भारत फ्रांस से 114 राफेल खरीदेगा, मेक इन इंडिया को बढ़ावा

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भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या और पड़ोसी देशों से मिल रही चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को विराट रूप देने का फैसला किया है. शुक्रवारको रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) ने फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये ($39 बिलियन) की यह डील भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बनने जा रही है. यह केवल विमानों की खरीद नहीं है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत को वैश्विक एयरोस्पेस हब बनाने की दिशा में एक महा-कदम है.

क्यों राफेल ही बना भारत की पहली पसंद?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 जैसे प्रस्तावों के बावजूद भारत का राफेल की ओर मुड़ना एक ‘रणनीतिक’ और ‘प्रौद्योगिकी भरोसा’ दोनों है. राफेल पहले से ही भारतीय वायुसेना में शामिल है, जिससे पायलटों की ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस का बुनियादी ढांचा पहले से तैयार है. नए विमान खरीदने पर लॉजिस्टिक खर्च कम होगा. इसके अलावा, फ्रांस ने भारत को ‘सोर्स कोड’ और तकनीक हस्तांतरण पर जो लचीलापन दिखाया है, वह अन्य देशों से मिलना मुश्किल था. यह सौदा भारत को न केवल लड़ाकू विमानों में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि भविष्य में भारत को राफेल का ग्लोबल एक्सपोर्ट हब भी बना सकता है.

114 राफेल डील की 7 सबसे बड़ी बातें

1. वायुसेना की मारक क्षमता में भारी इजाफा: वर्तमान में वायुसेना के पास 36 राफेल हैं. 114 नए विमानों के आने के बाद राफेल की कुल संख्या 150 (IAF) + 26 (Navy) = 176 हो जाएगी, जो किसी भी दुश्मन के लिए काल साबित होंगे.

2. ‘मेक इन इंडिया’ का नया अध्याय: इस डील के तहत 12 से 18 विमान फ्रांस से सीधे ‘रेडी-टू-फ्लाई’ स्थिति में आएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में ही टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ मिलकर किया जाएगा.

3. टाटा-डसॉल्ट की हैदराबाद जुगलबंदी: हैदराबाद में टाटा का अत्याधुनिक प्लांट राफेल के मुख्य हिस्सों (Fuselage) का निर्माण करेगा. वित्त वर्ष 2028 तक यहां से पहला स्वदेशी ढांचा निकलने की उम्मीद है.

4. 60% स्वदेशीकरण का लक्ष्य: शुरुआत में 30% स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 60% तक किया जाएगा. इसमें इंजन का रखरखाव (MRO) और हथियारों का एकीकरण शामिल है.

5. ऑपरेशन सिंदूर का असर: रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल ने चीनी PL-15 मिसाइलों को अपने ‘स्पेक्ट्रा’ इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से मात दी, जिसने इस डील की राह और आसान कर दी.

6. फरवरी में मैक्रों का दौरा और हस्ताक्षर: प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फरवरी 2026 में होने वाली मुलाकात के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है.

7. स्क्वाड्रन की कमी होगी दूर: वायुसेना की स्वीकृत क्षमता 42.5 स्क्वाड्रन की है, जो घटकर 29 पर आ गई थी. 114 राफेल आने से वायुसेना को 6 नई स्क्वाड्रन मिलेंगी, जिससे गैप काफी हद तक भर जाएगा.

सवाल-जवाब

1. 114 राफेल डील की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
इस सौदे की कुल लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 39 बिलियन डॉलर) होने का अनुमान है.

2. भारत में राफेल विमानों का निर्माण कौन सी कंपनी करेगी?
फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के साथ मिलकर हैदराबाद में इन विमानों के ढांचों का निर्माण करेगी.

3. इस डील के तहत कितने विमान ‘फ्लाई-अवे’ (तैयार) स्थिति में आएंगे?
प्रस्ताव के अनुसार, 12 से 18 विमान फ्रांस से सीधे तैयार होकर आएंगे, जबकि शेष 96-102 विमान भारत में असेंबल किए जाएंगे.

4. भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में कितने राफेल विमान हैं?
वायुसेना वर्तमान में 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है, जो अंबाला और हाशिमारा बेस पर तैनात हैं.

5. राफेल मरीन (Rafale-M) क्या है?
यह राफेल का नौसैनिक संस्करण है. भारत ने पिछले साल नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों का सौदा किया था, जिन्हें आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा.

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