घर की खुदाई में मिला 100 साल पुराना घड़ा, अंदर भरा था सोना ही सोना, गरीब मां-बेटे के बदल गए दिन
कर्नाटक के गडग जिले के लक्कुंडी गांव में एक 14 साल के कक्षा 8 के छात्र प्रज्वल बसवराज रिट्टी ने अपनी ईमानदारी से पूरे देश का दिल जीत लिया है. गरीबी में जी रही विधवा मां के साथ घर बनाने के लिए जमीन खोदते समय उसे और उसकी मां गंगव्वा को करीब 100 साल पुराना खजाना मिला. इसमें 466 ग्राम सोने के गहने और 634 ग्राम तांबे के प्राचीन अवशेष थे. खजाने में 22 सोने के गहने शामिल हैं. एक भारी सोने की माला, चूड़ियां, अंगूठियां, कंगन और अन्य जेवर के साथ में मोती, मूंगा, नीलम, क्रिस्टल और एक काला पत्थर भी मिला. इतना बड़ा खजाना देखकर भी प्रज्वल का मन नहीं डोला और उसने सब कुछ सरकारी अधिकारियों को सौंप दिया. विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह खजाना 100 साल से ज्यादा पुराना है.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कानून मंत्री एचके पाटिल ने प्रज्वल की ईमानदारी की जमकर तारीफ की है. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘प्रज्वल की ईमानदारी किसी भी खजाने से बड़ी है. ऐसी ईमानदारी को सम्मान मिलना चाहिए. सरकार इस परिवार की मदद करेगी और उचित इनाम देगी.’ वहीं गग जिले के प्रभारी मंत्री पाटिल ने रिट्टी परिवार से मुलाकात की और कहा, ‘हम कैबिनेट में चर्चा कर परिवार को सम्मान और सहायता देने का फैसला लेंगे.’
कैसे मिला खजाना?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रज्वल और उसकी मां गंगव्वा गरीबी में जिंदगी गुजार रहे हैं. मां मजदूरी करती हैं और परिवार दादी के घर में रहता है. इस परिवार के पास थोड़ी सी जमीन है, जहां वे अपना छोटा सा घर बनाने की सोच रहे थे. शनिवार को यहां मजदूरों के साथ खुदाई शुरू हुई और करीब 5 फीट गहराई पर मजदूर का फावड़ा किसी धातु से टकराया. जब मिट्टी हटाई गई तो वहां एक मटका निकला, जिसमें सोने के चमकते गहने भरे थे. पास ही तांबे के अवशेष और कीमती पत्थर भी मिले.
प्रज्वल ने तुरंत सारा सामान दादी के घर के पूजा कमरे में रखकर ताला लगा दिया. परिवार के साथ चर्चा करने के बाद उसने फैसला किया कि यह खजाना सरकार का है. प्रज्वल ने मंगलवार को खुद जिला अधिकारियों को यह सारा खजाना सौंप दिया. ये सारे सामान अब सरकारी संरक्षण में हैं.
परिवार की मांगें
मां गंगव्वा ने अधिकारियों से कहा कि परिवार को आर्थिक मदद मिलनी चाहिए. उन्होंने प्रज्वल के लिए सरकारी नौकरी और खुदाई वाली जमीन पर घर बनाने की अनुमति की मांग की. अभी निर्माण कार्य रुक गया है.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि प्रज्वल जैसे बच्चों की ईमानदारी को प्रोत्साहन मिलना चाहिए. कानून के अनुसार, ऐसे खजाने का 20 प्रतिशत मूल्य उस व्यक्ति या परिवार को मिल सकता है, जिसने इसे खोजा और लौटाया है. सरकार जल्द ही कैबिनेट में इस पर चर्चा कर उचित इनाम और मदद का ऐलान करेगी.
प्रज्वल अब गांव और जिले में हीरो बन चुका है. लोग उसकी ईमानदारी की मिसाल दे रहे हैं. यह घटना साबित करती है कि आज के दौर में भी ईमानदारी और नैतिकता का महत्व बरकरार है. प्रज्वल की इस घटना ने न सिर्फ उसके परिवार के लिए उम्मीद की किरण जगाई है, बल्कि पूरे समाज को एक संदेश भी दिया है. खजाना सोने का नहीं, ईमानदारी का होता है.