Saraswati Puja Bhog Menu Difference in North Indian and Bengali Menu । सरस्वती पूजा 2026 उत्तर भारतीय और बंगाली भोग में अंतर

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Saraswati Puja 2026 Bhog Menu: सरस्वती पूजा 2026 में भोग का खास धार्मिक महत्व होता है. उत्तर भारत में हलवा, पीले चावल और खीर भोग में शामिल होते हैं. बंगाल में खिचड़ी, लाबरा और पायेश पूजा की पहचान हैं. दोनों जगह भोग पूरी तरह सात्विक और शुद्ध रखा जाता है. स्वाद अलग हो सकता है, लेकिन श्रद्धा और भावना एक जैसी होती है.

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Saraswati Puja 2026 Bhog Menu: सरस्वती पूजा सिर्फ पूजा का दिन नहीं होता, बल्कि यह ज्ञान, विद्या, कला और सादगी का उत्सव भी है. इस दिन मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए जो भोग चढ़ाया जाता है, उसमें शुद्धता, सात्विकता और परंपरा का खास ध्यान रखा जाता है. लेकिन अगर ध्यान से देखा जाए तो उत्तर भारत और पश्चिम बंगाल में सरस्वती पूजा का भोग मेनू अलग अलग नजर आता है. कहीं हल्का, सादा और पीले रंग का भोग पसंद किया जाता है, तो कहीं भोग में पारंपरिक स्वाद और सांस्कृतिक पहचान झलकती है. सरस्वती पूजा 2026 में भी यही परंपराएं निभाई जाएंगी. आइए आसान और आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि उत्तर भारतीय और बंगाली सरस्वती पूजा भोग में क्या क्या अंतर होता है.

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सरस्वती पूजा भोग का धार्मिक महत्व: सरस्वती पूजा के दिन भोग पूरी तरह सात्विक रखा जाता है. इसमें लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता. माना जाता है कि इस दिन बनाया गया भोजन जितना शुद्ध और सादा होगा, मां सरस्वती उतनी ही प्रसन्न होंगी. इसी वजह से भोग में दूध, चावल, फल, मिठाई और सादी सब्जियों को ज्यादा महत्व दिया जाता है.

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उत्तर भारतीय सरस्वती पूजा भोग मेनू: उत्तर भारत में सरस्वती पूजा को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन पीले रंग की चीजों का खास महत्व होता है क्योंकि पीला रंग बसंत, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.

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उत्तर भारतीय सरस्वती पूजा भोग में सबसे पहले आता है केसरी हलवा सरस्वती पूजा भोग. सूजी, घी और केसर या हल्दी से बना यह हलवा मां सरस्वती को अर्पित किया जाता है. इसके साथ पीले चावल सरस्वती पूजा भोग बनाए जाते हैं, जिनमें हल्दी या केसर मिलाया जाता है.

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कई घरों में खीर सरस्वती पूजा भोग जरूर बनाई जाती है. दूध और चावल से बनी खीर सादगी और मिठास का प्रतीक मानी जाती है. मिठाई में बूंदी के लड्डू सरस्वती पूजा भोग या बेसन के लड्डू सरस्वती पूजा भोग भी आम तौर पर रखे जाते हैं.

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नमकीन भोग के तौर पर आलू की सब्जी सरस्वती पूजा भोग बनाई जाती है, जिसमें प्याज और लहसुन नहीं डाले जाते. इसके साथ पूरी सरस्वती पूजा भोग या सादी रोटी सरस्वती पूजा भोग भी परोसी जाती है. कुछ जगहों पर चना दाल सरस्वती पूजा भोग और सादा चावल सरस्वती पूजा भोग भी मां को अर्पित किए जाते हैं.

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बंगाली सरस्वती पूजा भोग मेनू: पश्चिम बंगाल में सरस्वती पूजा बहुत ही श्रद्धा और खास परंपरा के साथ मनाई जाती है. यहां भोग में बंगाली स्वाद और घरेलूपन साफ दिखाई देता है. बंगाली सरस्वती पूजा भोग की सबसे खास चीज होती है खिचड़ी सरस्वती पूजा भोग. यह खिचड़ी खास खुशबूदार चावल और मूंग दाल से बनाई जाती है और पूजा का मुख्य हिस्सा होती है. इसके साथ लाबरा सरस्वती पूजा भोग जरूर बनाई जाती है. लाबरा कई तरह की सब्जियों को मिलाकर बनाई जाने वाली पारंपरिक बंगाली सब्जी है. बंगाल में बैंगन के पकौड़े सरस्वती पूजा भोग भी बहुत पसंद किए जाते हैं. ये खिचड़ी के साथ परोसे जाते हैं.

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मीठे में पायेश सरस्वती पूजा भोग सबसे खास माना जाता है. यह बंगाली खीर होती है, जिसे दूध और चावल से बनाया जाता है. कई घरों में मीठा दही सरस्वती पूजा भोग भी चढ़ाया जाता है. इसके अलावा संदेश सरस्वती पूजा भोग और रसगुल्ला सरस्वती पूजा भोग भी पूजा में रखे जाते हैं, लेकिन बहुत भारी मिठाइयों से आम तौर पर बचा जाता है.

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उत्तर भारतीय और बंगाली भोग में क्या है फर्क: उत्तर भारतीय सरस्वती पूजा भोग में सादगी और पीले रंग पर ज्यादा जोर होता है. वहीं बंगाली सरस्वती पूजा भोग में व्यंजनों की संख्या थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन स्वाद हल्का और शुद्ध ही रहता है. उत्तर भारत में हलवा, पूरी और खीर ज्यादा देखने को मिलती है, जबकि बंगाल में खिचड़ी, लाबरा और पायेश पूजा की पहचान बन चुके हैं.

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<br />सरस्वती पूजा 2026 में भोग बनाते समय ध्यान रखने वाली बातें: भोग बनाते समय साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें. भोजन बनाते समय मन शांत रखें और नकारात्मक सोच से दूर रहें. पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में सभी के साथ बांटें.

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Saraswati Puja 2026 Bhog: उत्तर भारतीय और बंगाली भोग में क्या होता है फर्क

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