बॉलीवुड का वो डायरेक्टर, जिसने रिश्ते किए शर्मसार, सगी भांजी से की शादी, सहमा परिवार, समाज में हुई थू-थू
Last Updated:
कभी जिन फिल्मों के लिए तालियां बजी थीं. उसी निर्देशक की जमकर थू-थू होने लगी. इस डायरेक्टर स्टाइलिश पिक्चराइजेशन से दर्शकों के दिलों पर छोड़ी छाप, हर सीन और गाने में जान डाली. लेकिन निजी जीवन में फैसले किए उसने रिश्तों की पवित्रता पर सवाल उठे, नैतिकता और संस्कारों को लेकर तीखी बहस छेड़ दी. आज भी इस डायरेक्टर का लव लाइफ बॉलीवुड के सबसे चौंकाने वाले निजी किस्सों में गिना जाता है, जो बताता है कि स्टारडम के पीछे छुपी कहानियां कितनी कड़वी हो सकती हैं.

नई दिल्ली. बॉलीवुड का इतिहास सिर्फ चमक-दमक और सुपरहिट फिल्मों से नहीं बना, बल्कि कुछ ऐसे विवादों से भी जुड़ा है, जिन्होंने समाज को झकझोर कर रख दिया. एक ऐसा ही मामला उस नामी फिल्म निर्देशक से जुड़ा रहा, जिसने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी. लेकिन अपने निजी रिश्तों के चलते कला से ज्यादा बदनामी बटोरी. सुपरस्टार का भाई पहले से शादीशुदा था. इंडस्ट्री में इसके उसका नाम था, बावजूद उसने खून के रिश्ते की मर्यादा तोड़ी और फिल्मों से ज्यादा वो अपनी लव स्टोरी को लेकर सुर्खियों में रहा. क्योंकि ये लव स्टोरी कोई नॉर्मल लव स्टोरी नहीं बल्कि सगी भांजी के साथ थी. फोटो साभार-@NAVKETAN-DevAnand, Vijay, Chetan/facebook

सिनेमा की दुनिया कई सितारों के नाम एक दूसरों के साथ जुड़े कुछ रिश्तें सिर्फ अफवाह साबित हुईं तो कुछ के बारे में तो आज भी लोग चटकारों के साथ किस्से-कहानियों को सुनते पढ़ते हैं. ये वो डायरेक्टर रहे, जिसने अपने भाई को सुपरस्टार बनाया. 70-80 के दशक में कई शानदार फिल्में बनाई. कई हिट हुई और कई तो कल्ट की लिस्ट में शुमार हुईं.<br />ये कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड के स्टार रहे देवानंद के भाई विजय आनंद थे, जो फिल्म इंडस्ट्री में गोल्डी नाम से फेमस थे. फाइल फोटो.

विजय आनंद का जन्म 22 जनवरी 1934 को पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था. उनके परिवार में पहले से ही फिल्मी माहौल था. उनके बड़े भाई चेतन आनंद एक प्रसिद्ध निर्देशक और प्रोड्यूसर थे, जबकि देवानंद एक सुपरस्टार अभिनेता और निर्देशक के रूप में जाने जाते थे. ऐसे परिवार में पले-बढ़े विजय ने भी बचपन से ही कला और सिनेमा की ओर रुचि दिखाई. उनके पिता पिशोरी लाल आनंद एक सफल वकील थे. उनकी माता का बचपन में ही निधन हो गया था, इसलिए वे बड़े भाई और भाभी की छत्र-छाया में बड़े हुए. उनके बाल गोल्डन कलर के थे और इसलिए उनके पिता उन्हें ‘गोल्डी लॉक्स’ कहा करते थे. फोटो साभार-@IMDb
Add News18 as
Preferred Source on Google

विजय आनंद ने मुंबई से उन्होंने पढ़ाई पूरी की. कॉलेज के दौरान ड्रामा की तरफ उनकी रुझान बढ़ने लगा और फिर उन्होंने प्ले लिखना भी शुरू कर दिया. कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखनी भी शुरू कर दी थी, क्योंकि उन्हें यकीन था कि उनका भविष्य भी भाईयों की तरह फिल्मों में ही है. देवानंद और चेतन आनंद नवकेतन प्रोडक्शन हाउस चलाते थे और वह इसी प्रोडक्शन हाउस में काम करना चाहते थे. विजय आनंद को डायरेक्टर बनाने वाले उनके भाई देवानंद ही हैं. फोटो साभार- @IMDb

