Narak Nivaran Chaturdashi 2026। नरक निवारण चतुर्दशी व्रत का महत्व
Narak Nivaran Chaturdashi: सनातन परंपरा में कई ऐसे व्रत और पर्व बताए गए हैं, जो सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इंसान के कर्म, सोच और जीवन के रास्ते को भी सही दिशा देने का काम करते हैं. इन्हीं खास व्रतों में से एक है नरक निवारण चतुर्दशी. यह व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है और इसका सीधा संबंध भगवान शिव की कृपा से माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से व्यक्ति को अपने पिछले जन्मों और इस जन्म में हुई गलतियों से राहत मिलती है. आज के समय में जब इंसान तनाव, गलत फैसलों और अनजाने पापों के बोझ के साथ जी रहा है, तब ऐसे व्रत लोगों को आत्मिक शांति देने का जरिया बनते हैं. नरक निवारण चतुर्दशी को लेकर यह विश्वास है कि जो भक्त इस दिन नियम से व्रत रखता है और शिव भक्ति में लीन रहता है, उसे मृत्यु के बाद नर्क का भय नहीं सताता. यही वजह है कि इस दिन शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. साल 2026 में नरक निवारण चतुर्दशी का संयोग मासिक शिवरात्रि के साथ बन रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि यह व्रत कब रखा जाएगा, इसकी पूजा विधि क्या है और इसे रखने से भक्तों को कौन-कौन से लाभ मिलते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
कब है नरक निवारण चतुर्दशी 2026
साल 2026 में नरक निवारण चतुर्दशी 17 जनवरी, शनिवार को मनाई जाएगी. पंचांग के मुताबिक, इस दिन चतुर्दशी तिथि का मेल मासिक शिवरात्रि से हो रहा है, जो इसे और ज्यादा फलदायी बनाता है.
-चतुर्दशी तिथि की शुरुआत: 16 जनवरी 2026, रात 10:22 बजे
-चतुर्दशी तिथि की समाप्ति: 18 जनवरी 2026, सुबह 12:04 बजे
उदयातिथि के हिसाब से व्रत 17 जनवरीको रखा जाएगा. इस दिन शिव पूजा का विशेष महत्व माना गया है.
नरक निवारण चतुर्दशी व्रत का धार्मिक महत्व
नरक निवारण चतुर्दशी को भगवान शिव को समर्पित व्रत माना जाता है. धार्मिक कथाओं में बताया गया है कि इस दिन शिव भक्ति करने से इंसान के पाप कटते हैं और आत्मा को शुद्धता मिलती है. मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति इस व्रत को नियम और श्रद्धा के साथ करता है, उसे यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है.
कई लोग इस व्रत को जीवन में नई शुरुआत के रूप में भी देखते हैं. शिव को संहार और करुणा दोनों का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा इंसान को गलत रास्तों से हटाकर सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
क्यों रखा जाता है नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इंसान से जीवन में कई बार जाने-अनजाने में गलतियां हो जाती हैं. नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत इन्हीं भूलों से राहत दिलाने के लिए रखा जाता है. माना जाता है कि भगवान शिव इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं और उनके दोषों को क्षमा करते हैं. यह व्रत उन लोगों के लिए भी खास माना जाता है, जो मानसिक अशांति, डर या जीवन में रुकावटों से जूझ रहे होते हैं. शिव भक्ति से मन को स्थिरता मिलती है और नकारात्मक सोच दूर होती है.
नरक निवारण चतुर्दशी के दिन क्या करें
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. घर के मंदिर या शिव मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें.
-शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल चढ़ाएं
-बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें
-“ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बारजाप करें
-संभव हो तो रुद्राभिषेक जरूर करें
ऐसा माना जाता है कि इन उपायों से शिव जी जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
कैसे करें नरक निवारण चतुर्दशी व्रत का पारण
इस व्रत में सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखा जाता है. कुछ लोग फलाहार करते हैं, जबकि कई भक्त बिना अन्न-जल के व्रत रखते हैं. सूर्यास्त के बाद भगवान शिव की आरती कर व्रत का पारण किया जाता है.
पारण के समय मीठे फल या जल ग्रहण किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन बेर से पारण करना बहुत शुभमाना जाता है. इसके बाद जरूरतमंद लोगों को दान करना भी अच्छा माना जाता है.