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एक बार फिर से झारखंड में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो गई है. पिछली बार जब ईडी की झारखंड में एंट्री की थी तो राज्य के सीएम हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा था. लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है. इस बार अंतर्राष्ट्रीय मामला बन गया है, जिसकी वजह से ईडी की एंट्री लेनी पड़ी है. हालांकि, इस बार भी अगर ईडी की जांच सही निर्णय पर पहुंचती है तो कई सफेदपोशों की नींद उड़ जाएगी. दरअसल, झारखंड के पलामू जिले में नवंबर 2025 में बरामद हुए 80 करोड़ रुपये के सांप के जहर (Snake Venom) के मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है.

इस केस की गंभीरता और इसमें शामिल करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन को देखते हुए देश की सबसे बड़ी वित्तीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू कर दी है. भारतीय कानून और वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां वन्यजीव तस्करी (Wildlife Trafficking) में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से ईडी ने हस्तक्षेप किया है.

ईडी की एंट्री से सीएम हेमंत सोरेन को जाना पड़ा था जेल

पिछले साल पलामू जिले में वन विभाग और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की ज्वाइंट ऑपरेशन में एक बंद बोतल में 1200 ग्राम बेहद ही कीमती सांप के जहर की खेप पकड़ी गई थी. जिसे जंगलों से सांप पकड़कर निकाला गया था और विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी. इस मामले में झारखंड पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क और मनी-लॉन्ड्रिंग के संकेत मिलने के कारण अब यह मामला ईडी करने जा रही है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि प्रवर्तन निदेशालय के रडार पर कौन लोग होंगे? सांपों का जहर भारत में बेचना और खरीदना कितना बड़ा जुर्म है?

अब क्यों आई है ईडी झारखंड?

मामले की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई थी, जब झारखंड पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र से एक बड़ी छापेमारी की थी. पुलिस ने यहां से 4 शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया था. इनके पास से कांच के जार में बंद तरल और क्रिस्टल रूप में सांप का जहर बरामद हुआ था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 80 करोड़ रुपये आंकी गई थी. गिरफ्तार तस्करों में पलामू और आसपास के जिलों के लोग शामिल थे, जो इस खेप को किसी बड़े सिंडिकेट तक पहुंचाने की फिराक में थे. आमतौर पर वन्यजीव तस्करी के मामले ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम’ (Wildlife Protection Act) के तहत वन विभाग या स्थानीय पुलिस संभालती है. लेकिन इस मामले में जहर की कीमत इतनी ज्यादा थी कि इसने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के प्रावधानों को आकर्षित किया. ईडी को शक है कि 80 करोड़ रुपये का यह जहर सिर्फ एक छोटा हिस्सा है और इसके पीछे एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय रैकेट काम कर रहा है.

क्यों अहम है ईडी की एंट्री?

ईडी ने पलामू वन विभाग और पलामू टाइगर रिजर्व से इस केस से जुड़े सभी दस्तावेज, जब्त सामान की सूची और अब तक की पुलिस जांच की पूरी रिपोर्ट मांग ली है. अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सारा ब्यौरा उपलब्ध करा दिया गया है. ईडी का मुख्य उद्देश्य उस मनी ट्रेल यानी पैसे का रास्ता का पता लगाना है, जिसके जरिए इस तस्करी के धंधे को फंडिंग की जा रही थी.

सांप के जहर की तस्करी क्यों होती है?

आम लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर सांप का जहर इतना महंगा क्यों है और इसका क्या किया जाता है? विशेषज्ञों के अनुसार, इसके दो मुख्य उपयोग हैं.

  • पहला, महंगी दवाइयां और कैंसर रिसर्च: सांप के जहर का इस्तेमाल एंटी-वेनम (सांप काटने की दवा) बनाने के अलावा कैंसर और दिल की बीमारियों की दवाओं के शोध में किया जाता है.
  • दूसरा रेव पार्टियां और नशा: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांप के जहर का इस्तेमाल एक बेहद महंगे और खतरनाक ‘रिक्रिएशनल ड्रग’ के तौर पर किया जाता है. रेव पार्टियों में नशे के लिए बहुत ही कम मात्रा में इसे शराब या अन्य पेय पदार्थों में मिलाकर लिया जाता है, जिससे यह जानलेवा भी हो सकता है.

ईडी के रडार पर कौन-कौन लोग होंगे?

ईडी की जांच का दायरा अब सिर्फ उन 4 तस्करों तक सीमित नहीं है जो जेल में बंद हैं. जांच एजेंसी अब उन ‘बड़ी मछलियों’ की तलाश में है जो पर्दे के पीछे रहकर इस धंधे को फाइनेंस कर रहे थे.

  1. अंतरराष्ट्रीय लिंक: जहर की खेप को कोलकाता या दिल्ली के रास्ते चीन, वियतनाम और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भेजा जाना था. ईडी इन रूट्स से जुड़े बिचौलियों की पहचान कर रही है.
  2. शेल कंपनियां: शक है कि तस्करी से कमाए गए पैसे को सफेद करने के लिए कुछ फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं.
  3. स्थानीय मददगार: क्या वन विभाग या पुलिस के किसी निचले स्तर के कर्मचारी ने तस्करों की मदद की थी? ईडी इसकी भी गुप्त जांच कर रही है.

फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

बरामद जहर के सैंपल जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून भेजे गए हैं. इस रिपोर्ट से यह साफ होगा कि जहर किस प्रजाति के सांप (जैसे कोबरा या रसेल वाइपर) का है और यह कितना शुद्ध है. फॉरेंसिक रिपोर्ट कोर्ट में इस मामले को और भी मजबूत बनाएगी.

पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि वे ईडी की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं. वन्यजीवों के अंगों या जहर की इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना एक अलार्म है, जो बताता है कि तस्कर अब जंगलों में काफी गहराई तक अपनी पैठ बना चुके हैं. अब देखना यह होगा कि ईडी की इस नई कार्रवाई के बाद इस ‘जहरीले’ धंधे के असली मालिक कब तक सलाखों के पीछे पहुंचते हैं. कुलमिलाकर ईडी के जांच दायरे में सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि पूरी कमाई और पैसे के बहाव की पड़ताल भी शामिल होगी. यह मामला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध के पैटर्न तक पहुंच गया है.

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