माघ मेले में नहीं होगा अमृत स्नान, मेला प्रशासन का बड़ा फैसला, कहा- कोई नई परंपरा नहीं शुरू होगी

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माघ मेले के स्नान को लेकर फैसला लिया गया है कि माघ मेले में अमृत स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी. माघ मेला 2026 में किसी भी नई परंपरा को प्रारंभ नहीं करने दिया जाएगा. स्नान पर्वों पर किसी भी तरह के अमृत स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी.

माघ मेले में नहीं होगा अमृत स्नान, मेला प्रशासन का बड़ा फैसलामाघ मेले को लेकर बड़ा अपडेट.

प्रयागराजः संगम के तट पर आयोजित माघ मेला 2026 से जुड़ी सबसे बड़ी खबर सामने आई है. माघ मेले के स्नान को लेकर फैसला लिया गया है कि माघ मेले में अमृत स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी. माघ मेला 2026 में किसी भी नई परंपरा को प्रारंभ नहीं करने दिया जाएगा. स्नान पर्वों पर किसी भी तरह के अमृत स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह कुंभ की परंपरा है, इसलिए माघ मेले में यह अनुमन्य नहीं होगी.

माघ मेले में अमृत स्नान की तैयारी कर रहे थे कुछ साधु-संत
मेला अधिकारी आईएएस ऋषिराज ने मीडिया के माध्यम से यह जानकारी दी है. ऐसी चर्चा थी कि कुछ साधु संत अमृत स्नान की तैयारी कर रहे थे. मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान से स्नान घाटों पर किसी हादसे की भी संभावना हो सकती है. क्योंकि कुंभ और महाकुंभ मेले में अमृत स्नान के लिए मेला प्रशासन अलग इंतजाम करता है. जबकि माघ मेले में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की जाती है.

3 जनवरी से शुरू हुआ माघ मेला
पौष पूर्णिमा स्नान के साथ शनिवार से संगम की रेती पर माघ मेला प्रारंभ हुआ है. बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और युवा 3 जनवरी को सुबह से ही गंगा और संगम की ओर जाते दिखाई दिए। इस स्नान पर्व के साथ एक माह का कल्पवास भी 3 जनवरी से शुरू हो गया. त्रिवेणी संगम आरती सेवा समिति के अध्यक्ष आचार्य राजेंद्र मिश्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि माघ मेले में करीब पांच लाख कल्पवासियों का आज से कल्पवास प्रारंभ हो जाएगा, जिसके तहत वे दिन में दो बार गंगा स्नान और एक पहर भोजन लेते हैं और बाकी समय अपने आराध्य देवता का ध्यान, पूजन आदि करते हैं.

पौष पूर्णिमा के दिन लाखों लोगों ने लगाई थी डुबकी
उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड पड़ने के कारण सुबह स्नानार्थियों की भीड़ थोड़ी कम रही, लेकिन धूप निकलने के साथ उनकी संख्या बढ़ने की संभावना है. पौष पूर्णिमा स्नान पूरा दिन भर चला था. मेला प्रशासन के मुताबिक सुबह 10 बजे तक नौ लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में स्नान किया था.

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Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें

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