बाप-बेटे ने कीं एक जैसी फिल्में, एक ने रचा इतिहास, पहुंची ऑस्कर तक, दूसरी में जीते दिल, सेम था लास्ट सीन – nargis mother india Sanjay dutt vaastav Father son 2 bollywood movies same last scene first got Oscar nomination second turn cult gansgter real life
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Bollywood Father Son Best Hindi Movie : बॉलीवुड में कुछ ही फिल्में ऐसी बनी हैं जिन्हें ऑस्कर में नॉमिनेशन मिला. 68 साल पहले एक ऐसी फिल्म आई थी जिसे हिंदी सिनेमा की धरोहर माना जाता है. इस फिल्म के बिना हिंदी सिनेमा अधूरा है. यह फिल्म मस्ट वॉच लिस्ट में शामिल है. हर किसी को यह फिल्म जिंदगी में एक बार जरूर देखना चाहिए. इस फिल्म ने 5 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे. बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड भी जीता था. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म की कहानी से मिलती-जुलती कहानी पर 42 साल बाद एक और मूवी 1999 में बनाई गई. एक फिल्म पिता की थी तो दूसरी उनके बेटे की. बेटे को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. आज हम इन्हीं दोनों फिल्मों, बाप-बेटे की जोड़ी की जिंदगी से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स की चर्चा करेंगे.

बॉलीवुड में मिलती-जुलती स्टोरी लाइन पर कई फिल्में बन चुकी हैं. यह ट्रेंड बहुत पुराना है. 42 साल के अंतराल में दो ऐसी फिल्में बनीं जिनकी कहानी एक जैसी थी. फिल्मों का ट्रेटमेंट जरूर अलग था लेकिन दोनों फिल्मों के लास्ट सीन लगभग एक जैसे ही थे. एक फिल्म में जहां पिता सुपरस्टार नजर आया तो दूसरी फिल्म में बेटे ने शानदार परफॉर्मेंस दी थी. एक फिल्म को ऑस्कर में नॉमिनेशन मिला, वहीं बेटे ने बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता. पिता-पुत्र की जोड़ी पूरे बॉलीवुड में मशहूर रही. ये फिल्में थीं : मदर इंडिया और वास्तव. मदर इंडिया में जहां सुनील दत्त थे वहीं वास्तव में लीड हीरो संजय दत्त थे. आइये जानते हैं दोनों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…….

सबसे पहले बात करते हैं 14 फरवरी 1957 को रिलीज हुई ‘मदर इंडिया’ फिल्म की जिसका डायरेक्शन महबूब खान ने किया था. फिल्म में नरगिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राजकुमार लीड रोल में नजर आए थे. फिल्म यह फिल्म 1940 में आई फिल्म ‘औरत’ का रीमेक थी. 23 अक्टूबर 1957 को राष्ट्रपति भवन में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी यह फिल्म देखी थी. यह भारत की ओर से ऑस्कर में नॉमिनेशन पाने वाली पहली फिल्म थी. सिर्फ एक वोट से यह फिल्म पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गई थी. 5वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में इसे हिंदी की बेस्ट फीचर फिल्म के अवॉर्ड से नवाजा गया. इसे 5 फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे.

फिल्म के आग वाले सीक्वेंस के दौरान नरगिस लपटों से घिर गई थीं. सुनील दत्त ने अपनी जान पर खेलकर उन्हें बचाया था. सुनील दत्त आग में झुलस गए थे. नगरिस को उनसे प्यार हो गया. एक साल के अंदर ही दोनों ने शादी कर ली. फिल्म का म्यूजिक भी ब्लॉकबस्टर रहा था. फिल्म में 42:30 मिनट की लेंग्थ के कुल 12 गाने थे. गाने आज भी उतने ही सदाबहार हैं. ये गाने थे : नगरी नगरी द्वारे द्वारे, दुनिया में आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, दुख भरे दिन बीते रे भैया, होली आई रे कन्हाई, घूंघट नहीं खोलूंगी सैंया शामिल थे. फिल्म का म्यूजिक नौशाद ने दिया था. यह फिल्म उस समय 60 लाख के बजट में तैयार हुई थी और इंडिया में करोड़ का कलेक्शन किया था.
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फिल्म की कहानी नायिका प्रधान थी. पति की मौत के बाद गरीबी में जकड़ी राधा अपने दो बच्चे के साथ जीवन में संघर्ष करती है. सुक्खी लाला से खुद का दामन बचाती है लेकिन हिम्मत नहीं हारती है. भारतीय नारी का कर्तव्य निभाती है. अपने फर्ज से मुंह नहीं मोड़ती है. सुनील दत्त ने नरगिस के बेटे का रोल निभाया था.

फिल्म का लास्ट सीन बहुत ही शॉकिंग था. उस दौर में ऐसे सीन की कल्पना महबूब खान ने ही कर सकते थे. फिल्म के लास्ट सीन में राधा अपने बेटे बिरजू को गोली मार देती है. गांव की इज्जत के लिए इतना बड़ा कदम उठाती है. फिर फूट-फूटकर रोती है, उसे गले लगाती है. बिरजू उनकी बाहों में दम तोड़ देता है. वो बिलख-बिलखकर कहती है, ‘बिरजू मेरे लाल मत जाओ.’ हिंदी सिनेमा में इस सीन को कई फिल्मों में दिखाया गया. 1982 की शक्ति फिल्म में दिलीपु कुमार अमिताभ बच्चन को गोली मार देते हैं. यह सीन भी मदर इंडिया से ही इंस्पायर्ड था.

