फंस गई पटना पुलिस, एक पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हिला बिहार, NEET छात्रा की मौत पर पूर्व DGP ने रगड़ दिया | patna neet student post mortem report | patna neet student sexual assault exposed | bihar police theory | bihar ex dgp abhayanand exclusive statement
‘Sexual violence can not be ruled out’ : जहानाबाद की 18 साल की नीट छात्रा की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, इस रिपोर्ट ने बिहार पुलिस की नींद उड़ा दी है. छात्रा के साथ सेक्सुअल असॉल्ट से अब कम से कम इनकार नहीं किया जा सकता. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे बिहार को हिला दिया है. खासकर पटना पुलिस और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा की वह थ्योरी अब सवालों के घेरे में आ गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लड़की ने सुसाइड किया है. जबकि, छात्रा की मौत के बाद परिजन लगातार कहते रहे कि उनकी बच्ची के साथ रेप की घटना हुई है. लेकिन पटना पुलिस के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी इसे खारिज करते रहे. अब पटना पुलिस की नींद की गोली और सुसाइड वाली थ्योरी पर बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
अभयानंद ने जो बात कही है, उससे पटना पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है. खासकर पटना एसएसपी का नींद और मोबाइल वाला थ्योरी क्या सही था? या फिर एसएसपी को गलत जानकारी दी गई? एसएसपी ने नींद की गोली, मोबाइल में सुसाइड सर्च वाली थ्योरी क्यों बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट आए बोल दिया? क्या पटना पुलिस को छात्रा के शरीर पर चोट के निशान नजर नहीं आए? क्या उस अस्पताल और डॉक्टरों की मान्यता या डिग्री रद्द नहीं होनी चाहिए, जिसने गुमराह किया?
वह मेधावी छात्रा, जिसने नीट की पहली ही परीक्षा में अपनी काबिलियत साबित कर दी थी. उसे बीडीएस की सीट मिल रही थी, वह डॉक्टर बन सकती थी. लेकिन उसके हौसले बुलंद थे और वह एमबीबीएस डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करनी थी. इसी सपने को पूरा करने के लिए उसने एक और साल मेहनत करने का फैसला किया और पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर पढ़ाई शुरू की. लेकिन अफसोस उसकी मेहनत और सपनों के बीच सिस्टम का वो दानव आ गया, जो आज मासूम बेटियों को निगल रहा है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए हैं?
पटना पुलिस बन गई ‘धृतराष्ट्र’
घटना के दिन से उस छात्रा की मौत के दिन तक पटना पुलिस और अस्पतालों में मौजूद डॉक्टरों ने अपनी पूरी ताकत इस बात को साबित करने में लगा दी कि यह एक साधारण आत्महत्या की घटना है. पटना एसएसपी के उस बयान ने सबको चौंका दिया, जिसमें उन्होंने बिना किसी ठोस जांच के कह दिया कि लड़की ने नींद की गोलियां अधिक मात्रा में खा ली थीं. पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने तर्क दिया कि लड़की के मोबाइल सर्च हिस्ट्री में ‘सुसाइड’ से जुड़े शब्द मिले हैं. यह थ्योरी इतनी तेजी से फैलाई गई कि मानो सिस्टम ने पहले ही तय कर लिया था कि सच को दफन कर देना है.
लड़की के शरीर पर चोट के निशान नहीं दिखे
लेकिन एक मां का दिल और परिजनों की आंखें कुछ और ही देख रही थीं. लड़की के शरीर पर मौजूद चोट के निशान चीख-चीखकर कह रहे थे कि उसके साथ हैवानियत हुई है. परिजन पहले दिन से कह रहे थे कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती, उसके साथ गैंगरेप हुआ है. लेकिन सत्ता और वर्दी के रसूख के आगे उनकी आवाज दबा दी गई. यहां तक कि पटना में जब लड़की को लेकर प्रदर्शन हो रहे थे, पुलिस लाठियां बरसा रही थी. अस्पतालों के डॉक्टरों ने भी पुलिस की हां में हां मिलाते हुए शुरुआती जांच में लीपापोती करने की पूरी कोशिश की.
