OPINION: क्या बॉलीवुड के लिए सफलता का ‘शॉर्टकट’ बन गई हैं पुरानी फिल्में

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नई दिल्ली. आज के दौर में यदि आप सिनेमाघर के बाहर लगे पोस्टर्स पर नजर डालें, तो आपको ‘2’, ‘3’ या ‘रिबूट’ जैसे शब्द सबसे ज्यादा दिखाई देंगे. बॉर्डर 2, स्त्री 2 और भूल भुलैया 3 ये महज फिल्में नहीं हैं, बल्कि बॉलीवुड का वह नया ‘कमाऊ मंत्र’ हैं जिसे ‘सीक्वल कल्चर’ कहा जाता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सीक्वल्स वाकई अपनी कहानी के दम पर हिट हो रहे हैं, या फिर ये दर्शकों की पुरानी यादों को भुनाने का एक तरीका मात्र हैं?

पुरानी यादें, नई कमाई
बॉलीवुड में सीक्वल की सफलता का सबसे बड़ा स्तंभ ‘नॉस्टेल्जिया’ है. जब दर्शक गदर 2 या बॉर्डर 2 देखने जाता है, तो वह केवल एक फिल्म देखने नहीं जाता, बल्कि वह अपने बचपन या जवानी के उन पलों को दोबारा जीना चाहता है जब उसने पहली बार ‘तारा सिंह’ या ‘मेजर कुलदीप सिंह’ को देखा था. सनी देओल की गदर 2 ने साबित कर दिया कि अगर फिल्म की जड़ें दर्शकों के इमोशन्स से जुड़ी हों, तो वह बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार कर सकती है. इसी फॉर्मूले को अब 2026 में बॉर्डर 2 और मर्दानी 3 के जरिए दोहराने की तैयारी है.

रिस्क कम, रिटर्न ज्यादा
एक फिल्ममेकर के लिए नई कहानी और नए किरदारों को स्थापित करना एक बड़ा जोखिम होता है. वहीं, सीक्वल के साथ उन्हें एक ‘बना-बनाया आधार’ मिल जाता है. निर्देशक जानते हैं कि स्त्री की हॉरर-कॉमेडी या धूम का एक्शन दर्शकों को पहले से पसंद है. ऐसे में मार्केटिंग का आधा काम तो फिल्म के नाम से ही हो जाता है.

स्त्री 2 (2024): इस फिल्म ने 800 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस करके यह साबित किया कि ‘यूनिवर्स’ (जैसे- मैडॉक हॉरर यूनिवर्स) बनाने से दर्शकों की दिलचस्पी कई गुना बढ़ जाती है.

धुरंधर (2025): रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ की सफलता ने ‘धुरंधर 2’ का रास्ता खोल दिया है, जो 2026 की सबसे बड़ी फिल्मों में गिनी जा रही है.

जब ‘ब्रांड वैल्यू’ पर भारी पड़ी ‘खराब स्क्रिप्ट’
सीक्वल का मतलब हमेशा गारंटीड सफलता नहीं होता. बॉलीवुड का इतिहास ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां बड़ी फ्रेंचाइजी होने के बावजूद फिल्में औंधे मुंह गिरीं. बागी 4 और हाउसफुल 5 जैसी फिल्मों ने हाल ही में यह सबक सिखाया कि आप सिर्फ नाम के सहारे दर्शकों को थिएटर तक नहीं खींच सकते. यदि कहानी में नयापन नहीं है, तो दर्शक इसे खारिज कर देते हैं. राधे या सत्यमेव जयते 2 इसके जीते-जागते उदाहरण हैं.

सीक्वल बनाम फ्रेंचाइजी
अब बॉलीवुड केवल सीक्वल तक सीमित नहीं है. अब दौर ‘स्पिन-ऑफ’ और ‘क्रॉसओवर’ का है.

यशराज का स्पाई यूनिवर्स: जहां टाइगर, पठान और कबीर एक-दूसरे की फिल्मों में नजर आते हैं.

रोहित शेट्टी का कॉप यूनिवर्स: सिंघम, सिंबा और सूर्यवंशी का एक साथ आना दर्शकों के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं होता.

सीक्वल्स का सबसे बड़ा साल साबित होगा 2026
साल 2026 सीक्वल्स के लिहाज से ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि इस साल कई बड़ी फिल्मों के सीक्वल्स रिलीज होने वाले हैं-

बॉर्डर 2 (23 जनवरी): यह फिल्म देशभक्ति के उस ज्वार को वापस लाने वाली है जिसने 1997 में इतिहास रचा था.

दृश्यम 3: अजय देवगन और मोहनलाल के किरदारों का अंत देखने के लिए दर्शक बेताब हैं.

धमाल 4 और हेरा फेरी 3: कॉमेडी के शौकीनों के लिए यह साल हंसी के ठहाकों से भरा होगा.

बता दें, बॉलीवुड में सीक्वल्स की सफलता का सीधा सा गणित है- विश्वास और नवीनता का मेल. दर्शक अपने पसंदीदा किरदारों को दोबारा पर्दे पर देखना चाहते हैं, लेकिन वे वही पुरानी घिसी-पिटी कहानी नहीं चाहते. यदि बॉलीवुड केवल ‘ब्रांड’ के भरोसे रहेगा, तो यह दौर जल्द ही खत्म हो जाएगा. लेकिन अगर बॉर्डर 2 या धुरंधर 2 जैसी फिल्में भावनाओं और आधुनिक सिनेमा का सही संतुलन बना पाईं, तो सीक्वल का यह स्वर्ण युग अभी कई दशकों तक जारी रहेगा.

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