Capsicum farming : फरवरी में बुवाई अप्रैल में कमाई, किस्मत बदल देगी शिमला मिर्च की खेती, जानें तरीका

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Capsicum farming tips : शिमला मिर्च की खेती किसानों की किस्मत बदल सकती है. इसके लिए 18 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श है. बीज अंकुरण के लिए लगभग 20 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है. शिमला मिर्च की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली काली दोमट, बलुई दोमट या रेतीली मिट्टी सबसे सही है. कैलिफोर्निया वंडर, अर्का मोहिनी, अर्का गौरव, हरी रानी और हंटिंगटन शिमला मिर्च की टॉप किस्में हैं. ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाने से पानी, खाद और मेहनत की बचत होती है. बरसात में अधिक पानी और उमस से फसल को नुकसान हो सकता है.

बलिया. कम लागत में बंपर मुनाफा, कौन किसान ये नहीं चाहता. शिमला मिर्च की खेती ऐसी ही है, जो किसानों के लिए अधिक कमाई का तगड़ा जरिया बन रही है. यह फसल ठंडे और हल्के गर्म मौसम में सबसे बेहतर उत्पादन दे सकती है. इसकी सामान्य खेती के लिए फरवरी–मार्च बुवाई का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, जबकि अगेती खेती के लिए अप्रैल–मई में पौध लगाकर जल्दी उत्पादन लिया जा सकता है. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह बताते हैं कि पॉलीहाउस तकनीक अपनाने वाले किसान साल भर शिमला मिर्च उगाकर बाजार में लगातार मुनाफा कमा सकते हैं. शिमला मिर्च के लिए 18 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श है. बीज अंकुरण के लिए लगभग 20 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है. शिमला मिर्च की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली काली दोमट, बलुई दोमट या रेतीली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

खेत की तैयारी

खेत में गहरी जुताई कर सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए. मिट्टी में फंगल रोग से बचाव के लिए ट्राइकोडर्मा का प्रयोग बहुत अच्छा होता हैं. शिमला मिर्च की टॉप किस्मों की बात करें, तो कैलिफोर्निया वंडर, अर्का मोहिनी, अर्का गौरव, हरी रानी और हंटिंगटन जैसी कई किस्में शामिल हैं, जो उच्च पैदावार, आकर्षक रंग (लाल, पीला, हरा) के साथ अच्छी बाजार मांग के लिए काफी लोकप्रिय हैं. इस प्रकार से आप सही किस्मों का चयन कर सकते हैं. सही पौध तैयार करने के लिए बीजों को 0.2% कार्बेन्डाजिम घोल से उपचारित करना चाहिए.

कब रोपाई, कितने दिन में तैयार

लगभग 30 से 35 दिन में पौध रोपाई योग्य हो जाती है. जब पौधे 10 से 15 सेमी ऊंचे और 4 से 6 पत्तियों वाले हो जाएं, तब रोपाई करना सही होता है. पौधों को 45 से 60 सेमी की दूरी पर, बेहतर हो तो शाम के समय, लगाएं, ताकि झुलसने का खतरा खत्म हो जाए. शिमला मिर्च की खेती में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाने से पानी, खाद और मेहनत की बचत होती है. फल आने के समय सिंचाई बेहद जरूरी है. बरसात के मौसम में अधिक पानी और उमस से फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए विशेष सावधानी रखें. रोपाई के 60 से 75 दिन बाद फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं. नियमित कटाई करने से उत्पादन लगातार बढ़ता है. इस प्रकार थोड़ी सी सावधानी से अगर शिमला मिर्च की खेती की जाए, तो किसान मालामाल हो सकते हैं.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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