मदुरै LIC ऑफिस मर्डर: 40 डेथ क्लेम का सच और बॉस की जिंदा जलाकर हत्या
Madurai Lice Office Murder Case Update: मदुरै के LIC ऑफिस में हुई एक भयावह घटना को पहले आग का हादसा बताया गया. लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी सच्चाई और भी डरावनी निकलती चली गई. जिस घटना में एक महिला अधिकारी की जलकर मौत हो गई वह कोई हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी. 40 से ज्यादा डेथ क्लेम फाइलों पर सवाल उठे. जवाब देने के बजाय आरोपी ने अपनी ही बॉस को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह कहानी सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं है, बल्कि उस मानसिकता का खौफनाक आईना है, जिसमें जवाबदेही से बचने के लिए इंसान हत्या तक कर डालता है. मदुरै के वेस्ट वेली स्ट्रीट स्थित एलआईसी ऑफिस में जो हुआ, उसने सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा और आंतरिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोपी और मृतका रोज साथ काम करते थे. भरोसा था. पद का अंतर था. लेकिन जब 40 लंबित डेथ क्लेम पर सवाल उठे, तो वही भरोसा आग में झोंक दिया गया. पुलिस भी शुरू में गुमराह रही, लेकिन एक फोन कॉल और कुछ बोतलों ने पूरी कहानी पलट दी.
क्या है पूरा मामला?
17 दिसंबर की रात एलआईसी के मदुरै कार्यालय की दूसरी मंजिल पर सीनियर ब्रांच मैनेजर ए. कल्याणी नंबी अपने केबिन में मौजूद थीं. उसी वक्त सहायक प्रशासनिक अधिकारी डी. राम ने पहले से रची गई योजना पर काम शुरू किया. कुछ ही मिनटों में पूरा ऑफिस अंधेरे और धुएं से भर गया. आग लगने की सूचना मिली. कल्याणी नंबी की मौके पर ही जलकर मौत हो गई. आरोपी खुद भी झुलसा, ताकि घटना को हादसा दिखाया जा सके. शुरुआत में पुलिस ने भी इसे एक्सीडेंट माना.
आरोपी ने कबूल किया कि फाइलें जलाने और हत्या को हादसा दिखाने की साजिश उसी की थी. (फोटो AI)
क्यों बना बॉस आरोपी की दुश्मन?
पुलिस जांच में सामने आया कि डी. राम पिछले लंबे समय से 40 से अधिक डेथ क्लेम फाइलों पर कुंडली मारकर बैठा हुआ था. बीमा एजेंट लगातार शिकायत कर रहे थे. कल्याणी नंबी ने उसे तलब किया, जवाब मांगा और चेतावनी दी कि मामला सीनियर्स तक जाएगा. यही बात आरोपी को नागवार गुजरी. उसे डर था कि जांच हुई तो उसकी नौकरी जाएगी और फाइलों का सच सामने आ जाएगा. इसी डर ने उसे हत्या की राह पर धकेल दिया.
कैसे रची गई साजिश
डी. राम ने पूरी प्लानिंग के साथ वारदात को अंजाम दिया. पहले मेन बिजली सप्लाई बंद की. फिर तमिलनाडु बिजली बोर्ड को मेल भेजा कि तकनीकी खराबी है. इसके बाद लॉबी के मुख्य शीशे वाले दरवाजे को चेन से लॉक कर दिया. अंधेरे में जब कल्याणी को शक हुआ और उन्होंने मदद के लिए आवाज लगाई, तभी आरोपी ने पेट्रोल डालकर उन्हें आग के हवाले कर दिया.
जांच में ऐसे खुली परतें
पुलिस को शक तब हुआ जब आरोपी के बयान बार-बार बदले और मौके से कुछ अहम सबूत मिले. सिर्फ एक छोटी-सी कड़ी ने पूरे केस को पलट दिया और हत्या का राज खुल गया.
- आरोपी के केबिन से पेट्रोल भरी पानी की बोतलें मिलीं.
- बाइक से पेट्रोल निकालने के लिए इस्तेमाल की गई पाइप बरामद हुई.
- मृतका ने मरने से पहले बेटे को फोन कर पुलिस बुलाने को कहा था.
- आरोपी की कहानी नकाबपोश लुटेरे वाली थ्योरी से मेल नहीं खा रही थी.
आरोपी ने कैसे खुद फंसाया जाल में
पूछताछ के दौरान डी. राम पूरी तरह टूट गया. उसने कबूल किया कि फाइलें जलाने और हत्या को हादसा दिखाने की साजिश उसी की थी. पुलिस के मुताबिक उसने अपने केबिन में भी आग लगाने की कोशिश की ताकि पूरी इमारत में हादसे का माहौल बने. लेकिन यही चाल उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गई.
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
- हत्या के आरोप में BNS की धारा 103(1).
- सबूत मिटाने की कोशिश पर धारा 238.
- अपराध की सूचना न देने पर धारा 239.
- झूठी जानकारी देने पर धारा 240.
- तमिलनाडु सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 4.
यह केस क्यों है सिस्टम के लिए चेतावनी
यह मामला सिर्फ एक अफसर की हत्या नहीं है. यह चेतावनी है कि सरकारी और अर्धसरकारी संस्थानों में लंबित फाइलें सिर्फ देरी नहीं बल्कि बड़े अपराधों की वजह भी बन सकती हैं. अगर समय रहते सवाल न पूछे जाएं, तो डर जवाबदेही को खून में बदल सकता है.