radha raman mandir history in hindi। क्या राधारमण मंदिर में आज भी जीवित है कृष्ण की लीला

Share to your loved once


Radha Raman Mandir History In Hindi: वृंदावन की गलियों में कदम रखते ही एक अलग ही माहौल महसूस होता है. यहां हर मोड़ पर कृष्ण भक्ति की खुशबू बसी हुई है. इसी पावन नगरी के बीचों-बीच स्थित है राधारमण मंदिर, जो सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कारों का केंद्र माना जाता है. यह मंदिर उन भक्तों के लिए खास है जो बिना किसी दिखावे के सच्चे मन से कृष्ण को महसूस करना चाहते हैं. राधारमण मंदिर बाकी मंदिरों से थोड़ा अलग है, क्योंकि यहां भगवान कृष्ण की पूजा किसी बड़ी मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वयं प्रकट हुए स्वरूप के रूप में होती है. यही वजह है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु खुद को भगवान के बहुत करीब महसूस करता है. मंदिर का वातावरण शांत, सादा और भावनाओं से भरा हुआ है. यहां न ज्यादा शोर है और न ही भव्यता का दिखावा, फिर भी मन अपने आप रुक जाता है. इस लेख में हम राधारमण मंदिर के इतिहास, इससे जुड़े रहस्यों, यहां की मान्यताओं और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी को आसान भाषा में समझेंगे.

राधारमण मंदिर का इतिहास
राधारमण मंदिर का इतिहास करीब 500 साल पुराना माना जाता है. इसकी स्थापना चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्यों में से एक, गोस्वामी गोपाल भट्ट ने की थी. कहा जाता है कि गोपाल भट्ट सालिग्राम शिला की पूजा किया करते थे और उनके मन में राधा-कृष्ण के साक्षात दर्शन की गहरी चाह थी. मान्यता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन वही सालिग्राम शिला राधा और कृष्ण के संयुक्त रूप में प्रकट हुई. इसे किसी कारीगर ने नहीं गढ़ा था, बल्कि यह अपने आप प्रकट हुआ स्वरूप माना जाता है. इसी चमत्कार के बाद उसी स्थान पर राधारमण मंदिर की स्थापना हुई.

मंदिर का स्वरूप और सादगी
-राधारमण मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है. मंदिर लाल पत्थरों से बना है और इसमें बहुत ज्यादा सजावट नहीं दिखाई देती. यहां का गर्भगृह छोटा जरूर है, लेकिन भावनाओं से भरा हुआ है.

-भगवान राधारमण का स्वरूप बेहद आकर्षक है. माना जाता है कि इसमें राधा और कृष्ण दोनों का भाव समाया हुआ है. मंदिर परिसर में घूमते समय ऐसा लगता है जैसे समय धीरे चलने लगा हो. यहां आने वाले लोग अकसर बिना बोले ही काफी देर तक बैठे रहते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

रहस्यमयी अखंड ज्योति
राधारमण मंदिर से जुड़ा सबसे चर्चित रहस्य है यहां जलने वाली अखंड ज्योति. मान्यता है कि यह ज्योति लगभग 475 सालों से लगातार जल रही है. इसे कभी बुझाया नहीं जाता और न ही आम तरीके से जलाया जाता है. कहा जाता है कि इस ज्योति को मंत्रों के माध्यम से प्रज्वलित किया गया था. आज भी इसे बहुत श्रद्धा के साथ संभाला जाता है. इस ज्योति को देखकर श्रद्धालुओं के मन में एक अलग ही विश्वास जाग जाता है.

मंदिर की मान्यताएं और आस्था
राधारमण मंदिर को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है. माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे दिल से यहां दर्शन करता है, उसके मन की उलझनें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं. यहां की पूजा पद्धति भी बहुत सादा है, जिसमें भाव को सबसे ऊपर रखा जाता है. यहां रोज सुबह और शाम आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. बिना किसी भव्य आयोजन के भी यहां की आरती दिल को छू जाती है.

यहां मनाए जाने वाले खास उत्सव
राधारमण मंदिर में जन्माष्टमी, होली और दीपावली जैसे पर्व खास उत्साह के साथ मनाए जाते हैं. होली के समय यहां की फूलों वाली होली बहुत प्रसिद्ध है. जन्माष्टमी पर मंदिर को फूलों और दीपों से सजाया जाता है, लेकिन फिर भी इसकी सादगी बनी रहती है.

राधारमण मंदिर यात्रा से जुड़ी बातें
अगर आप वृंदावन जा रहे हैं तो राधारमण मंदिर के दर्शन जरूर करें. सुबह या शाम का समय यहां आने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. मंदिर में प्रवेश से पहले जूते बाहर उतारना जरूरी है और कपड़े सादे व शालीन होने चाहिए.

भीड़ ज्यादा होने पर धैर्य रखें, क्योंकि यहां का अनुभव जल्दी में नहीं, ठहराव में मिलता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP