लो रसमलाई खाओ… दिखा-दिखाकर राज ठाकरे को क्यों ललचा रहे बीजेपी वाले? साउथ के अन्ना वाली क्या है वो कहानी

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धमकी का अंत, महाविजय का आरंभ मुंबई की सड़कों पर जब राज ठाकरे ने दहाड़ते हुए भाजपा के कद्दावर नेता के. अन्नामलाई को ‘दक्षिण से आई रसमलाई’ कहकर उनका मजाक उड़ाया और ‘हाथ-पैर तोड़ने’ की सरेआम धमकी दी तो लगा था कि ठाकरे बंधुओं का क्षेत्रीय कार्ड एक बार फिर मुंबई को बंधक बना लेगा. उद्धव ठाकरे के कंधे से कंधा मिलाकर राज ने जिस नफरत और अहंकार की स्क्रिप्ट लिखी थी उसे मुंबई की जागरूक जनता ने बीएमसी चुनाव के नतीजों के साथ ही कूड़ेदान में फेंक दिया है. अब बीजेपी सांसदों पीसी मोहन और तेजस्वी सूर्या ने राज ठाकरे पर ‘रसमलाई’ वाला तंज कसा. सांसद पीसी मोहन ने X पर ‘रसमलाई’ की तस्वीरें शेयर कीं और लिखा: “कुछ रसमलाई ऑर्डर की हैं. अन्नामलाई की तरफ से भी ठाकरे बंधुओं को करारा जवाब दिया गया.

बीजेपी ने हिंसा की धमकियों का जवाब ‘वोट की चोट’ से दिया और मुंबई के किले में ऐसी सेंध लगाई कि ठाकरे बंधुओं की राजनीतिक बिसात ही उलट गई. भाजपा ने न केवल बीएमसी पर कब्जा किया बल्कि जीत के बाद विरोधियों को ‘रसमलाई’ खिलाकर उनके उस ‘अहंकारी अपमान’ का ऐसा मीठा बदला लिया कि आज पूरी शिवसेना (UBT) और मनसे सन्न है. अन्नामलाई का पलटवार अब सोशल मीडिया पर आग लगा रहा है, “मुंबई ने नफरत की पुंगी नहीं, विकास का डंका बजाया है!

अन्नामलाई के प्रहार और महायुति की जीत

1. मुंबई की जनता का स्पष्ट जनादेश: अन्नामलाई ने अपनी पोस्ट में साफ कहा कि मुंबई के लोगों ने विकास और सुशासन के पक्ष में वोट दिया है. महायुति की यह जीत ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर है.

2. ‘रसमलाई’ वाले तंज पर चुप्पी तोड़ता जवाब: उद्धव गुट की ओर से अन्नामलाई को बाहरी बताकर अपमानित किया गया था. अन्नामलाई ने बिना नाम लिए बताया कि मुंबई ने नफरत की भाषा बोलने वालों को किनारे लगा दिया है.

3. क्षेत्रीय राजनीति और भाषाई बंटवारा फेल: अन्नामलाई ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि वे मुंबई के लोगों को भाषाई और क्षेत्रीय आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन 21वीं सदी की जनता ने इसे सिरे से खारिज कर दिया.

4. पीएम मोदी के विजन की जीत: उन्होंने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व एकनाथ शिंदे के कुशल प्रशासन को दिया, जो बुनियादी ढांचे और रोजगार पर केंद्रित रहा.

5. धमकी का जवाब लोकतंत्र से: हाथ-पैर तोड़ने की धमकी देने वालों को अन्नामलाई ने याद दिलाया कि लोकतंत्र में जनता का वोट सबसे बड़ा जवाब होता है. मुंबई ने एकता और प्रगति को चुना है.

6. पुरानी राजनीति का अंत: अन्नामलाई के अनुसार, विपक्ष का क्षेत्रीय दुश्मनी वाला नैरेटिव एक पुरानी सड़ी-गली रणनीति थी, जिसे मुंबई के जागरूक मतदाताओं ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है.

7. इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की नई बेंचमार्क: इस जीत के साथ ही मुंबई अब इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और नागरिक कल्याण के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने के लिए तैयार है.

जब ‘कटाक्ष’ चुनावी हार का कारण बन जाए
राजनीति में भाषा की मर्यादा अक्सर सत्ता की चाबी छीन लेती है. उद्धव ठाकरे के मंच से अन्नामलाई को ‘रसमलाई’ कहना और उन्हें शारीरिक चोट पहुंचाने की धमकी देना, शायद मराठी मानुस और मुंबई के जागरूक मतदाताओं को पसंद नहीं आया. मुंबई एक कॉस्मोपॉलिटन शहर है, जहां उत्तर से दक्षिण तक के लोग बसते हैं. अन्नामलाई जैसे शिक्षित और पूर्व आईपीएस अधिकारी को उनके मूल के आधार पर निशाना बनाना विपक्ष की संकीर्ण सोच को दर्शाता है. अन्नामलाई ने इस अपमान को ‘चुनावी ईंधन’ बनाया. उन्होंने खुद पर हुए निजी हमले का जवाब देने के बजाय मुंबई के विकास के मुद्दों पर बात की. फडणवीस और शिंदे के साथ मिलकर भाजपा ने विकास का जो खाका खींचा, उसने विपक्ष के ‘क्षेत्रीय और भाषाई कार्ड’ को फेल कर दिया. यह जीत संकेत है कि अब वोटर ‘भावनात्मक नारों’ के बजाय ‘ठोस शासन’ (Substance) को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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