The legendary glory of the Tamasa river is disappearing amidst sewer pollution; the administration is unable to find land for a sewage treatment plant (STP) : Uttar Pradesh News
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Azamgarh Latest News : आजमगढ़ की जीवनरेखा मानी जाने वाली तमसा नदी तेजी से प्रदूषण की गिरफ्त में है. शहर का सीवर और गंदा पानी बिना शोधन के नदी में गिर रहा है. एनजीटी की सख्ती और जुर्माने के बावजूद हालात नहीं सुधरे. सीमित क्षमता वाला एसटीपी नाकाफी साबित हो रहा है, जिससे तमसा का अस्तित्व संकट में है.
आजमगढ़: यूपी के आजमगढ़ जनपद से होकर बहने वाली तमसा नदी लगातार प्रदूषण का शिकार होती जा रही है. शहर के कई हिस्सों से निकलने वाला सीवर और गंदा पानी बिना किसी शोधन के सीधे नदी में गिर रहा है. इससे न केवल नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है. तमसा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने हाल ही में सख्त रुख अपनाया था. एनजीटी ने इस मामले में आजमगढ़ नगर पालिका को जिम्मेदार ठहराते हुए निर्देश जारी किए और जुर्माना भी लगाया. इसके बावजूद नदी को प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में कोई ठोस और प्रभावी कदम अब तक उठता नहीं दिख रहा है.
शहर के सीवर का पानी सीधे नदी में गिर रहा
आजमगढ़ शहर को तीन तरफ से घेर कर बहने वाली तमसा नदी में अधिकांश सीवर का पानी नालों के माध्यम से सीधे गिर रहा है. बिना किसी ट्रीटमेंट के यह गंदा पानी नदी में मिलकर जल को अत्यधिक दूषित कर रहा है. कई स्थानों पर नाले खुले रूप में नदी से जुड़ते हैं, जिससे स्थिति और भी भयावह हो जाती है.
8 एमएलडी का एसटीपी साबित हो रहा नाकाफी
शहर से सटे पटकौली गांव में 42 करोड़ रुपये की लागत से 8 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है. यह एसटीपी वर्तमान में संचालित भी हो रहा है और इसे जल निगम नगरीय द्वारा नगर पालिका को हैंडओवर किया जा चुका है. लेकिन इसकी क्षमता इतनी कम है कि यह शहर के केवल लगभग एक तिहाई हिस्से के सीवर के पानी को ही शोधित कर पा रहा है.
बड़े मोहल्ले अब भी एसटीपी से बाहर
शहर के मुख्य और घनी आबादी वाले इलाके जैसे सिविल लाइन, मड़या, सिधारी, हरबंशपुर, नरौली और सरफुद्दीनपुर अभी तक इस एसटीपी से नहीं जुड़ सके हैं. इन क्षेत्रों से निकलने वाला सीवर का पानी सीधे नालों के जरिए तमसा नदी में गिर रहा है. इससे नदी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है.
दो नए एसटीपी की जरूरत पर सहमति
तमसा नदी में गिरने वाले गंदे नालों को रोकने और उनका शोधन करने के लिए प्रशासन ने दो नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आवश्यकता जताई है. जिलाधिकारी द्वारा जल निगम नगरीय को इस संबंध में निर्देश भी दिए गए थे ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके.
भूमि न मिलने से अटका एसटीपी का काम
जल निगम नगरीय की ओर से हथिया और नरौली क्षेत्र में एक-एक हेक्टेयर भूमि की मांग करते हुए प्रशासन को पत्र लिखा गया है. लेकिन अब तक इन दोनों स्थानों पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है. भूमि न मिलने के कारण नए एसटीपी के निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है.
स्थायी समाधान की मांग तेज
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो तमसा नदी पूरी तरह नाले में तब्दील हो सकती है. जरूरत है कि प्रशासन, नगर पालिका और जल निगम मिलकर तेजी से नए एसटीपी का निर्माण कराएं ताकि तमसा नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखा जा सके.