स्वामी विवेकानंद फिल्म 1998: कहानी, कलाकार और युवा दिवस का महत्व

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नई दिल्ली.  हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है. यह दिन युवाओं को आत्मविश्वास, साहस और सेवा के मूल्यों से जोड़ने के लिए समर्पित है. स्वामी विवेकानंद ने न केवल भारत में, बल्कि पश्चिमी दुनिया में भी वेदांत दर्शन और योग के माध्यम से भारतीय संस्कृति की गहरी छाप छोड़ी. उनके विचारों का असर सिनेमा पर भी पड़ा, जिसकी झलक साल 1998 में आई फिल्म ‘स्वामी विवेकानंद’ में देखने को मिली.

स्वामी विवेकानंद का युवाओं को दिया गया संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उनका प्रसिद्ध कथन — ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए’ — आज भी लाखों युवाओं को प्रेरणा देता है. फिल्म में भी इसी विचारधारा को केंद्र में रखकर उनके जीवन और दर्शन को बड़े पर्दे पर पेश किया गया था.

मिथुन चक्रवर्ती को मिला था नेशनल अवॉर्ड

इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती ने स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की भूमिका निभाई थी. उनके दमदार अभिनय को खूब सराहा गया और इसी किरदार के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म में कई दिग्गज कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, जिन्होंने इस आध्यात्मिक यात्रा को जीवंत बना दिया.

लिखने में लगे थे 11 साल

साल 1998 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘स्वामी विवेकानंद’ का निर्देशन जी. वी. अय्यर ने किया था, जबकि इसका निर्माण टी. सुब्बारामी रेड्डी ने किया. इस प्रोजेक्ट के लिए सालों तक रिसर्च किया गया था. निर्देशक को इसकी पटकथा तैयार करने में करीब 11 साल लगे. फिल्म की शूटिंग 1994 में पूरी हो चुकी थी, लेकिन इसे 12 जून 1998 को सिनेमाघरों में रिलीज किया गया. बाद में 15 अगस्त 1998 को इसका दूरदर्शन पर प्रीमियर हुआ.

फिल्म में सर्वदमन डी. बनर्जी ने स्वामी विवेकानंद का किरदार निभाया, जबकि मिथुन चक्रवर्ती के अलावा प्रदीप कुमार (पिता), तनुजा (मां), देबाश्री रॉय, मीनाक्षी शेषाद्री, ममूटी, शम्मी कपूर, शशि कपूर, अनुपम खेर, हेमा मालिनी, राखी और जया प्रदा जैसे बड़े कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए.

यह फिल्म स्वामी विवेकानंद के जन्म से लेकर 1897 में पश्चिम से भारत लौटने तक के जीवन को दर्शाती है. इसमें उनके आत्मसंघर्ष, गुरु रामकृष्ण के प्रति भक्ति और 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण जैसे अहम पड़ावों को प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है. भले ही फिल्म को समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली हो, लेकिन मिथुन चक्रवर्ती का अभिनय इसकी सबसे बड़ी ताकत माना गया.

12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानंद, जिनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्ता था, भारत के महान आध्यात्मिक गुरुओं और विचारकों में से एक थे. वह रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे और वेदांत दर्शन को वैश्विक पहचान दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही. उन्होंने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं.

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