एक पोस्टमार्टम ने नकाब दिया उतार
अब जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है तो पटना पुलिस और उन डॉक्टरों के चेहरे से नकाब उतर गया. रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि लड़की की मौत नींद की गोली से नहीं, बल्कि उसके साथ हुई बर्बरता और शारीरिक प्रताड़ना के कारण हुई थी. रिपोर्ट में ‘रेप से इंकार नहीं किया जा सकता’ की पुष्टि और शरीर पर मिले गहरे जख्मों ने पुलिस की ‘सुसाइड थ्योरी’ की धज्जियां उड़ा दीं. आनन-फानन में खुद को घिरता देख पटना पुलिस ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक को गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन सवाल अब भी वही है क्या सिर्फ एक गिरफ्तारी काफी है? क्यों इसे छुपाया जा रहा था? क्या पटना पुलिस गर्ल्स हॉस्टल के मालिक के प्रभाव में आ गया? क्या चित्रगुप्त नगर थाने की उस महिला दारोगा ने अपने वरीय अधिकारियों को गुमराह किया?
क्या बिहार के डीजीपी विनय कुमार इस मामले में संलिप्त हर उस चेहरे को बेनकाब करेंगे?
बिहार के पूर्व डीजीपी अभयनंद का बड़ा बयान
बिहार के डीजीपी विनय कुमार पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं. क्या वह उन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे जिन्होंने मामले को रफा-दफा करने के लिए झूठ का जाल बुना? क्या पटना के एएसपी और एसएसपी पर भी कार्रवाई होगी, जिन्होंने पहले से ही इसे आत्महत्या बताकर अपनी बात कह दी. बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में पटना पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
अभयानंद कहते हैं, ‘देखिए मुझे फैक्ट की ज्यादा जानकारी नहीं है. मैं भी सोशल मीडिया पर देख रहा हूं. शायद एफआईआर दर्ज करने के तीन-चार दिन बाद छात्रा की मौत हुई है. क्या पुलिस ने मरने से पहले लड़की का बयान लिया है? मुझे जानकारी नहीं है कि लड़की का बयान दर्ज करने के लिए पुलिस ने प्रयास किया? शायद किया ही होगा. डाइंग डिक्लेरेशन इस केस में अहम कड़ी होता है. मुझे लग रहा है कि इस केस को अनप्रोफेशनल तरीके से हैंडलिंग किया गया है. बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के एसएसपी को बयान नहीं देना चाहिए था. इनका दारोगा बोल देता है तो ये सत्य मान लेते हैं. ऐसा नहीं होता है. इस घटना को अनप्रोफेशनल तरीके से हैंडल किया गया. तहकीकात बढ़िया से होना चाहिए था.’
अब उन डॉक्टरों का क्या होगा जिन्होंने मेडिकल प्रोफेशन को कलंकित करते हुए गलत रिपोर्ट बनाने की कोशिश की? पटना एसएसपी के उस जल्दबाजी में दिए गए बयान की जवाबदेही कौन तय करेगा, जिसने पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया? आज पटना की गलियों में सन्नाटा है, लेकिन हर माता-पिता के मन में एक डर बैठ गया है. क्या हमारी बेटियां सुरक्षित हैं? क्या सिस्टम अपराधियों को सजा दिलाने के लिए है या उन्हें बचाने के लिए? वह मां आज भी अपनी बेटी की फोटो सीने से लगाकर इंसाफ मांग रही है. वह डॉक्टर तो नहीं बन सकी, लेकिन उसकी मौत ने बिहार के पूरे सिस्टम को आईसीयू में लाकर खड़ा कर दिया है.
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की उस मानसिकता का प्रतीक है, जहां सच को सत्ता के पैरों तले कुचलना आसान समझा जाता है. क्या बिहार के डीजीपी विनय कुमार इस मामले में संलिप्त हर उस चेहरे को बेनकाब करेंगे, जिसने इस लीपापोती में हिस्सा लिया?