DRDO Hypersonic Missile । Republic Day Parade । Submarine Heavy Torpedo – दुश्मन की पहुंच से बाहर, टारगेट पर सीधा वार: DRDO की हाइपरसोनिक मिसाइल का जलवा; समंदर में भारत की अजेय तैयारी
नई दिल्ली. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ, गणतंत्र दिवस परेड तथा भारत पर्व 2026 में अपनी कई स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन करेगा. इन प्रमुख प्रणालियों में लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल है. वहीं, इस बार डीआरडीओ की विशेष झांकी कॉम्बैट सबमरीन के लिए नौसैनिक प्रौद्योगिकियों पर आधारित होगी.
डीआरडीओ गणतंत्र दिवस परेड के दौरान लॉन्चर सहित लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रदर्शन करेगा. यह अत्याधुनिक हथियार प्रणाली भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है. लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है. यह मिसाइल स्थिर एवं गतिमान दोनों प्रकार के लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता से भेदने में सक्षम है. इसे विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है.
खास बात यह भी है कि यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी एवियोनिक्स प्रणालियों और उच्च-सटीकता वाले सेंसर पैकेज से युक्त है. यह अपनी श्रेणी की पहली स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल है. तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो यह उड़ान के दौरान मल्टीपल स्किप्स करती है. टर्मिनल चरण में गतिमान लक्ष्यों को भेदने के लिए स्वदेशी विकसित सेंसर से लैस है. कम ऊंचाई, अत्यधिक गति और उच्च गतिशीलता के कारण यह मिसाइल दुश्मन के भूमि एवं पोत आधारित रडारों की पकड़ से अधिकांश समय बाहर रहती है.
डीआरडीओ के मुताबिक, लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल में दो-चरणीय ठोस ईंधन रॉकेट मोटर प्रणाली का उपयोग किया गया है. पहला चरण निर्धारित समय के बाद इससे अलग हो जाता है. वहीं, दूसरे चरण के पूर्ण होने के पश्चात मिसाइल वायुमंडल में बिना इंजन के ग्लाइड करते हुए आवश्यक युद्धाभ्यास करती है और लक्ष्य को भेदती है. डीआरडीओ की झांकी भारत पर्व के तहत लाल किला परिसर में 26 से 31 जनवरी 2026 तक प्रदर्शित की जाएगी. इस वर्ष झांकी का विषय है ‘नेवल टेक्नोलॉजीस फॉर कॉम्बैट सबमरींस’.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस झांकी में भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियों की युद्ध क्षमता बढ़ाने वाली स्वदेशी प्रणालियों को प्रदर्शित किया जाएगा. ये वे क्षमताएं हैं जो जल के नीचे युद्ध क्षेत्र में फ़ोर्स मल्टीप्लायर की भूमिका निभाती हैं. यह सिस्टम इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट (आईसीएस) कहलाता है. आईसीएस एक नई पीढ़ी की पनडुब्बी आधारित युद्ध प्रणाली है, जो पनडुब्बी युद्ध एवं पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह ‘सिस्टम ऑफ सिस्टम्स’ के रूप में कार्य करता है. इससे खतरे का सटीक आकलन, रणनीतिक निर्णय, हथियारों का चयन, प्रक्षेपण एवं मार्गदर्शन संभव हो पाता है.
वहीं, वायर गाइडेड हेवी वेट टॉरपीडो एक आधुनिक पनडुब्बी-प्रक्षेपित टॉरपीडो है. इसे समकालीन पोत एवं पनडुब्बी खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है. दरअसल, यह पनडुब्बी रोधी युद्ध का प्रमुख हथियार है और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है. यह भारतीय नौसेना की सभी पनडुब्बियों के लिए प्राथमिक हथियार माना जाता है. ब्लू-वॉटर नेवल वॉरफेयर में वर्चस्व बनाए रखने के लिए यह प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसके अलावा, एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) भी यहां को मिलेगी. एआईपी प्रणाली पनडुब्बियों की दीर्घकालिक जलमग्न क्षमता बढ़ाकर उनकी स्टेल्थ क्षमता को कई गुना बढ़ाती है.
यह स्वदेशी रूप से विकसित फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल और ऑनबोर्ड हाइड्रोजन जनरेटर पर आधारित है. डीआरडीओ अन्य प्रणालियों का भी प्रदर्शन करेगा. कर्तव्य पथ परेड में सशस्त्र बलों की टुकड़ियों के माध्यम से डीआरडीओ की कई अन्य विकसित प्रणालियां भी प्रदर्शित की जाएंगी. इनमें अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, नाग मिसाइल प्रणाली, एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, बैटलफील्ड सर्विलांस रडार, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल आदि शामिल हैं.