सरसों के डंठल को फेंकना छोड़िए, जानिए इससे कैसे होगी अच्छी कमाई, बस इन 5 तरीकों को अपनाइए – Uttar Pradesh News

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अगर आप गांव में रहते हैं और कुछ चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो यह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं धान की भूसी से तेल निकालने जैसी कहावत की. इस समय सरसों की बुवाई हो चुकी है और कुछ ही दिनों में सरसों तैयार हो जाएगी. ऐसे में कई किसान सरसों तो रख लेते हैं, लेकिन उसका डंठल या तो जला देते हैं या फेंक देते हैं, जबकि यही डंठल उनकी कमाई का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है.

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सुल्तानपुर समेत अवध क्षेत्र में सरसों के डंठल को पिंजी कहा जाता है. यह सरसों के पौधे का सूखा हुआ भाग होता है, जो सरसों अलग करने के बाद बचता है. ऐसे में इसे ज्यादातर किसान कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, जबकि यही उनकी कमाई का जरिया बन सकता है और अच्छा मुनाफा दिला सकता है. पिंजी को ही सरसों का डंडा भी कहा जाता है, जो कई तरीकों से कमाई में फायदा देता है.

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किसान अनिल कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि अगर सरसों के डंठल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इससे झाड़ू बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है. हालांकि यह झाड़ू अस्थायी होती है, लेकिन बड़े क्षेत्रफल की सफाई के लिए यह काफी उपयोगी मानी जाती है. इसे बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति झाड़ू के हिसाब से बेचा जा सकता है.

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ग्रामीण क्षेत्रों में भूसा, उपले रखने और जानवरों को ठंड से बचाने के लिए टटिया का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में सरसों के डंठल और अरहर के डंठल के मिश्रण से टटिया बनाकर इसे बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी कीमत करीब 1000 रुपये प्रति टटिया हो सकती है.

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सरसों के डंठल को ईंट भट्ठों पर सप्लाई कर इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. दरअसल, सरसों का डंठल ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के काम आता है, क्योंकि कोयले को लपक देने के लिए यह ज्यादा कारगर होता है. बशर्ते इसकी मड़ाई की गई हो और इसे टुकड़ों में काटा गया हो. मड़ाई के बाद इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति कुंतल तक हो सकती है.

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अगर आप भी सरसों के डंठल का सही इस्तेमाल नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बताते हैं कि इससे जैविक खाद बनाई जा सकती है. जैविक खाद बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक बड़ा और कम गहराई वाला गड्ढा खोदना होगा. उसके बाद उस गड्ढे में सरसों के डंठल को डालें और इसे लगभग 3 इंच मिट्टी से ढक दें. इसके बाद हल्का पानी डाल दें। 2 से 3 महीने बाद जब आप गड्ढा खोदेंगे, तो सरसों का डंठल सड़कर जैविक खाद के रूप में तैयार हो चुका होगा.

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