीज फ्रेंडली बना रहता है.

झारखंड में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही खानपान की परंपराओं में भी बदलाव देखने को मिलता है. इस मौसम में शरीर को गर्म रखने वाले देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें शकरकंद प्रमुख रूप से शामिल है. राज्य के कई इलाकों जैसे रांची, जमशेदपुर, दुमका, गुमला और चाईबासा में शकरकंद से बने व्यंजन खासतौर पर पसंद किए जाते हैं. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है शकरकंद के कबाब, जो अब ग्रामीण इलाकों से निकलकर शहरी रसोई तक अपनी जगह बना चुके हैं.

स्थानीय बाजारों में सर्दियों के दौरान भुनी हुई शकरकंद तो आमतौर पर मिलती ही है, लेकिन घरों में इससे बनने वाले कबाब लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. यह व्यंजन स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होता है, क्योंकि शकरकंद में फाइबर, विटामिन और प्राकृतिक मिठास भरपूर मात्रा में पाई जाती है. खास बात यह है कि झारखंडी मसालों और सरसों के तेल का इस्तेमाल इसे एक अलग देसी पहचान देता है.

शकरकंद के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले शकरकंद को उबालकर अच्छी तरह मैश किया जाता है. इसके साथ उबले आलू मिलाए जाते हैं, (ये ऑप्शनल है) जिससे मिश्रण को सही बनावट मिलती है. इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, अदरक और हरा धनिया डाला जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए भुना जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च, नमक और थोड़ा चाट मसाला मिलाया जाता है. कई ग्रामीण इलाकों में इसमें बेसन की जगह चावल का आटा मिलाया जाता है, जिससे कबाब ज्यादा कुरकुरे बनते हैं.
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तैयार मिश्रण से छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर तवे पर सरसों के तेल में धीमी आंच पर सेक लिया जाता है. सरसों के तेल की खुशबू इन कबाबों को खास झारखंडी स्वाद देती है. कबाब को तब तक सेंका जाता है जब तक वह दोनों तरफ से सुनहरे और कुरकुरे न हो जाएं.

गरमागरम शकरकंद कबाब को आमतौर पर हरी धनिया-पुदीना की चटनी या मीठी इमली की चटनी के साथ परोसा जाता है. झारखंड के कई घरों में यह सर्दियों की शाम की चाय के साथ खास नाश्ते के रूप में परोसा जाता है. स्वाद, सेहत और परंपरा का यह मेल सर्दियों में झारखंड की रसोई को और भी खास बना देता है.