Sesame Mathri Recipe। घर की बनी तिल मठरी
Til Mathri Rcipe: सर्दियों का मौसम आते ही खाने-पीने की चीजों में अपने आप बदलाव दिखने लगता है. गरमा-गरम चाय, मूंगफली, गुड़, तिल और देसी घी से बनी चीजें हर घर में बनने लगती हैं. ऐसे में अगर किसी स्नैक का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है, तो वो है तिल मठरी. यह एक ऐसी ट्रेडिशनल नमकीन है, जो स्वाद के साथ भावनाओं से भी जुड़ी होती है. दादी-नानी के हाथों से बनी तिल मठरी की खुशबू और उसका करारापन आज भी बचपन की याद दिला देता है. तिल मठरी खासतौर पर उत्तर भारत में सर्दियों के दिनों में बनाई जाती है. इसे चाय के साथ खाया जाता है, सफर में साथ ले जाया जाता है और त्योहारों पर मेहमानों को भी परोसा जाता है. तिल की वजह से यह मठरी सिर्फ टेस्टी ही नहीं होती, बल्कि शरीर को अंदर से गर्म रखने में भी मदद करती है. तिल में मौजूद कैल्शियम, आयरन और हेल्दी फैट्स सर्दियों में सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं.
आज के समय में लोग रेडीमेड स्नैक्स पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं, लेकिन घर पर बनी तिल मठरी का स्वाद और भरोसा अलग ही होता है. अच्छी बात यह है कि इसे बनाना न तो मुश्किल है और न ही ज्यादा समय लगता है, अगर सही तरीके से बनाई जाए, तो यह मठरी कई दिनों तक खराब भी नहीं होती. तो चलिए जानते हैं कि घर पर बिल्कुल बाजार जैसी क्रिस्पी तिल मठरी कैसे बनाई जा सकती है.
तिल मठरी बनाने के लिए जरूरी सामग्री
-मैदा -2 कप
-सफेद तिल -आधा कप
-अजवाइन -1 छोटा चम्मच
-नमक -स्वाद के अनुसार
-घी या तेल -4 से 5 बड़े चम्मच (मोयन के लिए)
-पानी -आटा गूंथने के लिए
-तलने के लिए तेल
तिल मठरी बनाने की आसान और भरोसेमंद रेसिपी
1. तिल मठरी बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े परात या बर्तन में मैदा अच्छे से छान लें. मैदा छानने से मठरी हल्की और बराबर बनती है. अब इसमें सफेद तिल, अजवाइन और नमक डालें. सारी सूखी चीजों को अच्छे से मिला लें, ताकि हर मठरी में स्वाद बराबर रहे.
2. इसके बाद इसमें घी या तेल डालें. अब उंगलियों की मदद से मैदा और घी को अच्छे से रगड़ते हुए मिलाएं. इस स्टेप पर खास ध्यान देना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि सही मोयन से ही मठरी करारी बनती है. आप चेक करने के लिए थोड़ा सा मैदा मुट्ठी में दबाएं, अगर वो आकार बना ले, तो समझ लें मोयन सही है.
3. अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें. ध्यान रखें कि आटा ज्यादा नरम न हो, वरना मठरी तलते समय तेल सोख लेगी. आटा गूंथने के बाद उसे ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रख दें, ताकि आटा सेट हो जाए.
4. सेट हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें. हर लोई को हल्का सा बेलें और मठरी का मोटा सा आकार दें. अगर आप चाहें तो कांटे की मदद से मठरी पर हल्के छेद कर सकते हैं. इससे तलते वक्त मठरी फूलती नहीं है और अंदर तक अच्छे से पकती है.
5. अब एक कढ़ाही में तेल डालकर धीमी आंच पर गर्म करें. तेल ज्यादा तेज नहीं होना चाहिए. तैयार मठरियों को धीरे-धीरे तेल में डालें और धीमी आंच पर ही तलें. बीच-बीच में मठरियों को पलटते रहें, ताकि वे चारों तरफ से बराबर सिकें.
6. जब मठरी का रंग हल्का सुनहरा और टेक्सचर पूरी तरह क्रिस्पी हो जाए, तब उन्हें तेल से निकाल लें. निकालने के बाद टिश्यू पेपर पर रखें, ताकि ज्यादा तेल निकल जाए.
तिल मठरी को कैसे रखें लंबे समय तक फ्रेश
मठरियों को पूरी तरह ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद इन्हें किसी साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें. सही तरीके से रखने पर तिल मठरी 15 से 20 दिनों तक आराम से चल जाती है. जब भी मन हो, चाय के साथ निकालकर एन्जॉय करें.
तिल मठरी को और ज्यादा टेस्टी बनाने के टिप्स
-मठरी हमेशा धीमी आंच पर ही तलें
-मोयन में कंजूसी न करें
-आटा ज्यादा नरम न रखें
-तिल हल्का भुना हुआ डालें तो स्वाद और बढ़ जाता है