कुरथी दाल के फायदे और पारंपरिक रेसिपी जानें, स्वाद और पोषण से भरपूर.
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Kurthi dal Recipe: कुरथी दाल, जिसे कुल्थी या हुलगा भी कहते हैं. इसे लोग सर्दियों में खूब पसंद करते हैं. यह ऊर्जा और गर्मी देने वाली पारंपरिक भारतीय दाल है. यह आयरन, प्रोटीन और फाइबर भरपूर होती है. आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में.

कुरथी दाल, जिसे कई इलाकों में कुल्थी, हुलगा या हॉर्स ग्राम के नाम से जाना जाता है. भारतीय गांवों की पारंपरिक थाली का अहम हिस्सा रही है. यह दाल स्वाद में हल्की कसैली और देसी होती है, लेकिन इसके भीतर भरपूर पोषण और ताक़त छुपी होती है. सादा भोजन पसंद करने वालों के लिए यह दाल आज भी पहली पसंद बनी हुई है.

गृहणी शर्मीला सुमी ने बताया कि पुराने समय में किसान भारी मेहनत वाले काम के बाद कुरथी दाल को ऊर्जा के स्रोत के रूप में खाते थे. बिना ज्यादा मसालों के बनी यह दाल शरीर को तुरंत ताक़त देती थी और लंबे समय तक पेट भरा रहने का एहसास कराती थी. यही वजह है कि इसे मेहनतकश लोगों का भोजन कहा जाता है.

उन्होंने आगे बताया कि कुरथी दाल की तासीर गर्म मानी जाती है. इसलिए इसे खासतौर पर सर्दियों के मौसम में बनाया जाता है. ठंड के दिनों में यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती है और मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायक मानी जाती है.
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साथ ही आगे बताया कि अगर हम पोषक तत्वों की बात करें तो कुरथी दाल आयरन, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है. आयुर्वेद में इसे शरीर को अंदर से मजबूत बनाने वाली दाल माना गया है. यह पाचन को दुरुस्त रखती है और कमजोरी दूर करने में सहायक होती है.

साथ ही कहा कि कुरथी दाल बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती. कुल्थी दाल, पानी, लहसुन, हरी मिर्च, सरसों का तेल, जीरा, हींग, हल्दी, लाल मिर्च और नमक बस इन्हीं देसी चीजों से इसका स्वाद निखर जाता है. कई गांवों में इसे बिना प्याज के ही बनाया जाता है.

कुरथी दाल को 8-10 घंटे या रातभर भिगोना जरूरी होता है, जिससे दाल अच्छी तरह पक सके. इसके बाद कुकर में पानी, हल्दी और नमक डालकर 4-5 सीटी तक पकाया जाता है. पकने के बाद दाल को हल्का मसलने से इसका गाढ़ापन बढ़ जाता है.

उन्होंने बताया कि कढ़ाही में सरसों का तेल गरम कर जीरा, हींग, कुटा लहसुन, हरी मिर्च और प्याज डालकर भूनते हैं. फिर पकी हुई दाल और लाल मिर्च डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. यही देसी तड़का कुरथी दाल के स्वाद को खास बना देता है.

उन्होंने बताया कि आज भी गांवों में कुरथी दाल को पारंपरिक तरीकों से बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है. सादा स्वाद, भरपूर पोषण और देसी खुशबू वाली यह दाल आधुनिक दौर में भी अपनी पहचान बनाए हुए है.