Baba Ramdev commented on shankaracharya swami avimukteshwaranand saraswati maharaj controversy at magh mela | शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर बोले बाबा रामदेव, कहा – कुछ लोग तीर्थ स्थलों पर भी चलाते हैं एजेंडा

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बाबा रामदेव ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी को गलत बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार किसी के साथ भी अस्वीकार्य है. वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है, जिससे उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है.

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर बोले बाबा रामदेव, ये तो एजेंडा

योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के विषय को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हिंदुओं का एकजुट रहना जरूरी है, क्योंकि सनातन के शत्रु पहले से ही बहुत हैं. कोई इस्लामीकरण कर रहा है तो कोई गजवा-ए-हिंद में लगा है. इसलिए सनातन के शत्रुओं से लड़ना चाहिए, आपस में ना लड़ें. रामदेव बाबा ने आगे कहा कि कुछ लोग तीर्थों में भी कुछ लोग अपना एजेंडा लेकर चलते हैं. मुझे लगता है कि तीर्थ किसी के अहम का, प्रतिष्ठा का एजेंडा नहीं होना चाहिए. आइए जानते हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बाबा रामदेव ने और क्या क्या कहा…

अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले रामदेव
बाबा रामदेव ने आगे कहा कि हम शंकराचार्य को भगवान का रूप मानते हैं और हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी शंकराचार्य किसी विवाद में शामिल ना हो. योग गुरु ने कहा कि अब एक संत विवाद कैसे खड़ा कर सकता है? कम से कम धार्मिक स्थलों और तीर्थ स्थलों पर किसी भी संत को किसी विवाद में शामिल नहीं होना चाहिए. यहां ना स्नान का और ना पालकी का विवाद होना चाहिए. बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि वह साधु किस बात का, जो अहंकार करे. साधु वही बनता है, जिसने अपने अपमान को मिटा दिया.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई बदसलूकी दुर्भाग्यपूर्ण
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी पर उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे अपने योगियों और पूजनीय संतों को भी अपमानजनक या अपशब्दों का सामना करना पड़ता है. ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है, ना केवल शंकराचार्य के लिए, बल्कि किसी भी साधु के लिए. किसी के बारे में भी ऐसी टिप्पणी करना निंदनीय और शर्मनाक है. हर आदमी को अपने गौरव और गरिमा का ध्यान खुद रखना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि माघ मेला सिर्फ नाम, जप और तप के लिए है. हमारे यहां कहा गया है कि अहंकार करने वाला शख्स कभी साधु नहीं हो सकता है. तीर्थों में भी कुछ लोग अपना एजेंडा लेकर चलते हैं. मुझे लगता है कि तीर्थ किसी के अहम का, प्रतिष्ठा का एजेंडा नहीं होना चाहिए. ये तीन पवित्र नदियों का स्थान है, मुक्ति का स्थान है.

क्या है मामला?
बता दें कि 17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे. पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा. इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था. बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है. विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें

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