ना फ्रिज की जरूरत, ना प्रिज़र्वेटिव! सदियों से सेहत बचा रही छत्तीसगढ़ी बिजौरी, जानें रेसिपी – Chhattisgarh News

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Food Story : छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में सदियों से बनाई जा रही बिजौरी सिर्फ एक पारंपरिक व्यंजन नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर जीवनशैली का हिस्सा है. रखिया के बीज, उड़द दाल और देसी मसालों से तैयार यह स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ आज भी घर-घर में शौक से बनाया और खाया जाता है. खास बात यह है कि बिजौरी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर तेल में तलकर स्वादिष्ट रूप में परोसा जाता है.

बिजौरी बनाने की पारंपरिक रेसिपी

सबसे पहले रखिया के बीज को अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद हरी मिर्च, लहसुन और अदरक का पेस्ट तैयार किया जाता है. उड़द दाल को पानी में भिगोकर साफ करने के बाद मिक्सी में दरदरा पीस लिया जाता है. साथ ही तिल को भी अच्छी तरह साफ कर तैयार रखा जाता है.

मसालों का सही मिश्रण

अब साफ किए गए रखिया के बीज में उड़द दाल का पेस्ट और तिल मिलाया जाता है. इसमें स्वादानुसार मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, नमक, जीरा, गरम मसाला और ताजी धनिया पत्ती डाली जाती है. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि मसाले बराबर फैल जाएं.

आकार देना और सुखाने की प्रक्रिया

तैयार मिश्रण से हाथों की मदद से छोटे-छोटे गोल आकार बनाए जाते हैं. इन गोलों को सूती कपड़े पर रखकर धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है. पूरी तरह सूख जाने के बाद बिजौरी लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है.

खाने का तरीका और स्वाद

जब भी खाने की इच्छा हो, सूखी बिजौरी को तेल में तल लिया जाता है. तली हुई बिजौरी कुरकुरी और स्वादिष्ट होती है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं. कई जगह इसे यूं ही या चटनी के साथ भी परोसा जाता है.

पोषण से भरपूर देसी व्यंजन

बिजौरी प्रोटीन, फाइबर और ऊर्जा से भरपूर होती है. यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में इसे पौष्टिक आहार माना जाता है और आज भी लोग इसे पसंद करते हैं. बिजौरी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई की पहचान है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखती है. बदलते दौर में भी यह देसी व्यंजन अपनी खास जगह बनाए हुए है.

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