Magh Gupt Navratri 2026 know ghatasthapana muhurat puja vidhi | माघ गुप्त नवरात्रि 2026 प्रारंभ, शुभ योग में ऐसे करें मां दुर्गा का पूजन, जानें महत्व और घटस्थापना का शुभ समय

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Magh Gupt Navratri 2026: माघ मास की गुप्त नवरात्रि 19 जुलाई दिन सोमवार से शुरू हो रहे हैं और इन नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा अर्चना की जाती है. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है. साल में 4 नवरात्रि आती हैं, जिनमें दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं, पहली आषाढ़ माह में और दूसरी माघ माह में. माघ नवरात्रि हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है. इस नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य आत्मिक शुद्धि, साधना और मंत्र जाप माना गया है. गुप्त नवरात्रि की पूजा बाहरी उत्सव और दिखावे से दूर रहकर, एकांत और गुप्त साधना के रूप में की जाती है। इसी कारण इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है.

गुप्त नवरात्रि का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस नौ दिवसीय पर्व में सच्चे मन से देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की उपासना करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. इसके साथ ही विशेष कामों में शीघ्र सफलता भी मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. गुप्त नवरात्रि का नाम भले ही गुप्त हो, लेकिन इसका महत्व अत्यंत गहरा, रहस्यमय और शक्तिशाली माना जाता है. यह पर्व विशेष रूप से साधकों, तांत्रिकों, योगियों और शक्ति उपासकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है.

गुप्त नवरात्रि 19 जुलाई 2026
साल 2026 में गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होकर 27 जनवरी तक चलेगी. वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी को देर रात 1 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 20 तारीख को 2 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि को मानते हुए गुप्त नवरात्रि के पहले दिन की पूजा 19 जनवरी दिन सोमवार से होगी.

घटस्थापना का शुभ समय
घटस्थापना का सबसे शुभ समय प्रातः 7 बजकर 14 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक. इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक भी घटस्थापना की जा सकती है.

गुप्त नवरात्रि 2026 शुभ योग
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. यह योग दिन में 11 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगा. इस दिन मां दुर्गा की पूजा करने से सुख, सौभाग्य और जीवन की हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. इस नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य केवल देवी की पूजा ही नहीं, बल्कि एकांत साधना, मंत्र जाप और ध्यान भी है. कहा जाता है कि शांत और निजी साधना अधिक प्रभावशाली और फलदायी होती है.

गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा
माघ गुप्त नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. पहले दिन मां काली, दूसरे दिन मां तारा, तीसरे दिन मां त्रिपुरसुंदरी, चौथे दिन मां भुवनेश्वरी, पांचवें दिन मां छिन्नमस्तिका, छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी, सातवें दिन मां धूमावती, आठवें दिन मां बगलामुखी, नौवें दिन मां मातंगी और दसवें दिन मां कमला की आराधना की जाती है. इन नौ दिनों में भक्तों को संयम, उपवास और साधना का पालन करना चाहिए, जिससे मन और आत्मा की शुद्धि होती है.

गुप्त नवरात्रि पूजा विधि
ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें और हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लें कि ‘मैं अमुक व्यक्ति, देवी की कृपा एवं आत्मशुद्धि के लिए नवरात्रि व्रत व पूजा करता/करती हूं.’ इसके बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और देवी की प्रतीमा या तस्वीर की स्थापना करें. इसके बाद एक कलश में जल, सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते रखें और नारियल स्थापित करें और कलश को देवी शक्ति का प्रतीक मानें. देवी दुर्गा, काली, चामुंडा या अपनी इष्ट देवी का ध्यान करें और हाथ जोड़कर ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः मंत्र का उच्चारण करें. फिर देवी को अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य (फल, मिठाई या सात्विक भोजन) अर्पित करें. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे या ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का 108 बार जप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. अंत में देवी की आरती करें और पूजा में हुई भूल-चूक के लिए देवी मां से क्षमा याचना करें.

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