7 साल की बच्ची से ऐसी हैवानियत, सुनकर सिहर जाएंगे आप, 43 दिन में कोर्ट ने सुना दी फांसी की सजा

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Agency:एजेंसियां

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गुजरात के राजकोट जिले में 7 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई क्रूरता ने पुलिस से लेकर अदालत को भी झकझोर कर रखा दिया. बलात्कार के मामले में 43 दिनों के अंदर सुनवाई पूरी करते हुए कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई है.

7 साल की बच्ची से हैवानियत, सुनकर सिहर जाएंगे आप, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजाराजकोट की विशेष अदालत ने घटना के 43 दिन के अंदर ही फैसला सुनाते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई.

गुजरात के राजकोट जिले में 7 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई क्रूरता और बलात्कार के मामले में दोषी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. इस बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने पुलिस से लेकर अदालत को भी झकझोर कर रखा दिया. स्पेशल कोर्ट के जज वीए राणा ने घटना के महज 40 दिन के अंदर ही फैसला सुनाया और POCSO केस में दोषी 30 वर्षीय रामसिंह तेरसिंह डुडवा को फांसी की सुनाई दी. रामसिंह मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का निवासी है.

यह भयावह घटना 4 दिसंबर 2025 की है. राजकोट जिले के अटकोट के पास स्थित कांपर गांव में पीड़ित बच्ची अपने भाई-बहनों के साथ खेल रही थी. इसी दौरान मोटरसाइकिल से वहां पहुंचे रामसिंह ने बच्ची को जबरन उठाया और उसे पास के एक पेड़ के पास ले गया. वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसके निजी अंगों में करीब 5 इंच लंबी लोहे की रॉड डाल दी. बच्ची की चीख-पुकार सुनकर पास के कमरे में मौजूद उसकी बुआ मौके पर भागी-भागी पहुंचीं, लेकिन तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुका था.

बेहद नाजुक हालत में मिली बच्ची

बुआ ने बच्ची को बेहद गंभीर अवस्था में पाया, जहां उसके शरीर बेहद ज्यादा खून बह रहा था. उन्होंने तुरंत बच्ची के पिता को सूचना दी और एंबुलेंस के जरिये उसे कांपर गांव के सरकारी अस्पताल पहुंचाया. बच्ची की हालत नाजुक होने के कारण उसे पहले जसदान सरकारी अस्पताल और फिर रात करीब 9 बजे राजकोट के महिला अस्पताल रेफर किया गया. भारी खून बहने के चलते डॉक्टरों को सर्जरी करनी पड़ी और काफी मशक्कत के बाद बच्ची की हालत स्थिर की जा सकी.

पुलिस की गिरफ्त में कैसे आया रामसिंह?

पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. शुरुआती जांच में कोई चश्मदीद सामने नहीं आया, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों के सहारे आरोपी को पकड़ने पर फोकस किया. पुलिस ने चार दिनों बाद 8 दिसंबर को संदेह के आधार पर रामसिंह को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर कांपर गांव में एक पेड़ के नीचे से खून से सनी लोहे की रॉड बरामद की गई. फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और आरोपी के सिर के बाल भी एकत्र किए.

कैसे खुले रामसिंह के गुनाहों के राज़?

फॉरेंसिक जांच में बरामद बाल आरोपी रामसिंह के ही पाए गए, जबकि लोहे की रॉड पर मिला खून पीड़िता से मेल खा गया. इसके अलावा पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से यह पुष्टि हुई कि घटना के समय आरोपी कांपर गांव में ही मौजूद था.

पुलिस ने महज 11 दिनों में जांच पूरी कर 15 दिसंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की. फिर 12 जनवरी को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया. सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद विशेष अदालत ने इस मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ की श्रेणी में रखते हुए 17 जनवरी मौत की सजा सुना दी.

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Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें

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