विजय आनंद ने अपनी पढ़ाई मुंबई से की. कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपनी भाभी उमा आनंद के साथ मिलकर एक स्क्रिप्ट लिखी, जो आगे चलकर फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’ बनी. यह फिल्म 1954 में रिलीज हुई और इसे उनके बड़े भाई चेतन आनंद ने डायरेक्ट किया. इस फिल्म में देव साहब मुख्य अभिनेता थे. इस अनुभव ने विजय आनंद को फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियां समझने का मौका दिया. विजय आनंद ने 23 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म ‘नौ दो ग्यारह’ डायरेक्ट की. उस समय कम उम्र में इतनी परिपक्वता देख सभी हैरान रह गए थे. उन्होंने केवल 40 दिनों में इस फिल्म की शूटिंग पूरी की थी.इसके बाद उन्होंने ‘काला बाजार’, ‘तेरे घर के सामने’और ‘गाइड’ जैसी फिल्में बनाईं। खासकर ‘गाइड’, जो आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी, ने उन्हें और देव आनंद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. फोटो साभार-@NAVKETAN-DevAnand, Vijay, Chetan/facebook

विजय आनंद ने अपनी पढ़ाई मुंबई से की. कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपनी भाभी उमा आनंद के साथ मिलकर एक स्क्रिप्ट लिखी, जो आगे चलकर फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’ बनी. यह फिल्म 1954 में रिलीज हुई और इसे उनके बड़े भाई चेतन आनंद ने डायरेक्ट किया. इस फिल्म में देव साहब मुख्य अभिनेता थे. इस अनुभव ने विजय आनंद को फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियां समझने का मौका दिया. विजय आनंद ने 23 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म ‘नौ दो ग्यारह’ डायरेक्ट की. उस समय कम उम्र में इतनी परिपक्वता देख सभी हैरान रह गए थे. उन्होंने केवल 40 दिनों में इस फिल्म की शूटिंग पूरी की थी.इसके बाद उन्होंने ‘काला बाजार’, ‘तेरे घर के सामने’और ‘गाइड’ जैसी फिल्में बनाईं। खासकर ‘गाइड’, जो आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी, ने उन्हें और देव आनंद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. फोटो साभार-@IMDb

उनकी फिल्मों की सबसे खास बात उनका गानों को दिखाने का अंदाज था. विजय आनंद हर गाने को एक कहानी की तरह पेश करते थे. चाहे वह रोमांटिक गाना हो या थ्रिलर सीन, उनका स्टाइलिश पिक्चराइजेशन हर बार दर्शकों को आकर्षित करता. ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ में उनकी आधुनिकता और डांस की समझ साफ दिखाई देती है, जबकि ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ में भावनाओं और संगीत को पूरी तरह महसूस कराया गया. इसी तरह ‘होंठों में ऐसी बात’ में रोमांस और रहस्य का अद्भुत मिश्रण था, जो आज भी फिल्म प्रेमियों को याद है. फाइल फोटो.

विजय आनंद ने पहली शादी लवलीन थडानी से की थी. विजय उस समय बिलेन प्रेमनाथ के बेटे प्रेम किशन और शेखर कपूर को लेकर बोल्ड रोमांटिक फिल्म ‘जान हाजिर है’ बना रहे थे. लवलीन लीड रोल में थीं. बाद में लवलीन को विजय से प्यार हो गया. दोनों ओशो रजनीश के पुणे आश्रम जाने लगे. लवलीन ने ही विजय के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था और जान हाजिर है का लीड रोड छोड़ दिया था. फोटो साभार-@NAVKETAN-DevAnand, Vijay, Chetan/facebook

1978 में विजय आनंद ने ‘राम बलराम’ फिल्म की शूटिंग के दौरान भारतीय समाज के तमाम नियमों-रिवाजों को ताक पर रख दिया और अपनी बड़ी बहन की बेटी यानी सगी भांजी सुषमा कोहली से ही दूसरी शादी कर ली. तब तक लवलीन थडानी से उनका तलाक नहीं हुआ था. इस शादी को लेकर उनके परिवार में भी जमकर बखेड़ा हुआ. हालांकि, अब दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं. दोनों का एक बेटा वैभव हुआ जो फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए. उधर, लवलीन समझ चुकी थीं कि विजय उनके फिल्मों में काम करने के खिलाफ हैं. कुछ समय बाद लवलीन ने फिल्मों में काम करने की इच्छा विजय से बताई. विजय इस बात से परेशान हो गए थे. इसी के बाद दोनों का तलाक हो गया था. दुनिया रीति-रिवाजों को ठेंगा दिखाकर उन्होंने भांजी से शादी की, जिसके बाद समाज की थू-थू भी उन्हें सहनी पड़ी. फोटो साभार-@NAVKETAN-DevAnand, Vijay, Chetan/facebook