घुटनों पर आया बांग्‍लादेश! भारत से मांगा 2 लाख टन भुजिया चावल, पड़ोसी को 9 लाख टन चावल की है जरूरत

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नई दिल्ली. पिछले एक साल से भारत को आंखें दिखाने वाले बांग्‍लादेश आखिर घुटनों पर आ गया और अब अपना पेट भरने के लिए अनाज भेजने की गुहार लगाई है. बांग्‍लादेश में पिछले साल आई बाढ़ की वजह से चावल की कमी हो गई है और उसे 9 लाख टन चावल की जरूरत है. फिलहाल भारतीय निर्यातकों ने भी 2 लाख टन उबले चावल (उसना चावल) के निर्यात की अनुमति दे दी है.

भारतीय चावल मिलर्स और निर्यातकों ने बांग्लादेश के निजी क्षेत्र को 2 लाख मीट्रिक टन उबले चावल के आयात की ताजा अनुमति का स्वागत किया है. उनका कहना है कि इस फैसले से पूर्वी और दक्षिणी भारत के आपूर्तिकर्ताओं के लिए अतिरिक्त निर्यात के अवसर खुल गए हैं. मिलर्स ने बताया कि बांग्लादेश सरकार ने घरेलू बाजार में चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच कीमतों को स्थिर करने के लिए 232 निजी कंपनियों को 10 मार्च, 2026 तक चावल आयात करने की अनुमति दी है.

बांग्‍लादेश में अनाज की भयंकर कमी
उन्होंने कहा कि यह आवंटन ढाका की अगस्त 2025 में घोषित आयात योजना के अतिरिक्त है, जिसमें 2025-26 वित्तवर्ष में बाढ़ से फसल नुकसान के बाद स्टॉक को फिर से बनाने के लिए करीब 9 लाख मीट्रिक टन चावल आयात करने की योजना बनाई गई थी. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि बांग्लादेश पारंपरिक रूप से भारतीय चावल का स्थिर खरीदार रहा है. आंध्र प्रदेश व पश्चिम बंगाल के व्यापारी बांग्लादेश को निर्यात के मुख्य लाभार्थी हैं. नजदीकी और प्रतिस्पर्धी कीमतें भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के पक्ष में हैं.

महंगाई ने बनाया बांग्‍लादेश पर दबाव
उद्योग के जानकारों ने बताया कि बांग्लादेश में खुदरा और थोक बाजार में खासकर स्टीम चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद यह नया निजी आयात का मौका दिया गया है. जय बाबा बक्रेश्वर राइस मिल के निदेशक राहुल खेतान ने कहा कि यह फैसला घरेलू बाजार की चुनौतियों के कारण लिया गया है. बांग्लादेश सरकार द्वारा 2 लाख टन के लिए जारी नई अधिसूचना पहले से घोषित 5 लाख टन के निजी आयात योजना के अतिरिक्त है.

स्‍टीम चावल की कीमत में तेज उछाल
बांग्लादेश में खासकर स्टीम चावल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. मुझे लगता है इसी वजह से पड़ोसी देश की सरकार ने आयात की अनुमति दी है. इससे भारतीय मिलर्स को बांग्लादेश को अतिरिक्त मात्रा में चावल निर्यात करने में मदद मिलेगी. बांग्लादेश के खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, निजी आयात के लिए अनुमति दी गई पूरी मात्रा गैर-सुगंधित उबले चावल की है, जिसमें अधिकतम 5 फीसदी टूटे हुए दाने होंगे.

जमाखोरी रोकने की भी कवायद
बांग्‍लादेश सरकार ने आयातकों को चावल को मूल बोरी में बेचने और आयात, भंडारण व बिक्री का विवरण जिला खाद्य नियंत्रकों को देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके. भारतीय मिलर्स ने बताया कि बांग्लादेश ने 2025-26 वित्त वर्ष में 9 लाख मीट्रिक टन चावल आयात की योजना बनाई है, जिसमें से करीब 5 लाख टन निजी व्यापारियों के लिए और 4 लाख टन सरकारी कंपनियों से समझौते व अंतरराष्ट्रीय निविदाओं के जरिये मंगाया जाना है.

पाक से सस्‍ता भारतीय चावल
एक मिलर ने बताया कि भारत से निजी क्षेत्र की शिपमेंट साल 2025 के अंत तक ही 1.5 लाख मीट्रिक टन पार कर चुकी थी, जबकि भारतीय कंपनियों ने अक्टूबर में 50,000 टन के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा भी हासिल की. निर्यातकों के अनुसार, भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा और सबसे किफायती आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. हाल की निविदाओं में देखा गया कि भारतीय सफेद चावल की कीमत लगभग 351-360 डॉलर प्रति टन रही, जबकि पाकिस्तान की पेशकश करीब 395 डॉलर प्रति टन थी. मार्च 2025 में भारत द्वारा सभी निर्यात प्रतिबंध और न्यूनतम निर्यात मूल्य संबंधी उपाय हटाने के बाद शिपमेंट में तेजी आई और 2025 में कुल चावल निर्यात 19.4 फीसदी बढ़कर 2.15 करोड़ टन पहुंच गया.

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