Kachnar Phool Pakori: ठंड में केवल 3 महीने ही बनती है गुलाबी कचनार की पकौड़ी, बिहारी रेसिपी, लाजवाब स्वाद! – Bihar News
मधुबनी. ठंड का मौसम चल रहा है और इन दिनों अगर आप कुछ गर्म और नयी डिश ट्राई करना चाहते हैं, तो ये इस फूल की यह रेसिपी ट्राई कर सकते हैं. मिथिला में एक फूल है, जो केवल ठंड के समय में होता है – कचनार. इसे पूजा में इस्तेमाल करने के अलावा यहां पकौड़े और सब्जी बनाकर भी लोग खाते हैं. खाने में यह काफी स्वादिष्ट होता है, साथ ही सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है.
स्वाद और सेहत दोनों अच्छे
मिथिलांचल के लोग पकौड़े, जिसे आम भाषा में तरुआ कहते हैं, बड़ी मात्रा में खाते हैं. वह भी जब मौसम ठंड का चल रहा हो, तो इस मौसम में कुछ चटपटा ना खाया जाए, ऐसा कैसे हो सकता है. दरअसल, आज हम आपको एक ऐसे फूल का तरुआ बता रहे हैं, जो साल में सिर्फ तीन महीने ही मिलता है. या यूं कहें कि ठंड के मौसम में ही यह अनोखा फूल का तरुआ खाने को मिलता है, जो स्वाद भी बढ़ाता है और सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है.
बगिया या सड़क किनारे लगता है
मिथिलांचल में आपको सड़क किनारे या बगिया में कचनार का फूल दिख जाएगा, जो शोभा भी बढ़ाता है. पूजा में भी इसका उपयोग होता है और लोग इसका पकौड़ा भी खाते हैं. बता दें कि यह पकौड़ा बहुत ही स्वादिष्ट लगता है और इस फूल का रंग पिंक होता है. कचनार फूल का पकौड़ा कैसे बनाया जाता है, यह भी जान लीजिए.
इसके लिए आप बेसन का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर चावल के आटे का घोल, जिसे पीठार कहते हैं, उसका भी इस्तेमाल किया जा सकता है. बेसन में नमक, हल्दी और मिर्च पाउडर मिलाकर घोल तैयार करें. फूल को उसमें डुबोकर तेल में फ्राई करें. यह खाने में बहुत स्वादिष्ट और क्रंची होता है.
सेहत के लिए भी अच्छा
इसे आप अपने किसी अतिथि को भी खिला सकते हैं या खुद भी चावल, दाल, रोटी के साथ खा सकते हैं. वहीं, शाम की चाय के साथ नाश्ते में भी अगर आप ये पकौड़े खाएं, तो स्वाद और बढ़ जाता है. ग्रामीण महिलाएं बताती हैं कि यह सेहत के लिए भी अच्छा होता है. क्योंकि ठंड के मौसम में बीपी लेवल के बढ़ने-घटने की आशंका रहती है, ऐसे में फूल का पकौड़ा खाने से बीपी मेंटेन रहता है. यही वजह है कि लोग यहां इसे बड़ी मात्रा में खाते हैं.
बासी फूल के पकौड़े
कई लोग तो पूजा में ईश्वर को चढ़ाने के बाद जब अगले दिन यह फूल बासी हो जाता है, तब भी इसका इस्तेमाल पकौड़े बनाने में करते हैं. जनवरी ठंड का महीना है और यह फूल दिसंबर, जनवरी और फरवरी तक मिलता है. इसके बाद जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, यह फूल खिलना भी बंद हो जाता है.