Who is Noida DM Medha Roopam? UPSC Rank, Batch and Family Background Amid Techie Death Case | कौन हैं नोएडा की डीएम मेधा रूपम? इंजीनियर युवराज की मौत के बाद चर्चा में आईं आईएएस अधिकारी

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नई दिल्ली (Noida DM Medha Roopam IAS Story). उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जिले गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की कमान संभाल रहीं आईएएस अधिकारी मेधा रूपम इन दिनों सुर्खियों में हैं. हाल ही में नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत और उसके बाद उपजे विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. इस संवेदनशील मामले में जिलाधिकारी के रूप में मेधा रूपम की भूमिका और उनके लिए गए निर्णय पर जनता और मीडिया की पैनी नजर है.

मेधा रूपम उत्तर प्रदेश कैडर की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी मानी जाती हैं. वह न केवल प्रशासनिक क्षमता, बल्कि अपनी विशिष्ट पारिवारिक पृष्ठभूमि के लिए भी जानी जाती हैं. उनके पिता ज्ञानेश कुमार वर्तमान में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) जैसे संवैधानिक पद पर तैनात हैं. नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में पीड़ित परिवार के आरोपों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच लोग जानने को उत्सुक हैं कि आखिर नोएडा की यह युवा महिला कलेक्टर कौन हैं और उनका अब तक का सफर कैसा रहा है.

नोएडा की डीएम कौन हैं?

मेधा रूपम 2014 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस (IAS) अधिकारी हैं. उन्होंने साल 2013 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 10वीं रैंक हासिल की थी, जो उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है. आईएएस मेधा रूपम ने अपनी उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफन कॉलेज से पूरी की है. वह मूल रूप से केरल की रहने वाली हैं, लेकिन उनका पालन-पोषण और करियर उत्तर प्रदेश में ही परवान चढ़ा.

सरकारी अफसरों से भरा-पूरा परिवार

मेधा रूपम एक ऐसे परिवार से आती हैं, जिसका भारतीय प्रशासन में गहरा दखल है. उनके पिता, ज्ञानेश कुमार, 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) के रूप में कार्यरत हैं. पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए मेधा ने भी प्रशासन को ही अपना कार्यक्षेत्र चुना. उनके पति भी आईएएस अधिकारी हैं, जिससे उनकी पहचान प्रभावशाली ‘ब्यूरोक्रेटिक फैमिली’ के रूप में होती है.

नोएडा इंजीनियर मौत मामला और विवाद

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के बाद प्रशासन और पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे. आरोप है कि समय पर उचित कार्रवाई और संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई. सोशल मीडिया पर डीएम मेधा रूपम के प्रति नाराजगी जाहिर की जा रही है. हालांकि, प्रशासन का पक्ष है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. बतौर डीएम, मेधा रूपम के लिए यह मामला बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो रहा है, जहां उन्हें कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच बैलेंस बनाना है.

आईएएस मेधा रूपम का प्रशासनिक अनुभव और उपलब्धियां

गौतम बुद्ध नगर की DM बनने से पहले मेधा रूपम कासगंज की जिलाधिकारी रह चुकी हैं. वह मेरठ, बागपत जैसे जिलों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर भी तैनात रही हैं. उन्हें डेटा-आधारित प्रशासन और सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन के लिए जाना जाता है. कासगंज में उन्होंने शिक्षा और महिला सशक्तीकरण की दिशा में सराहनीय कार्य किए थे. गौतम बुद्ध नगर का जिलाधिकारी होना अपने आप में बड़ी चुनौती है. यह दिल्ली से सटा हुआ आर्थिक हब है. यहाँ की समस्याओं का स्वरूप ग्रामीण और शहरी, दोनों है.

इंजीनियर की मौत जैसे मामले प्रशासनिक छवि को प्रभावित करते हैं. मेधा रूपम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और नोएडा की जनता के बीच विश्वास बहाल करना है.

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