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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. अक्सर कहा जाता है कि मेहनत की कमाई को बैंक में रखना सबसे सुरक्षित होता है, लेकिन गाजियाबाद के प्रदीप कुमार सक्सेना को लगा कि यूपी में रामराज आ गया है तो खजाना कहीं भी रखो, क्या फर्क पड़ने वाला है. शायद सक्सेना जी को बैंकों की सुरक्षा पर उतना भरोसा नहीं था, जितना उस मकान पर, जिसमें वह रहना छोड़ चुके थे. इसलिए सक्सेना जी ने 80 लाख रुपये और गहने और जेवरात किसी लॉकर में रखने के बजाय अपने उस पुराने घर के एक संदूक में रखना बेहतर समझा. लेकिन उनकी यही सावधानी उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई. अब उन्होंने गाजियाबाद पुलिस को शिकायत दर्ज कराई है कि उनके घर में रह रहे किरायेदारों ने कथित तौर पर सेंध लगाकर संदूक से उनकी पूरी तिजोरी साफ कर दी है.

शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार सक्सेना ने गाजियाबाद पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से 80 लाख रुपये और घर के कुछ कीमती सोने-चांदी के जेवरातों को अपने पुराने मकान के एक लोहे की संदूक में सुरक्षित रख दिया था. उन्हें लगा था कि घर के भीतर लोहे की यह संदूक में रखा पैसा सुरक्षित रहेगा. लेकिन जब वह एक दिन अपने पुराने मकान पर आए तो उनके संदूक से 80 लाख रुपये और गहने गायब मिले.

नए घर में शिफ्ट हुए, पर पुराना मोह रह गया पीछे

अक्टूबर 2025 में प्रदीप कुमार सक्सेना का परिवार रेडवुड GH-3 मधुबन बापूधाम में नवनिर्मित मकान में शिफ्ट हो गया था. उन्होंने अपने पुराने मकान कैलाशपुरम द्वितीय के कुछ फ्लोर किराये पर दे दिया, लेकिन अपनी उस भारी-भरकम नगदी और जेवरातों को साथ ले जाने के बजाय वहीं पुरानी सेफ में छोड़ दिया. पुराने घर में उन्होंने भगीरथ नाम के एक व्यक्ति को बतौर किरायेदार रखा था. भगीरथ अपने परिवार के साथ वहां रहने लगा. सक्सेना जी कभी-कभी अपने पुराने घर का चक्कर लगा लिया करते थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस किरायेदार को वे छत दे रहे हैं, उसकी नजर उनकी उम्र भर की कमाई पर है.

1 जनवरी का वो ‘खौफनाक’ मंजर

नया साल 1 जनवरी 2026 सक्सेना परिवार के लिए खुशियां लेकर आने वाला था, लेकिन जैसे ही प्रदीप कुमार सक्सेना अपने पुराने मकान पर पहुंचे, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. जब उन्होंने कमरे में रखी सेफ अलमारी को खोलकर देखा, तो वह पूरी तरह खाली थी. उसमें रखे 80 लाख रुपये नकद और लाखों के सोने-चांदी के जेवरात गायब थे. सक्सेना जी ने घर में काफी तलाश की, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला. उन्होंने तुरंत अपने किरायेदार से पूछताछ की, लेकिन वहां से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्हें यकीन हो गया कि यह किसी बाहरी चोर का काम नहीं, बल्कि घर के भेदी का ही काम है.

किरायेदार और उसके परिवार पर गंभीर आरोप

काफी सोच-विचार और शुरुआती छानबीन के बाद प्रदीप कुमार सक्सेना ने 20 जनवरी को कविनगर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने अपनी शिकायत में सीधे तौर पर किरायेदार भगीरथ, उसकी पत्नी सुखवती और उसके चाचा छोटे लाल को नामजद किया है. पीड़ित का आरोप है कि इन तीनों को घर के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी और उन्हें यह भी पता था कि सेफ में भारी मात्रा में नगदी रखी है.

पुलिसिया कार्रवाई और एसीपी का बयान

सक्सेना जी का दावा है कि आरोपियों ने मिलकर साजिश रची और मौका पाकर आधी रात को सेफ का ताला तोड़कर या चाबी का जुगाड़ कर पूरी रकम उड़ा ली. पीड़ित के अनुसार, किरायेदार के व्यवहार में अचानक आए बदलाव से भी उन पर शक गहरा गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए कविनगर पुलिस ने बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत चोरी का मुकदमा दर्ज कर लिया है. एसीपी कविनगर सूर्यबली मौर्य ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस की एक टीम मकान के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि घटना वाली रात घर में कौन आया था या किसने सामान बाहर निकाला.

बैंकों पर भरोसा न करना पड़ा भारी

इस घटना ने गाजियाबाद में सुरक्षा को लेकर चर्चा छेड़ दी है. लोग हैरान हैं कि आज के दौर में भी कोई इतनी बड़ी रकम 80 लाख रुपये घर में कैसे रख सकता है. यह मामला उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो आयकर या अन्य डर से बैंकों के बजाय घरों में नगदी जमा करना सुरक्षित समझते हैं. फिलहाल, सक्सेना जी के 80 लाख रुपये और उनकी शांति दोनों ही गायब हैं. उनकी उम्मीद अब सिर्फ पुलिसिया जांच पर टिकी है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीड़ित सक्सेना ने इतनी रकम अपने घर में क्यों रखी थी? पुलिस सक्सेना जी की प्रॉपर्टी खरीदने वाली थ्योरी की भी जांच कर रही है. गाजियाबाद पुलिस पीड़ित शख्स के उस दावे की भी जांच रही है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 80 लाख रकम उन्होंने रिश्तेदारों, मित्रों और परिवार के अन्य सदस्यों से मिले. आखिर इतनी रकम उस मकान में क्यों रखी गई, जहां वह रहते ही नहीं थे?

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