गुड न्‍यूज : अमेर‍िका ने रूसी जहाज पर मौजूद सभी भारतीयों को छोड़ा, यूएस आर्मी ने कर ल‍िया था कब्‍जा

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वाशिंगटन/नई दिल्ली. अमेरिका से भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पिछले हफ्ते अटलांटिक महासागर में जब्त किए गए रूसी जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को रिहा कर दिया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने संदिग्ध गतिविधियों या प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में अटलांटिक में एक रूसी जहाज को इंटरसेप्ट कर अपने कब्जे में लिया था. इस जहाज पर चालक दल (Crew) के रूप में कई भारतीय नागरिक भी सवार थे. जहाज के जब्त होते ही इन भारतीयों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं.

अमेरिकी अधिकारियों ने जांच और पूछताछ की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पाया कि इन भारतीय नागरिकों का जहाज के संचालन या मालिकाना हक से जुड़े विवादों में कोई हाथ नहीं था. वे केवल वहां कर्मचारी के तौर पर तैनात थे. इस पुष्टि के बाद, अमेरिका ने सभी भारतीयों को जाने की अनुमति दे दी है. इस कदम को भारत की कूटनीतिक सक्रियता और अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं और जल्द ही उनकी घर वापसी सुनिश्चित की जाएगी.

तल्‍खी के बीच बड़ा ब्रेकथ्रू
भारत के लिए यह घटनाक्रम कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर ऐसे समय में जब हालिया कुछ मुद्दों को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी तल्खी और असहजता महसूस की जा रही थी. अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा बिना किसी लंबी कानूनी अड़चन या पूछताछ के भारतीय नागरिकों को तुरंत रिहा करना यह दर्शाता है कि वाशिंगटन नई दिल्ली की चिंताओं को प्राथमिकता देता है. यह कदम दोनों देशों के बीच भरोसे को फिर से मजबूत करने का काम करेगा. यह स्पष्ट संकेत है कि भले ही अमेरिका रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रहा हो, लेकिन वह इस प्रक्रिया में अपने रणनीतिक साझेदार भारत के नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता.

अगर ज्‍यादा रोकते तो तनाव बढ़ता
यह फैसला इस बात का भी प्रमाण है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी इतनी परिपक्व हो चुकी है कि वह तात्कालिक तनावों और मतभेदों से ऊपर उठकर काम कर सकती है. यदि इन भारतीयों को लंबा रोका जाता या उन पर कार्रवाई होती, तो भारत के लिए स्थिति बेहद पेचीदा हो सकती थी, क्योंकि उसे अपने पुराने मित्र रूस और रणनीतिक साझेदार अमेरिका के बीच संतुलन बनाने में भारी मुश्किल होती. इस रिहाई ने एक संभावित कूटनीतिक टकराव को टाल दिया है और यह संदेश दिया है कि तमाम ‘खटास’ के बावजूद, मानवीय और आपसी सहयोग के चैनल अब भी खुले और प्रभावी हैं.

एक दिन में दूसरी खुशखबरी

आज का दिन नई दिल्ली के लिए दोहरी राहत लेकर आया. दिन की शुरुआत रूसी जहाज से भारतीय नाविकों की सुरक्षित रिहाई की खबर से हुई थी, तो वहीं शाम होते-होते अमेरिका की तरफ से एक और बड़ा सकारात्मक संकेत मिल गया. अमेरिकी दूत सर्जियो गोर (के एक बयान ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि भारतीय शेयर बाजार को भी संजीवनी दे दी. सोमवार सुबह शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला था. निवेशकों के मन में डर था कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील खटाई में पड़ सकती है. लेकिन तभी अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए एक अहम बयान दिया. उन्होंने साफ किया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत बंद नहीं हुई है. इस एक लाइन के बयान ने बाजार का मूड पूरी तरह बदल दिया. सुबह जो सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में गोते लगा रहे थे, वे इस बयान के बाद शानदार रिकवरी करते हुए पटरी पर लौट आए. निवेशकों को भरोसा मिला कि आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच सब कुछ ठीक है.

अमेरिका का बदलता रुख?

आज की ये दो घटनाएं, पहले अटलांटिक में रूसी जहाज से भारतीयों को बिना शर्त छोड़ना और फिर ट्रेड डील पर सकारात्मक सफाई देना, यह इशारा करती हैं कि अमेरिका अब धीरे-धीरे भारत के हालात और उसकी ज‍ियोपॉल‍िट‍िक्‍स की मजबूरियों को समझने की कोशिश कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को यह अहसास हो रहा है कि एशिया में चीन को संतुलित करने के लिए भारत का साथ जरूरी है. इसलिए, हालिया खटास के बावजूद, वाशिंगटन अब डैमेज कंट्रोल के मूड में है और भारत की चिंताओं को सम्मान दे रहा है. आज का दिन यह साबित करता है कि दोनों देशों के रिश्तों की नींव अब भी मजबूत है.

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