‘बोस’ से लेकर ‘गुमनामी’ तक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर बनीं 7 फिल्में-सीरीज, जो उनके पराक्रम को करती हैं सलाम
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Parakram Diwas 2026: हर साल 23 जनवरी को महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पूरे देश में ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. भारत सरकार ने साल 2021 में नेताजी के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति उनके निस्वार्थ बलिदान को सम्मान देने के लिए इस विशेष दिन की घोषणा की थी. यह दिवस केवल एक जयंती नहीं, बल्कि युवाओं के लिए अनुशासन, निर्भयता और अटूट देशभक्ति की प्रेरणा है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर अब कई फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं जो युवाओं को प्रेरित करती हैं.

नई दिल्ली. ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलाने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन कर सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका था. उनका बुलंद नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’, आज भी रगों में देशभक्ति का जोश भर देता है. नेताजी का जीवन जितना प्रेरणादायक रहा, उनके लापता होने का रहस्य आज भी दुनिया के लिए एक पहेली बना हुआ है. उनके इसी अदम्य साहस, संघर्ष और मौत के अनसुलझे रहस्यों को कई फिल्मों, सीरियल और वेब सीरीज में बखूबी उतारा गया है, जो दर्शकों को उस महान नायक के पराक्रम से रूबरू कराती हैं. यहां पर देखिए पूरी लिस्ट.

गुमनामी: श्रीजीत मुखर्जी के निर्देशन में बनी गुमनामी साल 2019 में रिलीज हुई थी. बंगाली फिल्म में प्रोसेनजीत चटर्जी लीड रोल में हैं. फिल्म न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग की सुनवाई की काल्पनिक रीकैप है. यह दिखाती है कि नेताजी विमान दुर्घटना में बच गए और गुमनामी बाबा के रूप में भारत लौटे. एक कार्यकर्ता चंद्रचूड़ धर (अनिरुद्ध भट्टाचार्य) सच्चाई सामने लाने के लिए संघर्ष करता है. चंद्रचूड़ घोष की पुस्तक कनंड्रम पर बनी फिल्म नेताजी के अदम्य साहस और रहस्य को भावुक ढंग से पेश करती है. (फोटो साभार: IMDb)

बोस: डेड/अलाइव: साल 2017 में आल्ट बालाजी पर आई टीवी मिनी-सीरीज अनुज धर की किताब इंडियाज बिगेस्ट कवर-अप पर आधारित है. इसमें राजकुमार राव ने नेताजी की भूमिका निभाई है. वहीं, पत्रलेखा भी अहम किरदार में हैं. सीरीज साल 1945 में ताइहोकू (ताइवान) विमान दुर्घटना के बाद नेताजी के लापता होने के रहस्य पर केंद्रित है. यह सीरीज उनकी मौत को लेकर सवाल उठाती है और बताती है कि शायद वे बच गए हों. यह सीरीज रहस्य, जांच और ऐतिहासिक तथ्यों को रोचक तरीके से पेश करती है. (फोटो साभार: IMDb)
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अमी सुभाष बोलची: महेश मांजरेकर की बंगाली फिल्म ‘मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय’ की रीमेक है, जो साल 2011 में रिलीज हुई थी. फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती ने मुख्य भूमिका निभाई है. कहानी एक संघर्षरत मध्यमवर्गीय व्यक्ति देबब्रत बोस पर आधारित है, जिसे नेताजी से प्रेरणा मिलती है. अपनी पूरी ताकत के साथ वह भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ता है. फिल्म दिखाती है कि नेताजी की विचारधारा आज भी लोगों को साहस देती है. (फोटो साभार: IMDb)

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो: श्याम बेनेगल की फिल्म में सचिन खेडेकर और दिव्या दत्ता लीड रोल में हैं. साल 2004 में रिलीज हुई फिल्म 1941-1945 के बीच नेताजी के जीवन पर फोकस करती है, नाजी जर्मनी में बिताया उनका समय, जापान के साथ सहयोग और आजाद हिंद फौज का गठन होता है. यह युद्ध, स्वतंत्रता संग्राम और उनके योगदान को विस्तार से दिखाती है. फिल्म नेताजी को भुला दिया गया हीरो के रूप में प्रस्तुत करती है. (फोटो साभार: IMDb)

नेताजी: यह बंगाली टीवी सीरियल है, जो साल 2019 में प्रसारित हुआ था. इसमें अभिषेक बोस ने नेताजी की भूमिका निभाई. यह जी बांग्ला पर प्रसारित हुआ. सीरीज नेताजी के बचपन से शुरू होकर उनके युवा दिनों पर केंद्रित है, जिसमें कटक और कोलकाता के प्रसंग शामिल हैं. यह उनके प्रारंभिक जीवन और देशभक्ति की शुरुआत को दिखाती है.(फोटो साभार: IMDb)

सुभाष चंद्र: पीयूष बासू की बंगाली फिल्म साल 1966 में आई, जिसमें अमर दत्ता ने नेताजी की भूमिका निभाई. फिल्म उनके बचपन से लेकर नेता बनने तक के सफर को दिखाती है. यह क्लासिक फिल्म नेताजी के जीवन की खास घटनाओं को बेहतरीन तरीके से पेश करती है. (फोटो साभार: IMDb)

समाधि: रमेश सहगल के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1950 में रिलीज हुई थी, जो स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और सैनिकों के संघर्ष को दिखाती है. यह नेताजी के विचारों और आजादी के लिए बलिदान पर केंद्रित है. फिल्म में अशोक कुमार के साथ नलिनी जयवंत और शशि कपूर भी अहम भूमिकाओं में हैं. (फोटो साभार: IMDb)