jharkhand traditional red chilli mustard oil chutney winter special recipe
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Red Chili Mustard Oil Chutney Recipe: सर्दियों के मौसम में अगर खाने में स्वाद और गर्माहट दोनों चाहिए, तो झारखंड की यह पारंपरिक लाल मिर्च चटनी आपके लिए बेस्ट है. लहसुन, नमक और शुद्ध सरसों तेल के साथ तैयार यह चटनी न केवल जुबान का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि ठंड के दिनों में शरीर के लिए औषधि का काम भी करती है. बिना सब्जी के भी पूरा खाना खिला देने वाले इस देसी जायके की जानें रेसिपी.

झारखंड की पारंपरिक रसोई में कुछ ऐसे देसी स्वाद हैं, जो सादगी के बावजूद अपनी तीखापन और खुशबू से खाने का मजा दोगुना कर देते हैं. इन्हीं में से एक है सूखी लाल मिर्च तेल वाली चटनी, जो खासकर सर्दियों के मौसम में घर-घर बनाई जाती है. यह चटनी न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि शरीर को अंदर से गर्म रखने में भी मदद करती है. झारखंड में इसे भात, रोटी, चूड़ा या सत्तू के साथ बड़े चाव से खाया जाता है.

सबसे पहले सामग्री की बात करें तो इसके लिए ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं होती. सूखी लाल मिर्च, सरसों का तेल, लहसुन, नमक और स्वाद के अनुसार थोड़ा-सा जीरा या सरसों के दाने पर्याप्त होते हैं. झारखंड में आमतौर पर देसी सूखी लाल मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी खुशबू और तीखापन अलग ही होता है.

चटनी बनाने की विधि बेहद आसान है. सबसे पहले सूखी लाल मिर्च को हल्की आंच पर बिना तेल के तवे पर सेक लिया जाता है. ध्यान रखें कि मिर्च जले नहीं, बस इतनी भुन जाए कि उसकी खुशबू आने लगे. इसके बाद मिर्च को ठंडा होने के लिए रख दें. अब सिल-बट्टे या मिक्सर जार में भुनी हुई मिर्च डालें, उसमें छीले हुए लहसुन की कलियां, स्वादानुसार नमक और थोड़ा-सा जीरा या सरसों डालकर दरदरा पीस लें. झारखंड में आज भी ज्यादातर लोग इसे सिल-बट्टे पर पीसना पसंद करते हैं, जिससे इसका देसी स्वाद और भी निखरकर आता है.
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अब बारी आती है सरसों के तेल की. एक कड़ाही में सरसों का तेल डालकर उसे अच्छी तरह से गर्म करें, जब तेल से हल्का धुआं उठने लगे तो आंच बंद कर दें. इसके बाद पिसी हुई मिर्च का मिश्रण एक कटोरी में निकालें और उसके ऊपर गरम-गरम सरसों का तेल डाल दें. चाहें तो ऊपर से थोड़ा सा कटा हुआ लहसुन भी डाल सकते हैं. इससे चटनी की खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं.

यह चटनी सर्दियों में खास तौर पर इसलिए खाई जाती है क्योंकि लाल मिर्च और सरसों का तेल शरीर को गर्म रखते हैं, सर्दी-जुकाम से बचाव में मदद करते हैं और पाचन शक्ति को भी मजबूत बनाते हैं. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में इसे रोजमर्रा के खाने का हिस्सा माना जाता है.