क्यों मचा है वाराणसी में बन रहे महाश्मशान मणिकर्णिका कॉरिडोर पर हंगामा? समझिए क्या है पूरा प्रोजेक्ट
यह विवाद मुख्य रूप से घाट पर एक प्राचीन चबूतरा और उससे जुड़ी मूर्तियों, खासकर रानी अहिल्याबाई होल्कर से संबंधित प्रतिमाओं के कथित क्षतिग्रस्त होने के आरोपों से जुड़ा है. कुछ लोगों का दावा है कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक संरचनाओं और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे घाट का मूल आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है.
क्या है प्रोजेक्ट का उद्देश्य
मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर का यह पुनर्विकास कार्य श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की सफलता के बाद शुरू किया गया है. इसका मुख्य मकसद घाट पर भीड़भाड़ कम करना, श्रद्धालुओं और अंतिम संस्कार करने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, स्वच्छता सुधारना, सीढ़ियां मजबूत करना और मानसून में आने वाली बाढ़ की समस्याओं से निजात दिलाना है. प्रोजेक्ट में मल्टी-लेवल प्लेटफॉर्म, बेहतर एक्सेस, वुड प्लाजा और अन्य आधुनिक सुविधाओं का प्रस्ताव है, ताकि 24×7 जलने वाली चिताओं के बीच भी श्रद्धालुओं को सुविधा मिले. यह काम नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की देखरेख में चल रहा है, और इसकी कुल लागत करोड़ों में बताई जा रही है.
विवाद और राजनीतिक घमासान
विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई भी मंदिर या पूजनीय मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है. खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियां और मूर्तियां संस्कृति विभाग के संरक्षण में हैं, जिन्हें पुनर्निर्माण के बाद उसी स्थान पर या उपयुक्त जगह पर पुनः स्थापित किया जाएगा. कई वायरल तस्वीरों को एआई जनरेटेड या पुरानी/गुमराह करने वाली बताया गया है, जिसके खिलाफ पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए हैं.
CM योगी का कांग्रेस पर आरोप
इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं वाराणसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन किए, फिर प्रोजेक्ट साइट ऑफिस से विकास कार्यों का निरीक्षण किया. सीएम ने कहा कि कुछ तत्व काशी को बदनाम करने और विकास कार्यों में बाधा डालने की साजिश रच रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पर पुरानी तस्वीरों और फर्जी वीडियो से भ्रम फैलाने का आरोप लगाया, और याद दिलाया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समय भी इसी तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन अब श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है.