सुनील दत्त ने बॉलीवुड में खूब नाम कमाया. वो कई नए एक्टर को फिल्म इंडस्ट्री में लेकर आए जिनमें विनोद खन्ना, रीना रॉय, रंजीत जैसे एक्टर शामिल हैं. सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त ने भी बॉलीवुड में अपना करियर बनाया. संजय दत्त की एक फिल्म का लास्ट सीन मदर इंडिया से बिल्कुल मिलता-जुलता है. यह फिल्म 7 अक्टूबर 1999 को रिलीज हुई थी. नाम था : वास्तव : द रियल्टी जो कि गैंगस्टर छोटा राजन की रियल लाइफ पर बेस्ड थी. इस एक्शन-क्राइम फिल्म की स्टोरी, स्क्रीनप्ले महेश मांजरेकर ने लिखा था. महेश मांजरेकर ने ही डायरेक्शन किया था. बतौर डायरेक्टर यह उनकी पहली फिल्म थी. डायलॉग्स इम्तियाज हुसैन ने लिखे थे.

वास्तव : द रियल्टी में संजय दत्त, नम्रता शिरोडकर, दीपक तिजोरी, मोहन जोशी, शिवाजी सटाम, रीमा लागू, परेश रावल और संजय नारवेकर जैसे सितारे नजर आए थे. संजय दत्त ने रघुनाथ उर्फ रघु नामदेव शिवाकर का किरदार निभाकर सबका दिल जीत लिया था. इस फिल्म में संजय दत्त ने पहली बार रियल एक्टिंग की थी. संजय दत को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. संजय नारवेकर ने डेढ़ फुटिया का किरदार में शानदार एक्टिंग की थी. म्यूजिक जतिन-ललित का था. फिल्म का एक गाना ‘मेरी दुनिया है तुझमें कहीं’ पॉप्युलर हुआ था. गीत समीर ने लिखे थे. दिलचस्प बात यह है कि वास्तव – द रियल्टी को छोटा राजन के भाई दीपक निखिल्जे ने प्रोड्यूस किया था. दीपक रियल स्टेट के कारोबार से जुड़े हैं. 2004-2009 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. फिल्म में उन्हें ‘दीपक’ नाम से क्रेडिट दिया गया था.

फिल्म की कहानी भी दीपक के भाई यानी मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की लाइफ पर बेस्ड मानी जाती है. मुंबई के एक साधारण से परिवार का लड़का हालात के आगे मजबूर होकर कैसे अपराध के दलदल में फंस गया, फिल्म इस कहानी को शिद्दत के साथ पर्दे पर दिखाती है. छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखिल्जे था जो कि मुंबई के चेंबूर के तिलक नगर में रहता था. छोटा राजन शंकर सिनेमा के बाहर ब्लैक में टिकट बेचा करता था लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो उसने पुलिसकर्मी को पीट दिया. जेल से लौटा तो गैंगस्टर राजन नायर उर्फ बड़ा राजन की गैंग ज्वाइन कर ली. 1982 में पठान भाइयों ने बड़ा राजन की हत्या कर दी तो गैंग की कमान राजेंद्र सदाशिव के हाथ में आ गई. यहीं से उसका नाम छोटा राजन पड़ गया.

वास्तव फिल्म में संजय दत्त ने गैंगस्टर का किरदार निभाया था. फिल्म के लास्ट सीन में वो मौत को सामने देखकर पागलों जैसी हरकतें करता है. उसका मर्डर उसकी मां रीमा लागू ही करती है. वो मां से मुक्ति देने के लिए कहता है. वो मां के हाथ में पिस्तौल देते हुए कहता है कि ‘मैं तुम्हारा बेटा हूं, मुझे छुटकारा दिला दो.’ संजय दत्त को मारने के बाद रीमा लागू के डायलॉग दिल को छू लेने वाले थे. वो कहती हैं, ‘मैंने मारा नहीं उसको. मैंने तो अपने बेटे को मुक्ति दी है. सच में मैंने उसे नहीं मारा. वो तो कब का मर गया था. आज जान निकल गई.’ यानी वास्तव फिल्म मदर इंडिया का मदर वर्जन थी.

करीब 7.5 करोड़ के बजट में वास्तव मूवी ने 20 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. फिल्म सेमी हिट रही लेकिन यूट्यूब पर इस फिल्म को खूब देखा गया. IMDB रेटिंग 8 है. फिल्म का लास्ट सीन दिल ही सबसे जयदा देखा गया. यह दिल को झकझोर देने वाला था. इस लास्ट सीन को संजय दत्त के एक्टिंग करियर का बेस्ट सीन माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में रीमा लागू ने संजय दत्त की मां का रोल निभाया था जबकि वो उम्र में सिर्फ एक साल बड़ी थीं.