कभी राजनीति का अखाड़ा था पीजी कॉलेज का यह मंच, जहां इंदिरा गांधी ने दिया था स्पीच, आज ऐतिहासिक धरोहर
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Ghazipur News: गाजीपुर के पीजी कॉलेज का एक चबूतरा इतिहास के पन्नों में आज भी दर्ज है. इस चबूतरे पर खड़े होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गाजीपुर की जनता को संबोधित किया था. स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी मंच से शिक्षा और कृषि से जुड़े विकास कार्यों का शिलान्यास भी हुआ था.
गाजीपुर: जिले के पीजी कॉलेज परिसर में बना एक छोटा-सा चबूतरा आज भले ही शांत खड़ा दिखता हो, लेकिन 12 जनवरी 1970 को यही जगह जिले के इतिहास में दर्ज हो गई थी. इसी चबूतरे से देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गाजीपुर की जनता को संबोधित किया था. उस दौर में यह किसी छोटे शहर के लिए बड़ी राजनीतिक घटना मानी जाती थी. पीजी कॉलेज का यह मैदान, जहां आज छात्र सामान्य गतिविधियों में लगे रहते हैं, कभी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी मंच से शिक्षा और कृषि से जुड़े विकास कार्यों का शिलान्यास भी हुआ था.
गाजीपुर के मालवीय राजेश्वर सिंह की भूमिका
इस ऐतिहासिक दौरे के पीछे गाजीपुर के शिक्षा जगत की एक मजबूत शख्सियत राजेश्वर सिंह की अहम भूमिका रही. उन्हें लोग सम्मान से “गाजीपुर का मालवीय” कहा करते थे. शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान इतना व्यापक था कि राजनीतिक नेतृत्व से उनके सीधे संबंध थे. लोकल 18 की जब बात एक स्थानीय बुजुर्ग और सम्मानित नागरिक के.पी. सिंह से हुई, तो उन्होंने बताया कि भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद देश में विकास कार्यों को गति देने का माहौल था. उसी समय राजेश्वर सिंह के प्रयासों से इंदिरा गांधी को गाजीपुर आमंत्रित किया गया. दौरे के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के पास सिंचाई के लिए एक पंप सेट का शिलान्यास भी प्रस्तावित था. इसी कार्यक्रम के क्रम में पीजी कॉलेज परिसर का शिलान्यास हुआ और संबोधन दिया गया.
साधारण दिखने वाला चबूतरा, असाधारण इतिहास
आज यह चबूतरा देखने में बेहद सामान्य लगता है, ना कोई बड़ा शिलालेख, ना कोई चमकदार संरचना, लेकिन यही इसकी खासियत भी है. यह मंच उस दौर का गवाह है, जब गाजीपुर जैसे शहर को सीधे देश की सत्ता से जोड़ा गया था. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस जगह का ऐतिहासिक महत्व नई पीढ़ी तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाया है. जबकि यह चबूतरा सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि वह बिंदु है, जहां से गाजीपुर की शिक्षा, कृषि और राजनीति से जुड़ी उम्मीदों को राष्ट्रीय मंच मिला था.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.