story how cashkaro app is launched in market

Share to your loved once


Last Updated:

लंदन की नौकरी छोड़ इस कपल भारत में बिजनेस शुरू किया.शुरुआत में 3 लाख की लागत से इस बिजनेस का आगाज किया. बिजनेस आइडिया इतना शानदार था कि देश के जाने माने उद्योगपति रतन टाटा ने इनके बिजनेस में इन्वेस्टमेंट किया आज कंपनी का सलाना टर्नओवर 250 करोड़ है.

गौहर/दिल्ली: कभी किसी शायर ने कहा था कि प्यार में आदमी कुछ भी कर गुजरता है. ऐसा ही कुछ करके दिखाया है, स्वाति भार्गव और रोहन भार्गव नाम के एक कपल ने पहली बार लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में मिले थे और फिर वहीं से 2008 में उनके प्यार की शुरुआत हो गई थी. जिसके बाद 2009 में उन्होंने शादी कर ली और फिर अपनी अच्छी खासी नौकरियों को छोड़कर भारत में आकर उन्होंने अपना बिजनेस शुरू कर लिया.

इनके बिजनेस को आज लोग कैशकरो (CashKaro) के नाम से जानते हैं. जिसकी शुरूआत इन्होंने 2013 में की थी. इनके इस बिजनेस में हमारे देश के जाना पहचाना नाम रतन टाटा भी निवेश कर चुके हैं. इनके इस बिजनेस ने FY23 में 250 करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू बनाया है. इन्होंने इस बिजनेस की शुरुआत महज कुछ लाख रुपए से की थी, जोकि इन्होंने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से जुटाए थे.

दोनों को कैसे हुआ प्यार
स्वाति ने बताया कि वह दोनों लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स में पढ़ते थे और एक दिन उन्हें मालूम चला कि उनके दोस्तों को कोई अपने घर बुलाकर इंडियन खाना बनाकर खिला रहा है. तभी उन्होंने भी यह तय कर लिया कि वह भी जाकर इंडियन के हाथ से बना हुआ खाना खाएंगी और वह इंडियन रोहन ही थे. जिसके बाद उनकी अच्छी दोस्ती हुई और काफी देर तक वह एक फ्लैट में भी रहे. जिसके बाद वह रिलेशनशिप में आए और उसके बाद उन्होंने शादी कर ली.

आसान बिजनेस मॉडल
आपको बता दे कि कैशकरो के माध्यम से दूसरी साइट्स (एमजॉन, स्नैपडील, जबॉन्ग, पेटीएम आदि) से शॉपिंग करते हैं, तो यह साइट आपको कैशबैक देती है. साथ ही, जिस वेबसाइट से आइटम खरीद रहे हैं, वह भी आपको डिस्काउंट देती है. इस तरह से आपको डबल फायदा होता है. लेकिन सवाल है कि कैशकरो की कमाई कहां से होती है? दरअसल, कस्टमर मिलने पर ई-कॉमर्स साइट्स कैशकरो को कमीशन देती है. इस कमीशन का बड़ा हिस्सा कस्टमर्स को दे देते हैं. इसे आप यूं भी समझ सकते हैं कि कैशकरो को अपने रिटेल पार्टनर से 5-10 फीसदी कमीशन प्राप्त होता है. वह इस लाभ को अपने उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं. इसका फायदा सभी पार्टियों को होता है.

कैशकरो नाम की वजह
स्वाति ने बताया कि कैशकरो नाम रोहन ने ही रखा है और उसके बाद रोहन का यह कहना था, कि उन्होंने यह नाम इंडियन टच की वजह से रखा है. क्योंकि इसमें आधा नाम इंग्लिश और आधा हिंदी है और यही उनकी सोच भी थी कि मेट्रो सिटीज के साथ-साथ वह रूरल एरियाज को भी टच करें. आईपीओ की बात पर रोहन का कहना था कि उन्हें अगले करीबन 2 से 3 साल लगेंगे आईपीओ तक पहुंचने में. इसके लिए उनकी टीम काम कर रही है.

homebusiness

लक्ष्मी बनकर आई गर्लफ्रेंड…शादी के बाद खुली किस्मत, 3 लाख से शुरू की कंपनी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP